राजस्थान हाईकोर्ट, आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज और महात्मा गांधी अस्पताल को बम धमकी भरे ई-मेल से हड़कंप मच गया। सर्च ऑपरेशन के कारण हाईकोर्ट की सुनवाई डेढ़ घंटे देरी से शुरू हुई, अस्पतालों में मरीजों को बाहर निकाला गया।
जयपुर: राजधानी में गुरुवार को एक बार फिर बम की धमकियों ने न्यायिक और चिकित्सा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। राजस्थान हाईकोर्ट, आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज और महात्मा गांधी अस्पताल को एक ही दिन धमकी भरे ई-मेल मिलने से हड़कंप मच गया।
बता दें कि सुरक्षा एजेंसियों के सर्च ऑपरेशन के चलते हाईकोर्ट की सुनवाई प्रभावित हुई। वहीं, अस्पतालों में भर्ती मरीज और उनके परिजन भय के साए में बाहर निकलने को मजबूर हो गए।
हाईकोर्ट को गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे धमकी भरा मेल मिला, जिसमें परिसर में बम होने की चेतावनी दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस, डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता और एटीएस की टीमें मौके पर पहुंचीं।
सघन तलाशी अभियान के कारण हाईकोर्ट की नियमित सुनवाई करीब डेढ़ घंटे देरी से शुरू हो सकी। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट को तीन दिन में दूसरी बार और पिछले चार महीनों में नौवीं बार ऐसी धमकी मिल चुकी है।
इधर, आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज को मिले धमकी भरे मेल के बाद पूरे परिसर को एहतियातन खाली करवाया गया। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस टीमों ने मौके पर पहुंचकर कैंपस में सर्च ऑपरेशन चलाया। सबसे ज्यादा दहशत महात्मा गांधी अस्पताल में रही, जहां ई-मेल में साइनाइड पॉइजन वाले बम रखे होने और दोपहर 12:15 बजे विस्फोट करने की धमकी दी गई थी।
सूचना मिलते ही मरीजों को वार्ड से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया, जिससे गंभीर रोगियों और उनके परिजन में घबराहट फैल गई। करीब साढ़े तीन घंटे के सर्च अभियान के बाद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। लेकिन इस दौरान ओपीडी और अन्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं।
पुलिस साइबर सेल ई-मेल के स्रोत की जांच में जुटी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी फर्जी धमकियां न केवल सुरक्षा एजेंसियों के संसाधन व्यर्थ करती हैं, बल्कि मरीजों और आम नागरिकों की मानसिक सुरक्षा को भी गहरा आघात पहुंचाती हैं।
अस्पताल में इलाज के लिए आईं शारदा देवी ने बताया कि वह बेटी के कान की परेशानी दिखाने आई थीं, लेकिन बम की सूचना के कारण सर्च अभियान चलता रहा। जब दो बजे स्थिति सामान्य हुई और वे डॉक्टर के पास पहुंचीं तो स्टॉफ ने कहा कि डॉक्टर चले गए हैं, अब कल आना। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।