
राजस्थान के नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। सांसद बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ध्यान राजस्थान के बाड़मेर जिले सहित अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाए जाने और जबरन ध्वस्तीकरण की घटनाओं की ओर आकर्षित किया। संसद के पटल पर बात रखते हुए बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि देश के लिए राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन इसके साथ ही कानून और संविधान के दायरे में रहकर सभी धर्मों और उनके धार्मिक स्थलों का सम्मान किया जाना भी उतना ही आवश्यक है।
सांसद बेनीवाल ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना किसी पारदर्शी संवाद और विधिक प्रक्रिया अपनाए की जा रही कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल एक केंद्रीय टीम बाड़मेर भेजने की मांग उठाई है।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने गृह मंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपने धार्मिक स्थलों के मान-सम्मान का पूर्ण अधिकार देता है। यदि किसी धार्मिक स्थल को लेकर कोई कानूनी विवाद, सुरक्षा संबंधी चिंता या प्रशासनिक आवश्यकता है भी, तो उसका हल केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही निकाला जाना चाहिए।
बेनीवाल ने कहा कि यदि बिना किसी ठोस कानूनी प्रक्रिया के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो इससे स्थानीय नागरिकों की भावनाएं आहत होती हैं और सीमावर्ती इलाकों में सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का अंदेशा बना रहता है।
उन्होंने बताया कि बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में हुई इस तरह की एकतरफा कार्रवाई के कारण वहां रहने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज के लोगों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए आरएलपी सुप्रीमो ने बाड़मेर जिले के उन विशिष्ट स्थानों का ब्योरा दिया जहां हाल के दिनों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है-
जामा मस्जिद (सियाई)
मेकन का पार
केरकोरी
रामपुरा (दहेवा)
दरगाह सैयद गुल मोहम्मद शाह
भलगांव (बाखासर) तथा आसपास की अन्य मस्जिदें
सांसद बेनीवाल ने कहा कि इन स्थानों पर हुई कार्रवाई से सीमावर्ती क्षेत्र के लोग काफी दुखी और आक्रोशित हैं।
अपने वक्तव्य के अंत में सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से निपटा जा सके।
बेनीवाल ने आग्रह किया कि भविष्य में सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी धार्मिक स्थल या आवासीय भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से पहले माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन किया जाए। किसी भी एक्शन से पहले स्थानीय नागरिकों और धर्मगुरुओं के साथ संवाद स्थापित किया जाए ताकि बिना किसी भेदभाव के न्यायसंगत नीति के तहत ही कार्य हो। जिन-जिन धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा चुका है, वहां केंद्र सरकार तुरंत अपनी एक उच्चस्तरीय जांच टीम भेजे। यह टीम स्थानीय प्रभावित लोगों से बातचीत करे और धार्मिक स्थलों का मान-सम्मान व स्थिति बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।