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विकास या जोखिम: 10 हजार करोड़ के काम ठेकेदार भरोसे

प्रदेश की राजधानी सहित अन्य बड़े शहरों में 10 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य एक साथ चल रहे हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए मात्र 130 कनिष्ठ अभियंता (सिविल) कार्यरत हैं। यानी करोड़ों की परियोजनाएं गिने-चुने इंजीनियर हैं और ठेकेदारों के भरोसे विकास की गाड़ी दौड़ रही है।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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अश्विनी भदौरिया

Feb 20, 2026

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फाइल फोटो- पत्रिका

जयपुर। प्रदेश की राजधानी सहित अन्य बड़े शहरों में 10 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य एक साथ चल रहे हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए मात्र 130 कनिष्ठ अभियंता (सिविल) कार्यरत हैं। यानी करोड़ों की परियोजनाएं गिने-चुने इंजीनियर हैं और ठेकेदारों के भरोसे विकास की गाड़ी दौड़ रही है।

राजधानी जयपुर में ही 2000 करोड़ रुपए के काम चल रहे हैं। इनमें से 800 करोड़ की सेक्टर सड़कें निर्माणाधीन हैं। सवाल सीधा है…जब निगरानी कमजोर होगी तो गुणवत्ता कौन सुनिश्चित करेगा? क्या बिना पर्याप्त तकनीकी सुपरविजन के ये प्रोजेक्ट समय पर और टिकाऊ बन पाएंगे, या फिर आम आदमी को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी?
दरअसल, कनिष्ठ अभियंता पर निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण करवाने की जिम्मेदारी होती है। इनकी संख्या पर्याप्त न होने से न सिर्फ कार्यों की गुणवत्ता में कमी आ रही है, बल्कि काम भी धीमी गति से हो रहे हैं।

आगे और प्रोजेक्ट्स आएंगे धरातल पर

राज्य सरकार ने आगामी बजट में जयपुर सहित राज्य के अन्य शहरों के लिए करोड़ों रुपए की विकास घोषणाएं की हैं। इनमें एलिवेटेड रोड, फ्लाइओवर, अंडरपास, ड्रेनेज और सीवरेज जैसी आधारभूत परियोजनाएं भी शामिल हैं। लेकिन, इन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जिस तकनीकी अमले की जरूरत है। वहीं, सबसे ज्यादा कम है।


16 साल से भर्ती का इंतजार
नगरीय विकास विभाग में कनिष्ठ अभियंता की अंतिम भर्ती वर्ष 2010 में हुई थी। यानी करीब 16 वर्षों से नियमित भर्ती नहीं की गई। इंजीनियरिंग की डिग्री लिए सैकड़ों बेरोजगार भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।


खास-खास
-17 सितम्बर, 2025 की नगरीय विकास विभाग का हो चुका है काडर स्ट्रैंथ
-801 पद हैं स्वीकृत, काम कर रहे महज 130 कनिष्ठ अभियंता
-537 पद स्वीकृत हैं जेडीए में, काम कर रहे महज 60 कनिष्ठ अभियंता
-सात प्राधिकरण और 12 यूआईटी हैं राज्य भर में

जेडीए का सबसे बुरा हाल
-प्रदेश के सबसे बड़े जयपुर विकास प्राधिकरण का सबसे बुरा हाल है। यहां न सिर्फ कनिष्ठ अभियंताओं की कमी है, बल्कि 18 अधिशाषी अभियंता और 56 सहायक अभियंता भी कम हैं।

ये हो चुका, लेकिन भर्ती अब भी अटकी

-नगरीय विकास विभाग के कनिष्ठ अभियंता भर्ती प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने काडर पुनर्गठन के बाद भर्ती के निर्देश दिए थे।
-काडर पुनर्गठन को छह माह बीत चुके हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
-जेडीए सहित अन्य विकास प्राधिकरणों और न्यासों ने यूडीएच को जेईएन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखे।
-जेडीए का दायरा दोगुना किया जा चुका, दो नई यूआईटी और चार नए प्राधिकरण बनाए गए।

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