बारिश के बाद क्षेत्र में जगह-जगह पानी इकट्ठा रहने से मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मौसमी बीमारियों के साथ डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
कानोता क्षेत्र में इस वर्ष हुई भारी बारिश के बाद अब अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं अस्पताल में बेड फुल रहने से एक बेड पर दो-दो मरीजों व अस्पताल की गैलरी में लगी बेंच तक पर मरीजों को लिटाकर उपचार किया जा रहा है। ग्राम नायला स्थित सीएचसी में पिछले कई दिनों से ओपीडी में मरीजों का आकड़ा 500 के पार जा रहा है। सीएचसी प्रभारी बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि अस्पताल में मौसमी बीमारी व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की सीबीसी, मलेरिया आदि की जांच करने के बाद उपचार किया जा रहा है।
बारिश के बाद क्षेत्र में जगह-जगह पानी इकट्ठा रहने से मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मौसमी बीमारियों के साथ डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि नायला सीएचसी में सीबीसी, मलेरिया स्लाइड की जांच निःशुल्क की जा रही है लेकिन डेंगू की जांच सरकारी अस्पताल में नहीं होने से निजी लैब पर 500 से 1200 रुपए देकर जांच करवानी पड़ रही है। जिससे मरीजों की जेब पर आर्थिक भार पड़ रहा है।
नायला सीएचसी में ओपीड़ी में मरीजों की संख्या बढ़ने से साथ-साथ आईपीड़ी में भी मरीजों संख्या बढ़ रही है। जिसके चलते अस्पताल के महिला व पुरुष वार्ड फुल है, ऐसी स्थिति में एक बेड पर दो मरीजों को लिटाकर उपचार करना पड़ रहा है तो कई जगह मरीजों को बेंच पर लिटाकर उपचार कर रहे है।
सरकार द्वारा कस्बा सहित आसपास के गांवों में मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग करवाना चाहिए। इसमें हवा में कीटनाशकों का छिड़काव करवाने से वयस्क मच्छर मर जाते हैं। जिससे मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने और मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
21 सितंबर - 509 मरीज
22 सितंबर - 205 मरीज
23 सितंबर - 507 मरीज
24 सितंबर - 369 मरीज
25 सितंबर - 534 मरीज