विकास की उड़ान : दिल्ली में आईजीआई एयरपोर्ट पर बन रहा है देश का पहला एलिवेटेड क्रॉस टैक्सीवे। 60 फीसदी काम पूरा, सितंबर तक तैयार होने के आसार।
नई दिल्ली. दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर कुछ महीने बाद फ्लाईओवर पर विमान खड़े नजर आएंगे और इनके नीचे फोर व्हीलर गाडि़यां दौड़ती दिखाई देंगी। यह संभव होगा एलिवेटेड क्रॉस टैक्सीवे से। देश में अपने किस्म के इस पहले टैक्सीवे को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) तैयार कर रहे हैं। इसका 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके सितंबर तक तैयार हो जाने की उम्मीद है।
फिलहाल एक फ्लाइट को रनवे पर लैंड करने और टेक ऑफ करने में कम से कम नौ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। एलिवेटेड टैक्सीवे बन जाने से यह दूरी कम हो जाएगी। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ ईंधन की भी बचत होगी। एविएशन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस टैक्सीवे से हर उड़ान के दौरान कम से कम 350 किलोग्राम ईंधन बचाया जा सकेगा। टैक्सीवे के दोनों तरफ एलिवेटेड संतरी पोस्ट बनाई जाएंगी, ताकि जम्बो जेट साइज के दो एयरक्राफ्ट यहां ठहर सकें। अगर टैक्सीवे पर कोई विमान खराब होगा तो इन संतरी पोस्ट्स पर मौजूद फायर टेंडर्स या टॉउ टेंडर्स मदद करेंगे।
किस जगह क्या-क्या बनाया जाएगा
* 1.8 किलोमीटर लंबा और 203 मीटर चौड़ा होगा टैक्सीवे।
* मेन टर्मिनल टी-3 की रोड अपने लेवल पर ही रहेगी। टैक्सीवे इससे 8 मीटर ऊपर एलिवेटेड ब्रिज पर बनेगा।
* टी-3 और महिपालपुर के बीच मेन रोड पर 148 मीटर का ब्रिज सेक्शन।
* टी-3 की बाउंड्री के बगल वाली रोड पर 43.8 मीटर का ब्रिज भी बनेगा।
दुनिया के 10 टैक्सीवे की स्टडी
दिल्ली में यह एलिवेटेड टैक्सीवे बनाने के लिए दुनिया के करीब 10 टैक्सीवे की स्टडी की गई। दुनिया में ऐसे करीब 13 टैक्सीवे हैं। इनमें सिंगापुर का चांगी एयरपोर्ट और जर्मनी का फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट शामिल है। फ्रांस, जापान और हांगकांग में भी ऐसे टैक्सीवे हैं।