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Maharana Pratap Jayanti : आज भी रौंगटे खड़े कर देते हैं ‘प्रताप’ की वीरता के ये 10 ‘अनसुने’ सच, क्या आप जानते हैं? 

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर जानें उनके जीवन के वे 10 रोमांचक और अनकहे किस्से, जिन्होंने उन्हें दुनिया का सबसे महान योद्धा बनाया। अकबर की नींद उड़ाने वाले 208 किलो के वजन से लेकर 'दो टुकड़ों' में दुश्मन को काटने तक, प्रताप का इतिहास आज भी गर्व से भर देता है।

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Maharana Pratap - AI Image

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राजस्थान की शौर्य गाथा जब भी लिखी जाएगी, उसमें सबसे स्वर्णिम अध्याय महाराणा प्रताप का होगा। आज प्रताप जयंती के अवसर पर पूरा देश उस महामानव को नमन कर रहा है, जिसने घास की रोटी खाना तो स्वीकार किया लेकिन चित्तौड़ के स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ ऐसे भी सच हैं जो आज भी लोगों को हैरान करते हैं। 

1. 208 किलो का 'अविश्वसनीय' भार

इतिहासकारों और मेवाड़ के संग्रहालयों के अनुसार, महाराणा प्रताप की शारीरिक शक्ति किसी चमत्कार से कम नहीं थी। प्रताप का भाला अकेले 81 किलो का था, जबकि उनके छाती का कवच 72 किलो का था।

उनके दो तलवारों, कवच, भाले और ढाल का कुल वजन लगभग 208 किलो होता था। सोचिए, आज के समय में इस वजन को उठाना भी मुश्किल है, जबकि प्रताप इसे पहनकर रणभूमि में बिजली की गति से दौड़ते थे।

2. बहलोल खान के दो टुकड़े

हल्दीघाटी के युद्ध में एक ऐसी घटना हुई जिसने मुगलों के मन में प्रताप का खौफ बैठा दिया। अकबर के सेनापति बहलोल खान ने जब प्रताप पर हमला किया, तो प्रताप ने अपनी तलवार के एक ही प्रहार से बहलोल खान को उसके घोड़े सहित दो हिस्सों में काट दिया था। यह घटना प्रताप के अतुलनीय बाहुबल का प्रमाण है।

3. 'भील' जनजाति के लाडले 'कीका'

प्रताप ने अपना अधिकांश समय अरावली की पहाड़ियों में बिताया। वहाँ के आदिवासी भील उन्हें अपने पुत्र के समान मानते थे। भील समुदाय में प्रताप को प्यार से 'कीका' पुकारा जाता था। भीलों की छापामार युद्ध नीति ही प्रताप की सबसे बड़ी ताकत बनी।

4. हवा से बातें करता था चेतक घोड़ा

प्रताप का घोड़ा 'चेतक' दुनिया के सबसे वफादार जानवरों में गिना जाता है। हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अपना एक पैर कटने के बावजूद प्रताप को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के लिए 26 फीट गहरे नाले को एक छलांग में पार कर लिया था।

5. जब 'दुश्मन' अकबर भी रो पड़ा था

इतिहासकारों के अनुसार, जब महाराणा प्रताप के निधन की खबर अकबर तक पहुँची, तो वह खुश होने के बजाय फूट-फूट कर रोने लगा था। अकबर ने कहा था कि दुनिया में प्रताप जैसा स्वाभिमानी योद्धा कोई दूसरा नहीं हुआ जिसने कभी अपना सिर नहीं झुकाया।

6. घास की रोटी और अरावली का संघर्ष

प्रताप ने महलों के सुख त्याग दिए थे। वे अपने परिवार के साथ जंगलों में सोए और घास की रोटी खाई। एक बार जब एक जंगली बिल्ली ने उनके बच्चे के हाथ से वह घास की रोटी भी छीन ली, तब प्रताप विचलित हुए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

7. छापामार युद्ध के जनक

आज दुनिया के कई देश जिस छापामार युद्ध नीति को अपनाते हैं, उसका सफल प्रयोग प्रताप ने मुगलों के खिलाफ किया था। कम संसाधनों में बड़ी सेना को कैसे हराया जाता है, यह प्रताप ने साबित किया।

8. दो तलवारें रखने का गुप्त रहस्य

महाराणा प्रताप हमेशा अपने साथ दो तलवारें रखते थे। इसका कारण बेहद नेक था- वे कभी भी निहत्थे दुश्मन पर वार नहीं करते थे। अगर दुश्मन के पास तलवार नहीं होती, तो वे उसे अपनी एक तलवार दान दे देते थे ताकि युद्ध बराबर का हो।

9. प्रतिज्ञा: "जब तक चित्तौड़ नहीं जीतूँगा..."

प्रताप ने प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक वे चित्तौड़ को आजाद नहीं करा लेंगे, वे सोने-चांदी के बर्तनों में खाना नहीं खाएंगे और बिस्तर पर नहीं सोएंगे। उन्होंने जीवन भर इस प्रतिज्ञा का पालन किया।

10. अजेय योद्धा: कभी पकड़े नहीं गए

मुगल साम्राज्य की तमाम कोशिशों के बावजूद, प्रताप को कभी भी बंदी नहीं बनाया जा सका। अकबर का उन्हें अपने अधीन करने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ।