जयपुर

शरीर में लंबे समय से सख्त गांठ, दर्द और सूजन तो सचेत हो जाएं

जयपुर। शरीर में कोई भी सूजन या गांठ जो दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हो, इससे असुविधा हो या हड्डियों में दर्द हो रहा हो तो सचेत हो जाएं। लंबे समय से सख्त गांठ के रूप में होती है। ये सर्कोमा (टिश्यू कैंसर) के लक्षण हैं। इसका दर्द रात में बढ़ता है। ये टिश्यू (ऊतकों), नसों, हड्डियों, वसा, रक्त वाहिकाओं, मांसपेशियों में होता है। ये दो प्रकार का होता है। टिश्यू सारकोमा व हड्डी सर्कोमा।
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Aug 03, 2018
sarcoma cancer
sarcoma cancer

किसी भी उम्र में होता
सर्कोमा का दूसरा हड्डियों के बीच में होता है। ये हड्डी या मेटास्टैटिक के भीतर होता है। आमतौर पर तीन प्रकार की हड्डी सर्कोमा होता है। ओस्टियो, इविंग व कोंड्रो सर्कोमा। ये किसी भी उम्र मेंं हो सकता है। इनमें ओस्टियो सर्कोमा सबसे ज्यादा होता है। ये बच्चों में ज्यादा होता है, क्योंकि ये विकसित हो रही हड्डियों में होता है। इविंग सर्कोमा किशोरों में होता है। ये हिप, छाती व लंबी हड्डियों के बीच में होता है। कोंड्रो सर्कोमा 30 से 60 वर्ष के लोगों में होता है। जांघ, ऊपरी बांह, कंधे और पसलियों में होता है।

सॉफ्ट टिश्यूसर्कोमा
सॉफ्ट टिश्यू सर्कोमा (एसटीएस) कैंसर का एक रूप है। ये जोड़ों, रक्त वाहिकाओं, मांसपेशियों में हो सकता है। कंधे, छाती, पेट में 30 प्रतिशत, हाथों में 10 प्रतिशत होता है। सिर और गर्दन में 20 प्रतिशत मरीजों में होता है।

सर्जरी ही उपचार
सर्कोमा मेंं सर्जरी ही उपचार है। पहली, दूसरी व तीसरी स्टेज पर जानकारी मिलती है तो सर्जरी की जाती है। जरूरी है कि सर्जरी के समय मरीज का शुगर, बीपी व थायराइड कंट्रोल में हो। चौथी स्टेज पर थैरेपी ही की जाती है।

कैंसर हेलर थैरेपी कारगर
सर्कोमा में शुरू में दर्द कम होता है। धीरे-धीरे बढ़ता है। गर्दन की हड्डियों में गांठ कैंसर का कारण बन सकती है। सांस लेने में मुश्किल हो सकती है। हड्डी के कैंसर एक्स-रे पर दिखाई देते हैं। हड्डी में छेद दिखाई दे सकता है। एमआरआइ, सीटी स्कैन कर जानकारी की जाती है। बायोप्सी कैंसर की जानकारी देती है। कैंसर हेलर थैरेपी सर्कोमा के इलाज में मदद करता है।

सर्कोमा का तीन स्तर पर करते इलाज
सर्कोमा को पहचाने के लिए बायोप्सी सबसे महत्वपूर्ण जांच है। इसके बाद सिटी स्कैन और एमआरआई जांच की जाती है। सर्कोमा के इलाज तीन स्तर पर किया जाता है। सर्जरी, रेडिएशन एवं कीमोथैरेपी। बोन कैंसर होने के शुरुआती चरण को दो भागों में बांटा जा सकता है। ए में इसकी शुरुआती अवस्था है, जिसमें कैंसर माइनर होता है। उस समय तक ये अन्य हिस्सों तक फैला नहीं होता। कैंसर होने के स्थान पर हल्की सूजन होती है। वहीं दूसरी अवस्था में कैंसर हड्डी की दीवारों तक पहुंच चुका होता है। अभी तक बोन कैंसर के कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कई बार इसे आनुवांशिक कारणों से जोड़कर देखा जाता है।

सुबह की धूप फायदेमंद
रोजाना सुबह धूप में बैठने से विटामिन डी मिलता है। हड्डी के कैंसर से बचाने में मददगार है। यूवी किरणें विटामिन डी से भरपूर होती हैं। जब त्वचा पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो बोन कैंसर से जल्दी ही निजात मिल जाती है।

लिंब सैल्वेज सर्जरी
पहले सर्कोमा के इलाज के दौरान प्रभावित अंग के उस निकालना पड़ता था। समय के साथ तकनीक में परिवर्तन आया। अब डॉक्टर्स लिंब सैल्वेज सर्जरी करते हैं। अब प्रभावित हिस्से को निकालने की जरूरत कम पड़ती है।

Published on:
03 Aug 2018 09:48 pm
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