
खान विभाग ने 2907 करोड़ की पेनल्टी लगाई, वसूली सिर्फ 31.79 फीसदी; खनन माफिया बेखौफ, सरकार मौन
जयपुर.
राजस्थान में अवैध खनन और अवैध खनन सामग्री के परिवहन पर खान विभाग की सख्ती महज फाइलों तक सिमटकर रह गई है। पिछले 15 वर्षों में विभाग ने नियमों के उल्लंघन पर 2,907 करोड़ रुपए का जुर्माना तो लगाया, लेकिन वसूली के नाम पर सिर्फ 924 करोड़ रुपए ही जमा हो सके। यानी कुल जुर्माने का महज 31.79 फीसदी। शेष करीब 1,983 करोड़ रुपए आज भी बकाया हैं।
हालात यह है कि जुर्माना लगाने की औपचारिकता तो पूरी की जा रही है, लेकिन उसकी वसूली के लिए न तो इच्छाशक्ति दिख रही है और न ही ठोस कार्रवाई। नतीजा यह कि खनन माफिया बेखौफ होकर अपनी जेब भर रहा है, जबकि सरकार संभावित राजस्व से हाथ धो रही है। यदि बकाया 1983 करोड़ रुपए की वसूली कर ली जाए, तो इससे प्रदेश में सड़क, पुल, शहरी और ग्रामीण विकास के कई बड़े काम आसानी से किए जा सकते हैं।
दबाव के चलते वसूली प्रक्रिया ठंडे बस्ते में
खान विभाग के भीतर हालात और भी चिंताजनक हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई मामलों में करोड़ों रुपए की पेनल्टी लगने के बाद उच्च दबाव के चलते वसूली की प्रक्रिया को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कहीं नोटिस जारी कर फाइल बंद कर दी गई, तो कहीं सिर्फ बैठकों में मामले को घुमाया जाता रहा। इससे यह संदेश साफ जाता है कि जुर्माना लगाना महज ‘ड्यूटी निभाने’ का जरिया बन गया है, जबकि असली जिम्मेदारी यानी वसूली से विभाग कन्नी काट रहा है।
जवाबदेही तय नहीं
सरकार के स्तर पर भी स्थिति अलग नहीं है। बकाया वसूली को लेकर समय-समय पर समीक्षा बैठकों की बात तो होती है, लेकिन जमीन पर उसका असर नजर नहीं आता। न कोई सख्त टाइमलाइन तय की गई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकी।
31.79 फीसदी ही वसूली
15 साल में लगाए गए कुल जुर्माने के मुकाबले खान विभाग अब तक सिर्फ 31.79 फीसदी राशि ही वसूल पाया है।
कुल जुर्माने और वसूली का हिसाब (1 जनवरी 2011 से 31 मार्च 2025)
जुर्माना: 2,907.18
वसूली: 924.10
बकाया: 1,983.07
(राशि करोड़ रुपए में)
चालू वित्तीय वर्ष की स्थिति (1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025)
जुर्माना लगाया: 627.88
वसूली: 50.94
बकाया: 576.94
(राशि करोड़ रुपए में)
विभाग के एसएमई सर्कल में बकाया...
बीकानेर - 63.89
जयपुर - 599.79
अजमेर - 505.01
जोधपुर - 104.75
कोटा - 187.62
भरतपुर - 382.19
उदयपुर - 40.70
भीलवाड़ा - 56.08
राजसमंद - 43.87
(राशि करोड़ रुपए में)