जयपुर

Father’s Day today : जयपुर के बच्चों की जुबानी, पढ़ें पिताओं के प्रेम-समर्पण-संघर्ष की अनकही कहानी

Father's Day today: : आज फादर्स डे है। जयपुर के कुछ बच्चों ने अपनी सफलता के लिए अपने पिताओं को याद किया। साथ इस सफलता में पिता का किस तरह योगदान था, इस बारे में बताया।

4 min read
Jaipur children fathers Day love dedication struggle untold stories Read
Father's Day today : फोटो - AI

Father's Day today: फादर्स डे पर जब बच्चे अपने पिता को धन्यवाद कहते हैं, तब अक्सर उनकी सफलता के पीछे छिपे उन संघर्षों और त्यागों की चर्चा नहीं होती, जो पिताओं ने चुपचाप किए है। कई बार बच्चों को वर्षों बाद पता चलता है कि उनकी पढ़ाई, कॅरियर और सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने अपने सपनों की बलि चढ़ा दी थी। किसी ने उच्च शिक्षा का अवसर छोड़ दिया, किसी ने जमीन बेच दी, तो किसी ने अपनी इच्छाओं को परिवार की जिम्मेदारियों के लिए छोड़ दिया। पिता शायद कम बोलते हैं, लेकिन उनके फैसले से बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं। फादर्स डे पर हमने ऐसे ही कुछ युवाओं से बातचीत की, जिन्होंने अपने पिता के त्याग और अधूरे सपनों की कहानी साझा की। ये कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस प्रेम और समर्पण की हैं, जो एक पिता अपने बच्चों के लिए बिना किसी अपेक्षा के निभाता है।

पढ़ाई के लिए त्याग

Father's Day today : सौरभ पारीक और उनके पिता ओमप्रकाश पारीक। फोटो पत्रिका

जयपुर में सौरभ पारीक को लंबे समय तक यह नहीं पता था कि उनकी उच्च शिक्षा के लिए उनके पिता ओमप्रकाश पारीक ने अपनी जमीन तक बेच दी थी। यह बात उन्हें तब पता चली, जब वे नौकरी करने लगे। सौरभ ने कहा उस पल में पूरी तरह स्तब्ध रह गया था। ऐसा लगा जैसे समय थम गया हो। मुझे अंदाजा नहीं था कि मेरी पढ़ाई के लिए पापा इतना त्याग कर चुके हैं। पिता ने कभी इस बात का एहसान नहीं जताया।

पांच पीढ़ियां एक साथ…

Father's Day today : हर्षित और उनके परिवार के सदस्य। फोटो पत्रिका

हर्षित ने बताया कि एक ही घर में जब पांच पीढ़ियां साथ रहती हैं, तो पिता होने के मायने भी समय के साथ बदलते नजर आते हैं। सबसे बुजुर्ग पीढ़ी ने परिवार को परंपराएं और संस्कार दिए, अगली पीढ़ी ने संघर्ष और जिम्मेदारियों का उदाहरण पेश किया। तीसरी पीढ़ी ने बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को प्राथमिकता दी, चौथी पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ परिवार और कॅरियर में संतुलन बना रही है, जबकि सबसे युवा पीढ़ी अपने बच्चों के साथ दोस्त जैसा रिश्ता निभा रही है।

लेकिन कभी इसकी चर्चा नहीं की

Father's Day : तरुण सिंह अपने पिता संजीव कुमार सिंह के साथ। फोटो पत्रिका

तरुण सिंह ने बताया कि उनके जन्म के समय उनके पिता संजीव कुमार सिंह का चयन पुणे के इंदिरा गांधी कॉलेज में एमबीए के लिए हो गया था। यह उनके जीवन का बड़ा अवसर था, लेकिन परिवार और नवजात बेटे की जिम्मेदारी के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। जब मुझे यह बात पता चली तो एहसास हुआ कि मेरे लिए पापा ने अपने सपनों का कितना बड़ा त्याग किया था। उन्होंने कभी इसकी चर्चा नहीं की। वे चाहते हैं कि शिक्षा हर व्यक्ति तक पहुंचे और किसी पिता को अपने सपनों और बच्चों के भविष्य के बीच कठिन चुनाव न करना पड़े।

तीसरी पीढ़ी ने पूरा किया सीए का ख्वाब

Father's Day : प्रणव धूत अपने पिता पंकज धूत और दादा नवल किशोर धूत के साथ। फोटो पत्रिका

प्रणव धूत की सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियों के सपनों की कहानी है। उनके दादा नवल किशोर धूत सीए बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण नहीं बन पाए। बाद में उन्होंने अपने बेटे पंकज धूत को भी सीए बनने के लिए प्रेरित किया, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वे भी यह सपना पूरा नहीं कर पाए। प्रणव ने बताया कि जब मैं दसवीं कक्षा में था, तभी से दादाजी मुझे सीए बनने के लिए प्रेरित करते थे। उनका विश्वास और मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ रहा। अब सीए बन चुका हूं, तो सबसे अधिक खुशी दादाजी को है।

खुद फुटबॉलर नहीं बने तो बेटे ...

Father's Day : सौरभ यादव के पिता राधेश्याम यादव के साथ। फोटो पत्रिका

सौरभ यादव के पिता राधेश्याम यादव का सपना था कि वे फुटबॉल में आगे बढ़ें, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों ने उनके सपनों को सीमित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे के जरिए उस सपने को जीना शुरू किया। उनके पिता ने सात साल की उम्र से ही उन्हें फुटबॉल की ट्रेनिंग दिलाना शुरू कर दिया था। खेल की बारीकियों से लेकर अनुशासन तक, हर बात उन्होंने खुद सिखाई।

मेरे पापा सिर्फ पिता नहीं, मेरे पहले कोच भी हैं। सब-जूनियर नेशनल प्रतियोगिता के दौरान जरूरी दस्तावेजों की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। जब मेरा एंकल लिगामेंट टूट गया था, तब नौकरी से लौटने के बाद भी पूरी रात अस्पताल में मेरे साथ रहे।

Published on:
21 Jun 2026 10:42 am