Jaiban Cannon in Jaipur: जयपुर। राजधानी में एक ऐसी अद्भुत तोप भी मौजूद है जिससे यदि एक गोला दागा जाए तो वह पाकिस्तान के लाहौर शहर में तबाही मचा सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं जयपुर के जयगढ़ किले में रखी जयबाण तोप की। इस तोप की मारक क्षमता 22 मील यानी 35 किमी से ज्यादा है।
Jaiban Cannon in Jaipur: जयपुर। राजधानी में एक ऐसी अद्भुत तोप भी मौजूद है जिससे यदि एक गोला दागा जाए तो वह पाकिस्तान के लाहौर शहर में तबाही मचा सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं जयपुर के जयगढ़ किले में रखी जयबाण तोप की। इस तोप की मारक क्षमता 22 मील यानी 35 किमी से ज्यादा है। यदि इस तोप को वाघा बॉर्डर से तैनात कर गोला दागा जाए तो यकीनन लाहौर शहर नक्शे से गायब होने में देर नहीं लगेगी। बता दें, वाघा बॉर्डर से लाहौर की दूरी 24 किलोमीटर है।
जयपुर की जयबाण तोप जयगढ़ किले में स्थित है, जिसे 18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी पहियों वाली तोपों में से एक है, जिसका निर्माण 1720 के आसपास हुआ था, और इसे केवल एक बार परीक्षण के लिए दागा गया था, जिसका गोला 35 किमी दूर चाकसू में गिरा और वहां एक बड़ा तालाब बन गया जो आज भी मौजूद है। यह तोप उस जमाने के भारतीय इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है और आज भी पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र है।
भीमकाय जयबाण तोप का निर्माण 18वीं सदी (लगभग 1720 ई.) में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान जयगढ़ किले के भीतर ही एक ढलाईशाला (foundry) में किया गया था। 'जयबाण' का अर्थ 'विजय का अस्त्र' है और इसे मुगल सेनाओं और अन्य शत्रुओं से किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।
जयबाण तोपर दुनिया की सबसे बड़ी पहियों वाली तोपों में से एक है, जिसका वजन लगभग 50 टन और बैरल की लंबाई 20.2 फीट है, और इसे चलाने के लिए तोप में एक बार में 100 किलोग्राम बारूद भरा जाता था।
जयबाण तोप कभी युद्ध में इस्तेमाल नहीं हुई। हालांकि इसका परीक्षण सिर्फ एक बार किया गया था। इस परीक्षण के दौरान दागा गया गोला लगभग 35 किलोमीटर दूर चाकसू कस्बे के पास पर गिरा और वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया, जो बारिश में तालाब बन गया।
जयबाण तोप तत्कालीन भारतीय धातुकर्म और इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आज भी जयगढ़ किले में सुरक्षित है और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यह तोप राजपूतों की सैन्य शक्ति और तकनीकी विशेषज्ञता का प्रतीक है और भारत की ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।