भांकरोटा अग्निकांड के मामले में सरकार की ओर से गठित जांच कमेटियां अपने-अपने तरीके से रिपोर्ट तैयार कर रही हैं, लेकिन असलियत यह है कि ये रिपोर्ट्स अक्सर सरकारी बस्ते में दबकर रह जाती हैं।
जयपुर। भांकरोटा अग्निकांड के मामले में सरकार की ओर से गठित जांच कमेटियां अपने-अपने तरीके से रिपोर्ट तैयार कर रही हैं, लेकिन असलियत यह है कि ये रिपोर्ट्स अक्सर सरकारी बस्ते में दबकर रह जाती हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि चार साल पहले भी भांकरोटा में ही ऐसी ही एक दुर्घटना हुई थी और उसी स्थान पर अब फिर एक बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई लोग जिंदा जल गए।
इस हादसे की जांच भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के निर्देश पर की गई थी, लेकिन चार साल बाद भी न तो परिवहन विभाग ने कोई चेतावनी जारी की और न ही एनएचएआइ ने उस दुर्घटनाग्रस्त कट को बंद करने की कोई कार्रवाई की। इसी लापरवाही का परिणाम है कि फिर से उसी स्थान पर भीषण दुर्घटना घटी।
इधर, चार साल पहले आरटीओ की ओर से एनएचएआइ को सड़क हादसे के बारे में पत्र दे दिया। विभाग ने भी पत्र भेजने के बाद इतिश्री कर ली। चार साल से उसी पॉइंट पर कई हादसे हो गए लेकिन विभाग ने आगे कार्रवाई नहीं की।
भांकरोटा के पास अजमेर रोड से रिंग रोड की ओर जाने वाले कट पर नियमित रूप से बड़े ट्रक पलटने की घटनाएं हो रही थीं। इसी के मद्देनजर, तत्कालीन परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के निर्देश पर परिवहन निरीक्षक यशपाल शर्मा ने जांच की।
रिपोर्ट में पाया गया कि एनएच 8 से रिंग रोड की ओर यातायात डायवर्ट किया जाता है, लेकिन वहां चेतावनी चिह्न नहीं लगाए गए हैं, जो मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन है। इसके कारण सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। साथ ही, इस पॉइंट पर लंबे ट्रक ट्रेलर यूटर्न ले रहे हैं, जिससे पीछे से आ रहे वाहनों को खतरा हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस स्थान पर ट्रैफिक लाइट भी नहीं थी।
तत्कालीन परिवहन मंत्री के निर्देश पर उस पॉइंट पर हो रहे हादसे को लेकर जांच की थी। रिपोर्ट बनाकर आरटीओ को दी थी। आरटीओ की ओर से एनएचएआइ को सड़क हादसों को रोकने के लिए पत्र भी भेजा था।
-यशपाल शर्मा, परिवहन निरीक्षक
हमने अपनी सरकार में एनएचएआइ और परिवहन विभाग के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा को लेकर कई बैठकें कराईं लेकिन अभी परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा पर काम ही नहीं कर रहा। हमने जांच कराकर खामियां सुधारने के निर्देश दिए। टोल कंपनियों को नोटिस दिए। लेकिन अब विभाग और एनएचएआइ टोल कंपनियों के सामने एक्शन लेने में सक्षम नहीं है। अगर हाइवे पर सभी शर्तों की पालना कराई जाए तो हादसे रुक जाएं।
-प्रताप सिंह खाचरियावास, पूर्व परिवहन मंत्री
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