जयपुर

Jaipur Bomb Blast 17th Anniversary : 2008 से 2024 आ गया, लेकिन 71 मौतों का गुनहगार कौन?

Jaipur Bomb Blast 17th Anniversary : सिलसिलेवार बम धमाकों के गुनाह के लिए जिम्मेदार मान निचली कोर्ट ने जिन चार लोगों को सजा सुनाई, हाईकोर्ट ने पिछले साल उनको बरी कर दिया और मामला एक साल से देश की शीर्षस्थ अदालत में लंबित है।
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May 13, 2024
Jaipur Bomb Blast 17th Anniversary

17th Anniversary of Jaipur Bomb Blast Case : जयपुर। सिलसिलेवार बम धमाकों के कारण 13 मई 2008 की वह रात शायद ही जयपुर का कोई व्यक्ति भूल पाया होगा, जिसने 71 लोगों को अपनों से हमेशा के लिए छीन लिया और 181 लोगों को जख्मी कर दिया। उन धमाकों के जख्म आज 2024 में भी भरे नहीं हैं। वजह, आज भी इस बात पर असमंजस है कि आखिर उन 71 मौतों का गुनहगार कौन है?

सिलसिलेवार बम धमाकों के गुनाह के लिए जिम्मेदार मान निचली कोर्ट ने जिन चार लोगों को सजा सुनाई, हाईकोर्ट ने पिछले साल उनको बरी कर दिया और मामला एक साल से देश की शीर्षस्थ अदालत में लंबित है। इस बीच जिनको पकड़ा गया था, वे बाहर आ चुके और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में हर रोज एसओजी के पास हाजिरी दे रहे हैं। केवल वह ही बाहर नहीं आ पाया, जिसे कोर्ट ने नाबालिग मान लिया था। वह सूरत व अहमदाबाद में चल रहे 38 मुकदमों में भी आरोपी होने के कारण रिहा नहीं हुआ।

दस्तावेज काफी ज्यादा है, अनुवाद में समय लगेगा

सुप्रीम कोर्ट ने बम धमाकों से संबंधित मामले में हाईकोर्ट से रिकॉर्ड मंगवाया है, लेकिन मार्च में हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा कि रिकॉर्ड काफी ज्यादा है और हिंदी में है, इस कारण अनुवाद में समय लगेगा। जयपुर बम धमाकों के मामले में त्वरित सुनवाई के लिए बनाया गया विशेष न्यायालय सप्ताह में दो दिन सोमवार और मंगलवार को ही इस मामले की सुनवाई करता है, शेष दिन इस न्यायालय में दूसरे मामलों पर सुनवाई होती है। इसकी वजह से जिंदा बम मामले में अब तक 130 में से करीब 100 लोगों की गवाही पूरी हो पाई है। कमोबेश यही हाल उस किशोर न्यायालय का है, जहां सप्ताह में चार दिन इस मामले पर सुनवाई होती है।

ऐसे चला घटनाक्रम

13 मई 2008- 8 बम फटे, 71 लोगों की मौत, 181 घायल
दिसम्बर 2019- विशेष न्यायालय से मौहम्मद सैफ, सैफुर व मोहम्मद सरवर आजमी तथा एक नाबालिग को सजा। शाहबाज हुसैन बरी।
29 मार्च 2023- हाईकोर्ट ने जांच में खामियां गिनाते हुए सभी को दोषमुक्त कर दिया।
12 मई 23- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट आदेश पर रोक से इनकार कर दिया और इस मामले में आरोपी बताए गए सभी लोगों को एसओजी थाने में रोजाना हाजिरी देने का आदेश दिया।

ना जाने गुनहगारों को कब मिलेगी सजा?

पीड़ित अभिनव तिवाड़ी का कहना है कि मैं उस समय में 13 साल का था। मेरे पिताजी मुकेश तिवाड़ी उस रात चांदपोल स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन करने गए और सदैव के लिए हमसे दूर चले गए। हम तो पीड़ित है, पिताजी को खो दिया। हम तो बैठे-बैठे देख ही सकते हैं, कर क्या सकते हैं? न जाने गुनहगारों को कब सजा मिलेगी?

Updated on:
13 May 2024 07:43 am
Published on:
13 May 2024 07:43 am