
health news in hindi : कुपोषण या पर्यापत पोषण नहीं मिलना मां और उसके बच्चे दोनों के लिए जानलेवा है । ( pregnant women diet ) गांवों और देहात में तो तमाम भ्रांतियां इन सब कि जिम्मेदार है । ( Iron pills ) ये सच है ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं आयरन और फोलिक ऐसिड की ( Pregnant women ) गोली इसलिए नहीं खातीं क्योंकि बच्चा काला पैदा होगा, पपीता खाने से उनका गर्भ गिर सकता है, ज्यादा खाने से बच्चा इतना मोटा होगा कि डिलिवरी सिजेरियन से करवानी होगी। ये तमाम भ्रांतियां हैं जो गर्भवती महिलाओं और उनके पेट में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही हैं।
विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टस का कहना है भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या 8 लाख से भी कहीं ज्यादा है। पिछले दो दशक में कुपोषण से मौत मामले में भारत ने काफी सुधार किया है लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई हैं। आज भी गांवों में जन्म लेने वाले 1 हजार बच्चों में से 46 नवजात जिंदा नहीं रहते वहीं 5 साल से कम उम्र में यह आंकड़ा 56 है।
गांवों में खानपान को लेकर जागरुकता की कमी
पपीते के बारे में लोगों की अनेक भ्रांतिया है लेकिन पका हुआ पपीता बेहद सुपाच्य और पोषण से भरपूर होता है और यह आयरन की गोली से होने वाली कब्जियत दूर भगाता है। लेकिन अधिकांश महिलाएं गर्भपात के डर से इससे दूर रहती हैं। ये सब बातें दिखाती हैं कि गांवों में खानपान पर जागरूकता की कितनी कमी है। गर्भवती महिलाओं का वजन 10-12 किलो बढ़ना आम बात है, लेकिन सिर्फ नॉर्मल डिलिवरी की आशा में वह खाना कम खाती हैं, तो वह खुद तो कमजोर होती ही हैं, गर्भ में पल रहे बच्चे को भी कम पोषण मिलता है। नतीजा बच्चे का विकास बाधित होता है, समय से पहले बच्चे का जन्म हो जाता है या बच्चा बेहद कम वजन वाला पैदा होता है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच यह भी भ्रांति है कि सिर्फ पसलियां दिखने वाला बच्चा ही कुपोषण का शिकार है। कई बार बच्चे का वजन लंबाई के मुताबिक ठीक है, लेकिन अगर चिप्स पापड़ जैसी चीजें ज्यादा खा रहा है तो उसे पर्याप्त पोषण नहीं मिलेगा।