उत्तर पश्चिम रेलवे की रेलपटरी पर अब कोई रेलगाड़ी आमने सामने या फिर पीछे से नहीं टकराएगी। उत्तर पश्चिम रेलवे 436.22 करोड़ की लागत से 1586 किलोमीटर रेल लाइनों कवच प्रणाली लगा रहा है। यह उपग्रह के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसे लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त हो गई है। इससे रेल के सुरक्षित और संरक्षित संचालन में वृद्धि होगी और सही सिग्नल मिलने से रेलगाड़ी की औसत गति में भी वृद्धि होगी।
जयपुर
उत्तर पश्चिम रेलवे की रेलपटरी पर अब कोई रेलगाड़ी आमने सामने या फिर पीछे से नहीं टकराएगी। उत्तर पश्चिम रेलवे 436.22 करोड़ की लागत से 1586 किलोमीटर रेल लाइनों कवच प्रणाली लगा रहा है। यह उपग्रह के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसे लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त हो गई है। इससे रेल के सुरक्षित और संरक्षित संचालन में वृद्धि होगी और सही सिग्नल मिलने से रेलगाड़ी की औसत गति में भी वृद्धि होगी।
यहां लगेगी प्रणाली
1 रेवाड़ी-पालनपुर वाया जयपुर
2 जयपुर-सवाई माधोपुर
3 उदयपुर-चित्तौड़गढ़
4 फुलेरा-जोधपुर-मारवाड़
5 लूनी-भीलड़ी
ऐसे काम करेगा कवच
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि यह प्रणाली उपग्रह द्वारा रेडियो संचार माध्यम से इंजन और स्टेशनों पर आपस में संबंध स्थापित करती है। इससे रेल चालक को आने वाले सिग्नलों, उससे दूरी और रेलपटरी पर किसी प्रकार की बाधा का पता चलता है। उसी रेलपटरी पर गाड़ी खडी या फिर आने पर यह प्रणाली पहचान कर एक निश्चित अवधि में स्वतः ही गाड़ी ब्रेक लगा देती है। इससे दुर्घटना रूक जाती है। इसे स्वदेशी प्रणाली को TCAS (Train collision Avoidance system) कहा जाता है।