1.80 लाख रुपए मांगे, ट्रैप होने से पहले ही सावधान हुआ पटवारी आखिर में 90 हजार रुपए में सौदा तय हुआ बीस हजार ले लिए, 70 हजार बाद में लेने वाला था
ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर. नामांतरण खोलने के बदले पटवारी जमीन की कीमत का एक से दो प्रतिशत घूस के रूप में मांग रहे हैं। ऐसा ही एक मामला फागी के माधोराजपुरा में सामने आया है। 90 लाख रुपए में खरीदी जमीन का नामांतरण खोलने के बदले पटवारी ने 1 लाख 80 हजार रुपए मांग लिए। उनसे 90 हजार खुद के लिए तथा 90 सरपंच के नाम पर मांगे। आखिर सौदा 90 हजार रुपए में तय हुआ और बीस हजार रुपए ले भी लिए। हालांकि एसीबी ट्रैप करती उससे पहले पटवारी सतर्क हो गया। अब एसीबी ने उसके खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया है।
यह मामला माधोराजपुरा हल्का पटवारी रोहित पारीक (33) निवासी टूटोली, चाकसू के खिलाफ दर्ज किया गया है। उसने रिश्वत की यह राशि सांगानेर निवासी भंवर लाल सैनी से मांगी थी। सैनी ने माधोराजपुरा में 11 बीघा जमीन करीब 90 लाख रुपए में खरीदी थी। उसका नामांतरण खोलने के बदले पारीक ने दो प्रतिशत के हिसाब से 1.80 लाख रुपए मांगे। एसीबी ने रिश्वत मांगने का सत्यापन 22 फरवरी को किया। इसके बाद 23 फरवरी को ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की गई, लेकिन रिश्वत लेने आए पटवारी को भनक लग गई और वहां से भाग गया।
रिश्वत लेकर रसगुल्ले की दुकान पर बुलाया
परिवादी ने 23 फरवरी को आरोपी को कॉल किया तो उसे कहा कि रुपए किसी के पास रख जाओ, मैं उससे बाद में ले लूंगा। परिवादी कहता है कि मैं डिग्गी रोड मुहाना मोड़ पर आ गया। कुछ देर में पटवारी वहां पहुंचता है। उसने परिवादी से कहा कि रसगुल्ले की दुकान पर आ जाओ। परिवादी दुकान पर पहुंचा। पटवारी नजदीक आता है, लेकिन वहां रुका नहीं। उसने कार की रफ्तार बढ़ाई और फागी की ओर बढ़ गया। बाद में कॉल कर कहा कि परिचित का एक्सीडेन्ट हो गया है। जब ट्रैप सफल नहीं हुआ तो एसीबी ने रिश्वत की मांग का मामला दर्ज किया है।
एसीबी ने किया ट्रैप के लिए इंतजार
जब फरवरी में ट्रैप फेल हो गया तो एसीबी ने कुछ दिनों तक इंतजार किया कि परिवादी के पास घूस के लिए फोन आए तो उसे ट्रैप किया जा सके। लेकिन जब पटवारी को एसीबी की कार्रवाई की भनक लगी तो उसने नामांतरण खोल दिया। इसके बाद जब मामला खत्म हो गया तो एसीबी की ओर से मामला दर्ज किया गया।
सत्यापन के दौरान पटवारी बोला: 90 म्हारा और 90 सरपंच का
पटवारी: बता दिया न, एक परसेंट कांई ज्यादा बताया…एक परसेन्ट का नब्बे हजार होव है। बाकी नब्बे हजार सरपंच का।
परिवादी: हूं…
पटवारी: थे कांई देवाला.. थे मन डेढ़ परसेन्ट दे दिज्यो।
परिवादी: नहीं एक परसेंट।
पटवारी: डेढ़..डेढ़…।
परिवादी: अरे डेढ़ तो ज्यादा छ..एक परसेन्ट ले ल्यो।
पटवारी: थांकी सोगन्ध ज्यादा कोनी।
परिवादी: बीस हजार रुपिया तो अबार दे जाउं छू..पेल्यां काम तो करो। बाकी सत्तर हजार रुपिया तो थे खैवला जी आदमी ने दे दूलां। ….ये बीस हजार तो पकड़ो।
पटवारी: हूं….। अस्सी कर दिज्यो टोटल।
परिवादी: सुणो लाख रुपिया होग्या फेर तो।…. नब्बे दे दूलां थानै बोल दिया न।
पटवारी: रुपिया पैली देणा पड़ेगा, कोपी मिल जायेली थानै। टोटल एक लाख।