
जयपुर। कोरोना काल में पिछले साल सोने के दाम में 30 फीसदी इजाफा हुआ और इसका असर ज्वैलरी की कीमतों पर साफ दिखा। ज्वैलरी की मांग घटने से ज्वैलर्स ने डिजिटल गोल्ड कारोबार को बढ़ाने से लेकर बिक्री के नए तरीके आजमाने शुरू किए। यह गोल्ड में निवेशकों के लिए भले ही अच्छा हो, लेकिन ज्वैलरी के खरीदारों के लिए मुश्किल साबित हो रहा था। लेकिन पिछले छह दिनों से चल रही सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट ने एक बार फिर ज्वैलरी का कारोबार कर रहे कारोबारी के चहरे पर चमक लौटा दी है।
ज्वैलरी के घटते डिमांड से जूझ रहे थे ज्वैलर्स
ज्वैलरी की घटी मांग से परेशान ज्वैलर्स इस समस्या को सुलझाने के लिए नया तरीका आजमा रहे थे। ज्वैलर्स को लग रहा था कि इस साल में भी सोने के दाम कम नहीं होंगे। लिहाजा आम ग्राहक के लिए ज्वैलरी भी महंगी होगी। ऐसे में ज्वैलर्स की ओर से 22 कैरेट की जगह 14 और 18 कैरेट के गोल्ड और डायमंड लगी गोल्ड ज्वैलरी को प्रमोट किया जा रहा था, ताकि सर्राफा बाजार में ग्राहकी की चमक फिर लौटे।
टीकाकरण की सफलता पर नजर
विश्लेषकों के एक वर्ग का कहना है कि अगर कोविड-19 का टीकाकरण सही ढंग से नहीं हुआ और ग्लोबल अर्थव्यवस्था की स्थिति ऐसी ही लचर रही तो, सोना 65 हजार रुपए प्रति दस ग्राम पर भी पहुंच सकता है। चीन और अमेरिका के बीच तनाव का असर भी सोने पर पड़ सकता है। पिछले साल सोने में भारी बढ़ोतरी के बीच दाम में थोड़ी देर के लिए हल्की गिरावट आई थी, लेकिन इसके बाद फिर इसने रफ्तार पकड़ ली।