
बधाल (जयपुर) . एक तरफ सरकर राजकीय विधालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए साइकिल, लैपटॉप, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं तथा प्रवेशोत्सव जैसे अभियान चलाकर राजकीय विधालय में नामांकन बढ़ाने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी तरफ पर्याप्त भवन व अध्यपकों की कमी के चलते विधालय में नामांकन घटता जा रहा है। शिक्षा के मौलिक अधिकार का कानून लागू होने के बावजूद ग्रामीण आंचल के सरकारी विधालयों में पर्याप्त भवन व अध्यापकों के अभाव है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में राजकीय विधालयों का नामांकन दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। ऐसा ही नजारा रलावता पंचायत मुखालय के राजकीय आदर्श माध्यमिक विधालय में देखने को मिला है। कहने को तो विधालय को आदर्श विधालय का दर्जा दिया गया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। यहां न बैठने के लिए ना पर्याप्त भवन है ना ही पढ़ाने के लिए अध्यापक। जर्जर भवन के कारण विधार्थियों को पेड़ के नीचे या फिर बरामदे में बैठाकर पढ़ाई करना पड़ती है। अध्यापक के अभाव में एक शिक्षक पर दो कक्षाओं का भार है।
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क्रमोन्नति मिली, सुविधाएं नहीं
पूर्व सरपंच गोविन्दराम बोचलिया ने बताया कि इस स्कूल की स्थापना सन् 1955-56 में प्राथमिक शाला के रूप में रूप हुई थी। 1998-99 में यह उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत हुआ। इसके बाद 2009-10 में माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत हुआ। 2015-16 में इसको आदर्श विधालय का दर्जा मिल गया, लेकिन सुविधाओं में कोई विस्तार नहीं हुआ।
भवन को मरम्मत की दरकार
विधालय का भवन पूरी तरफ जर्जर हो चुका है। कक्षा-कक्षों की पट्टिया टूट चुकी है। छत से चूना झड़ता है। दीवारों में दरारे आ गई है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। कई कक्षा-कक्षों में घास-फुस उगी हुई है। जर्जर भवन के कारण यहां कभी की हादसा हो सकता है।
एक भी कक्ष उपयोगी नहीं
पहले विधालय में 10 कक्ष थे। जिसमें से एक में स्टोर रूम और दूसरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय संचालित था। शेष आठ कक्षों में से एक भी उपयोग के लायक नहीं था। 2006 में एक कमरा सर्वशिक्षा अभियान के तहत तथा दूसरा कमरा भामाशाह द्वार बनवाया गया। इससे विधालय में 12 कक्ष हो गए। अब विद्यालय में दो कक्ष उपयोग के लायक है। जिसमें से एक कमरे को कार्यालय के रूप में ले लिया गया। शेष एक कक्ष में कक्षा पांच के विधार्थियों को संयुक्त रूप से बैठाया जाता है।
अध्यपकों के पद रिक्त
आदर्श विधालय होने के बावजूद इसमें प्रधानाध्यापक सहित सामाजिक व संस्कृत के वरिष्ठ अध्यापक तथा अंग्रेजी के द्वितीय श्रेणी के अध्यापक का पद रिक्त चल रहा है। इससे विधार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है। इसके अलवा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी का पद स्वीकृत नहीं होने से विधार्थियों को ही विधालय परिसर की सफाई करनी पड़ती है।
इनका कहना है
जर्जर भवन एवं शिक्षक की कमी सहित अन्य समस्याओं के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को हर माह नियमित रूप सेे अवगत कराया जा रहा है। इसके बाजवूद समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया रहा।
लालचंद यादव, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक, राआमावि, रलावता