जयपुर. गंजापन या चर्म रोगों सेे जूझ रहे मरीजों व खूबसूरत दिखने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लाखों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। वे कम खर्च में ही अपना इलाज करवा सकेंगे। इलाज की यह सुविधा उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल में ही मिल जाएगी।
देवेंद्र सिंह राठौड़
Hair Fall Treatment At SMS Hospital : जयपुर. गंजापन या चर्म रोगों सेे जूझ रहे मरीजों व खूबसूरत दिखने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लाखों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। वे कम खर्च में ही अपना इलाज करवा सकेंगे। इलाज की यह सुविधा उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल (Sawai Man Singh Hospital) में ही मिल जाएगी। इसके लिए यहां चरक भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी स्थापित किया जा रहा है। जो अगले साल मई-अगस्त तक बनकर शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार अभी तक दुनिया में केवल एक ही डर्मेटोलॉजी इंस्टीट्यूट है, जो लंदन में है। ऐसे में जयपुर में दुनिया का ऐसा दूसरा सरकारी अस्पताल होगा, जहां यौन संबंधी समस्याओं के साथ ही चर्म रोगों का इलाज किया जा सकेगा।
इसलिए पड़ी जरूरत
अस्पताल के चरक भवन में चर्म व अन्य रोगों के इलाज के लिए सालाना चार से पांच लाख लोग आते हैं। हर साल इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। साथ ही यहां पर कॉस्मेटिक सर्जरी व विभिन्न प्रकार के लेजर ट्रीटमेंट की सुविधा नहीं है। यहां चर्म रोग विभाग को अपग्रेड करते हुए इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। इस पर 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जिनमें पांच करोड़ में सिविल कार्य व 2 करोड़ रुपए में इक्यूपमेंट खरीदे जाएंगे। चर्मरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक माथुर ने बताया कि चरक भवन के प्रथम तल पर एक ही छत के नीचे जटिल चर्म रोग से पीडि़त मरीजों को पूरा इलाज मिल सकेगा। जिसमें पांच तरह की थेरेपी दी जाएगी।
डॉ. सरोज पुरोहित ने बताया कि इंस्टीट्यूट का काम भी शुरू हो चुका है। इसके लिए कई मशीनें, उपकरण भी खरीदे जा चुके हैं। चर्म रोगों के इलाज पर लोगों को लाखों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। जो निजी अस्पताल में 50 हजार से 1 लाख रुपए में हो रहे हैं। अब लोग यहां 500 से 1500 रुपए के खर्च में ऐसा ट्रीटमेंट करवा सकेंगे।
14 प्रोसिजर कैबिन बनाए जाएंगे
डॉ. रामसिंह मीणा व डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जल्द ही नेत्ररोग विभाग के वार्ड को न्यू फेब्रिक वार्ड में शिफ्ट करेंगे। इसके बाद इंस्टीट्यूट का काम शुरू हो जाएगा। इस तल पर कुल 14 प्रोसिजर रूम होंगे। जिसमें मरीजों का अलग-अलग थेरेपी, प्रोसिजर से इलाज किया जा सकेगा।