
राहुल सिंह
राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के नए भवन का शिलान्यास मानसरोवर में शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी करेंगे। नए भवन को बनने में काफी समय लगेगा तब तक चांदपोल में चल रहे कांग्रेस पार्टी के भवन से पार्टी का काम होगा। कभी जौहर भवन के नाम से संचालित कांग्रेस पार्टी के इस भवन का इतिहास करीब 70 साल पुराना है। इस भवन ने कई बार कांग्रेस की सरकारों को आते-जाते देखा, वहीं कांग्रेस का विभाजन भी देखा। कांग्रेस का इस भवन से एक बार लंबे समय तक साथ भी छूटता देखा तो वापस इसका साथ मिलता भी देखा। इतिहास के पन्नों में जाए तो चांदपोल में चल रहे भवन को पार्टी ने साठ के दशक में लोहीवाल परिवार से किराए पर लिया था। उसके बाद जब नाथूराम मिर्धा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने तो उन्होंने इस जौहर भवन को लोहीवाल परिवार से खरीद लिया था। तब से यह पार्टी का भवन बन गया था।
कांग्रेस का विभाजन हुआ तो छिना भवन
इसके बाद जब 1978 में कांग्रेस का विभाजन हो गया और नई कांग्रेस (इंदिरा) के नाम से गांधी की अध्यक्षता में बनी। उस वक्त नाथूराम मिर्धा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे। वहीं हीरालाल देवपुरा व जगन्नाथ पहाड़िया प्रदेश कांग्रेस महामंत्री थे, लेकिन यहां भी कांग्रेस में विभाजन हो गया और राम किशोर व्यास, हीरालाल देवपुरा, जगन्नाथ पहाड़िया, नवल किशोर शर्मा आदि नेता इंदिरा कांग्रेस में शामिल हो गए। यह भवन कांग्रेस के विभाजन के बाद शरद पवार की पार्टी कांग्रेस (अर्स) के पास चला गया और कांग्रेस का चांदपोल वाला भवन उनके हाथ से निकल गया और नई इंदिरा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रामकिशोर व्यास को बनाया गया इसके बाद कांग्रेस का कार्यालय कुछ दिन तक डिग्गी हाउस और उसके बाद बिचून बाग में चला गया और वहीं से संचालित होता रहा। अस्सी के दशक में कांग्रेस को बनीपार्क में भवन मिल गया और उसके बाद 1986 तक़ कांग्रेस वहीं से संचालित होती रही।
गहलोत लाए वापस पुराने भवन में
यह संयोग ही है जब कांग्रेस के नए भवन का शिलान्यास तब हो रहा है जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं। जब वे पहली बार सितंबर 1985 में प्रदेशाध्यक्ष बने तो उस वक्त चांदपोल में कांग्रेस अर्स का कार्यालय चल रहा था। इस पार्टी को शैलेन्द्र जोशी संभाल रहे थे। तब तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गहलोत ने उनसे बात की। इसके बाद जोशी भी कांग्रेस में आ गए और गहलोत फिर कांग्रेस को अपने पुराने भवन में लौटा लाए और इसका नाम इंदिरा गांधी भवन भी कर दिया। तब से आज तक ये कार्यालय 21 यहीं से चलता आ रहा है। यह इमारत माणिक्यलाल वर्मा से लेकर बीच में कुछ वर्षों को छोड़कर 25 अध्यक्ष देख चुकी है। अब पार्टी नया भवन बनाने जा रही है।