जयपुर

जयपुर के आमेर से धरोहर प्रेमियों के लिए रोचक खबर, अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में करीब 1000 साल पुराना शैलचित्र मिला

Jaipur News : जयपुर के आमेर से धरोहर प्रेमियों के लिए रोचक खबर आई है। जयपुर के प्राचीन अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में करीब 1000 साल पुराना शैलचित्र (चट्टान पर नक्काशी) मिला है

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अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में मिला राम-रावण युद्ध का शैलचित्र। फोटो पत्रिका

Jaipur News : इतिहास और संस्कृति की गोद में सिमटे आमेर से धरोहर प्रेमियों के लिए रोचक खबर आई है। यहां के प्राचीन अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में करीब 1000 साल पुराना शैलचित्र (चट्टान पर नक्काशी) मिला है, जो रामायण से संबंधित है। इसमें भगवान राम और रावण के महायुद्ध के सजीव दृश्य उकेरे गए हैं। इसी मंदिर में करीब 1400 साल पुराना एक और शैलचित्र मिला है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण कालियानाग का दमन कर रहे है। यह खोज राजस्थान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर व पुरातत्वविद डॉ. आमेर तमेघ पंवार और उनकी शोध छात्रा कनिष्का सोलंकी ने की है। डॉ. पंवार के अनुसार, मंदिर परिसर के बाई ओर स्थित एक मंदिर के सभामंडप पर यह अद्भुत नक्काशी मिली है।

9वीं-10वीं शताब्दी के इस पाषाण पर राम-लक्ष्मण और रावण को एक-दूसरे पर धनुष ताने दिखाया गया है। इसमें रावण अपने पूरे दस सिरों और भगवान शिव से मिले प्रसिद्ध चन्द्रहास खड्ग (तलवार) के साथ आक्रामक मुद्रा में है।

1400 साल पुरानी कृष्णलीला भी

पुरातत्वविदों को इसी मंदिर में 1400 साल पुराना कृष्णलीला से जुड़ा एक और शैलचित्र मिला है, जिसमें श्रीकृष्ण कालियानाग का दमन कर रहे हैं। इसके अलावा, मंदिर के ललाटबिम्ब पर देवी अम्बिका और गर्भगृह में लगभग छठवीं शताब्दी की भगवान विष्णु की त्रिविक्रम प्रतिमा भी मौजूद हैं, जो इसके इतिहास को और प्राचीन बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जयपुर के आमेर के कण-कण में श्रीराम से जुड़े प्रतीक हैं।

विलायती बबूल हटाने के लिए चलेगा अभियान

एक अन्य खबर के अनुसार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने विलायती बबूल (जूलिफ्लोरा) के उन्मूलन की तैयारी तेज कर दी है। इस संबंध में शनिवार को सचिवालय में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वन मंत्री संजय शर्मा और राज्य मंत्री ओटाराम देवासी भी मौजूद रहे।

दिलावर ने निर्देश दिए कि विलायती बबूल के संपूर्ण उन्मूलन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर विभागों के समन्वय से प्रभावी अभियान चलाया जाए। साथ ही इसकी लकड़ी से कोयला बनाने और नीलामी की योजना तैयार करने को भी कहा गया।

उन्होंने कहा कि बाहरी प्रजातियों के कारण स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो रही है, इसलिए इनके उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान जरूरी है। बैठक में हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरिजीत बनर्जी, पंचायती राज विभाग के सचिव एवं आयुक्त जोगाराम सहित राजस्व, ग्रामीण विकास और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की रणनीति और तकनीकी पहलुओं पर सुझाव दिए।

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Published on:
24 May 2026 07:53 am
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