जयपुर

जो जल्दी आता कुर्सी पर संभालता, बाद वाले का सोफे पर बैठकर गुजरता दिन

ग्रेटर नगर निगम की सतर्कता शाखा में एक पद पर दो पुलिस निरीक्षक काम कर रहे हैं। पहले से तैनात राकेश यादव का पदस्थापन काल निगम में पूरा हो गया है, लेकिन वे अब तक यहां से रिलीव नहीं हुए हैं।
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Jul 03, 2021
Jaipur Greater Nigam: Two Police Inspector in Vigilance Branch

अश्विनी भदौरिया/जयपुर। ग्रेटर नगर निगम की सतर्कता शाखा में एक पद पर दो पुलिस निरीक्षक काम कर रहे हैं। पहले से तैनात राकेश यादव का पदस्थापन काल निगम में पूरा हो गया है, लेकिन वे अब तक यहां से रिलीव नहीं हुए हैं। जबकि, सीआइडी (सीबी) से एक वर्ष के लिए विजेंद्र पूनिया यहां 3 जून को ही आ चुके हैं। दोनों एक ही दफ्तर में बैठ रहे हैं। ऐसे में रोज ऑफिस में उस समय अजीब स्थिति हो जाती है जब एक पुलिस निरीक्षक जल्दी आकर सीट संभाल लेते हैं और जो बाद में आते हैं वो सोफे पर बैठकर काम करते हुए दिन गुजारते हैं। पिछले एक माह से यही हाल है।

अभी तक लगी है नेमप्लेट
इतना ही नहीं, दोनों निरीक्षकों के बीच शीत युद्ध के स्तर तक का अंदाजा ऑफिस के गेट पर नेमप्लेट देखकर लगाया जा सकता है। पहले जिस जगह राकेश यादव की नेमप्लेट लगी थी, वहां पर अब विजेंद्र पूनिया की नेमप्लेट लगी हुई है। बाहर ही राकेश यादव की नेमप्लेट साइड में लगी हुई है।

सुविधाओं को भी ले रहे लाभ
-राकेश यादव एक महीने से निगम की सुविधाओं का भी लाभ ले रहे हैं। न सिर्फ निगम के वाहन का उपयोग कर रहे हैं, बल्कि निगम से एक महीने का अतिरिक्त भुगतान भी उन्हें किया जाएगा।

-उप निरीक्षक दयाराम चौधरी का भी 9 जून को ग्रेटर निगम से सीआइडी (सीबी) में तबादला हो चुका है। इसके बाद भी वे अब तक यहीं पर काम कर रहे हैं।
-दोनों निरीक्षकों के ग्रेटर निगम में रहने से निगम कोष पर दो लाख रुपए से अधिक का मासिक भार भी पड़ रहा है। ये न सिर्फ निगम से सैलरी ले रहे हैं, बल्कि अन्य सुविधाओं का भी लाभ उठा रहे हैं।

आदेश के बाद भी जाने को तैयार नहीं
स्थिति यह है कि निगम से अपने मूल विभाग में कोई जाने को तैयार नहीं है। पुलिस महानिदेशक की ओर से 29 जून को एक आदेश जारी किया गया। इसमें साफ लिखा है कि स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, केंद्र सरकार के संगठनों में कार्यरत समस्त कार्मिक, जिनकी प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त हो चुकी है वे अविलम्ब अपनी उपस्थिति मूल यूनिट में प्रस्तुत करें। इसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा।

यहां नहीं चल रही आयुक्त की
सूत्रों की मानें तो आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव की नहीं चल पा रही है। यही वजह है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी राकेश यादव रिलीव नहीं हुए हैं। जबकि, एक जून को नौ कांस्टेबलों की प्रतिनियुक्ति अवधि पूर्ण होने पर उन्हें मूल विभाग भेज दिया था। उस समय कई कांस्टेबल निगम से नहीं जाना चाहते थे। कुछ ने तो निगम में रहने के लिए सिफारिश भी करवाई थी। लेकिन आयुक्त ने एक की भी नहीं सुनी और सभी को कार्यमुक्त कर दिया था।

जल्द कर देंगे रिलीव
जल्द ही निरीक्षक और उप-निरीक्षक को निगम से कार्यमुक्त किया जाएगा। अभी उप निरीक्षक की जगह कोई आया नहीं है। जैसे ही कोई आता है, दोनों को ही रिलीव कर दिया जाएगा।
-यज्ञमित्र सिंह देव, आयुक्त जयपुर ग्रेटर निगम

Published on:
03 Jul 2021 06:31 pm