
Ips Jagmohan Meena: ओडिशा कैडर के 2013 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी जगमोहन मीणा के इस्तीफे का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। जगमोहन मीणा ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जगमोहन मीणा का त्यागपत्र प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है, लेकिन सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। अखिल भारतीय सेवा नियमों के अनुसार किसी आईपीएस अधिकारी का त्यागपत्र केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद ही प्रभावी होता है। ऐसे में जगमोहन मीणा औपचारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार किए जाने तक सेवा में बने रहेंगे।
अपने पद से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत में जगमोहन मीणा ने इस फैसले को अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया व्यक्तिगत निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि इस मामले में मेरी निजता का सम्मान करें। जगमोहन मीणा ने इस्तीफे के पीछे संभावित बाहरी दबाव को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी तरह का दबाव या बाहरी कारण शामिल नहीं है। यह निर्णय पूरी तरह से व्यक्तिगत है। जगमोहन मीणा ने ओडिशा के लोगों का आभार जताया है और पूरे करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के लिए राज्य सरकार को धन्यवाद दिया।
1989 में जन्मे जगमोहन मीणा ओडिशा कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जो वर्तमान में भुवनेश्वर में पुलिस उपायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। मूल रूप से राजस्थान निवासी जगमोहन मीणा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के पूर्व छात्र हैं। जगमोहन मीणा ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर, 2013 को कार्यभार संभाला, उन्हें पहली पोस्टिंग कालाहांडी जिले में उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में मिली थी। जगमोहन मीणा 2019 में ओडिशा के माओवादी प्रभावित जिलों में एक मालकानगिरि पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य करते हुए सफल माओवादी विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर चर्चा में आए।
इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में कार्य किया, जिनमें मल्कानगिरी, अंगुल, गंजम शामिल हैं। बाद में उन्हें कटक में पुलिस उपायुक्त के रूप में तैनात किया गया। मार्च 2025 में मीणा ने भुवनेश्वर के डीसीपी के रूप में कार्यभार संभाला। अपने पूरे करियर के दौरान जगमोहन मीणा ने कानून-व्यवस्था प्रबंधन, आपराधिक जांच और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
अपनी 13 साल की नौकरी में उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए कई पुलिस पदक भी मिले। इनमें पुलिस वीरता पदक (2019) पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक (2021) राज्यपाल पदक (2023) शामिल हैं। हालांकि जगमोहन मीणा ने आधिकारिक तौर पर अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र में जा सकते हैं। उनके राजनीति में जाने की भी चर्चा है।
जगमोहन मीणा मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले की रैणी तहसील के प्रागपुरा गांव के रहने वाले हैं। जगमोहन मीणा के पिता नंदलाल मीणा ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि बेटे जगमोहन को लेकर आप सबके बहुत फोन आ रहे हैं। इस समय मैं इतना ही कहूंगा कि यह निर्णय हमारे लिए मुश्किल है, लेकिन उस पर कोई राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं हो सकता। नंदलाल मीणा ने कहा कि अभी सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया है।
नंदलाल मीणा ने कहा कि उनके बेटे जगमोहन ने आईपीएस अधिकारी रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। सेवा के दौरान दिन-रात काम किया और अपनी सेहत की भी परवाह नहीं की। जगमोहन का पूरा ध्यान हमेशा काम पर रहा और देश सेवा को ही सबसे बड़ा उद्देश्य माना। हमने भी कभी उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया। हमारी हमेशा यही सीख रही कि वे ईमानदारी से अपना काम करे।
त्यागपत्र को लेकर उठ रही अटकलों पर नंदलाल मीणा ने कहा कि इसके पीछे कोई और वजह नहीं है। हमें हमेशा उसकी सेहत की चिंता रही है। हम चाहते हैं कि वह काम जरूर करे, लेकिन अपने स्वास्थ्य और परिवार के लिए भी समय निकाले। पद और प्रतिष्ठा अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जिंदगी और परिवार उससे भी अधिक अहम हैं। इसलिए लोग बेवजह किसी तरह के कयास न लगाएं। जैसा कि जगमोहन ने स्वयं कहा है कि सभी को उनकी निजता का सम्मान करना चाहिए।
यह वीडियो भी देखें