जयपुर

रोज 20 KM गाड़ी चलाने वाला हर शख्स ऐसे बचा सकता है सालाना 60–70 लीटर पेट्रोल-डीजल

वीकल रेस्ट डे: पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच प्रतिदिन 18 लाख वाहन जयपुर की सड़कों पर, हर दिन औसतन 20 लाख लीटर ईंधन की खपत, 'वीकल रेस्ट डे' बन सकता है शहर को राहत देने का व्यावहारिक तरीका।

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May 15, 2026
Heavy traffic on the roads of Jaipur
यातायात के दबाव में सिमटता गुलाबी नगर Image Source: फोटो पत्रिका

जयपुर: सुबह ऑफिस की जल्दी, स्कूल बसों की कतार, हर चौराहे पर लंबा जाम और आसमान में धुएं की परत। गुलाबी नगर की पहचान अब धीरे-धीरे ट्रैफिक और प्रदूषण के बोझ तले दबती जा रही है। ऐसे समय में 'वीकल रेस्ट डे' केवल पेट्रोल-डीजल की बचत के साथ शहर को राहत देने का व्यावहारिक तरीका बनकर उभर सकता है। शहर को खुली सांस देने के लिए सप्ताह में एक दिन अपनी कार या बाइक घर पर छोड़िए और साइकिल, पैदल, कार पूल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाइए।

वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह छोटी पहल आम परिवारों के बजट से लेकर पर्यावरण तक बड़ा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जयपुर के सिर्फ 10 प्रतिशत वाहन चालक भी सप्ताह में एक दिन निजी वाहन नहीं निकालें तो शहर में लाखों लीटर ईंधन की सालाना बचत संभव है।

पेट्रोल-डीजल की बचत का गणित

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक सुमित बगई के अनुसार ऑड-ईवन या वीकल रेस्ट डे में आपस में पूल भी किया जा सकता है। इससे पेट्रोल की 30–35 प्रतिशत तक बचत होगी। रोज औसतन 20 किलोमीटर कार चलाने वाले व्यक्ति की कार यदि 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो प्रतिदिन करीब 1.3 लीटर पेट्रोल खर्च होता है। सप्ताह में एक दिन वाहन बंद रखने पर साल भर में लगभग 65–70 लीटर पेट्रोल की बचत हो सकती है। मौजूदा कीमतों के हिसाब से यह करीब 7–8 हजार रुपए सालाना की सीधी बचत है। शहर के एक लाख वाहन चालक भी ऐसा करें तो अनुमानित 70 लाख लीटर से अधिक ईंधन बचाया जा सकता है।

ईंधन बचाने के विकल्प

  • मेट्रो और लो-फ्लोर बस
  • कार पूल : 3–4 सहकर्मियों के साथ
  • पैदल या साइकिल : पास की दूरी पर
  • स्कूल साझा वाहन व्यवस्था
  • ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन

जयपुर की आबादी और बढ़ते वाहनों के आंकडे़

  • अनुमानित आबादी : 45 लाख से अधिक
  • पंजीकृत वाहन : 45 लाख
  • हर साल जुड़ने वाले नए वाहन : लगभग 1.5 लाख
  • प्रतिदिन पेट्रोल-डीजल की अनुमानित खपत : 20 लाख लीटर से अधिक
  • रोज सड़कों पर उतरने वाले निजी वाहन : 18 लाख से अधिक
  • दोपहिया वाहन : 70 प्रतिशत
  • प्रमुख जाम वाले चौराहे : 50 से अधिक
  • औसतन पीक ऑवर स्पीड : 18–22 किमी प्रति घंटा
  • मध्यम वर्गीय परिवार का मासिक ईंधन खर्च : 5–12 हजार रुपए
  • प्रतिदिन मेट्रो यात्री : 60 हजार
  • लो-फ्लोर और मिनी बस : 1 हजार से अधिक
  • वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी : 35–40 प्रतिशत

एक्सपर्ट व्यू

छोटी आदत, बड़ा असर
संडे नो वीकल, फ्राइडे कार पूल या वन डे नो बाइक जैसी आदतें सामाजिक अभियान बन जाएं तो जयपुर को ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन संकट तीनों से राहत मिल सकती है। शहर को खुली सांस देने की शुरुआत घर के पार्किंग स्लॉट से ही हो सकती है। वीकल रेस्ट डे केवल ईंधन बचत का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। वाहनों से निकलने वाला धुआं श्वसन रोग, एलर्जी और हार्ट संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है। सप्ताह में एक दिन भी ट्रैफिक लोड कम हो तो शहर की एयर गुणवत्ता पर सकारात्मक असर दिखाई दे सकता है।

-डॉ. वीरेन्द्र सिंह, अस्थमा एवं श्वास रोग विशेषज्ञ

बिना पूर्व सूचना डायवर्जन से बढ़ रही ईंधन की खपत

कभी वीआइपी मूवमेंट, कभी धार्मिक जुलूस तो कभी सांस्कृतिक कार्यक्रम, धरना, राजनीतिक आयोजन से होने वाले जाम व बगैर पूर्व सूचना के यातायात में बदलाव से जनता परेशान है। इससे ईंधन का व्यय, प्रदूषण, समय व्यय, धन व्यय होता है, जरूरी सेवाएं भी बाधित होती हैं। पुलिस को कार्यक्रमों की पूर्व सूचना होती है। ऐसे में यातायात पुलिस पूर्व सूचना सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया व अन्य साधनों से पूर्व में ही प्रसारित करे। अभी सोमवार शाम त्रिपोलिया बाजार से चौड़ा रास्ते के लिए निकला तो पुलिस ने रास्ता रोका हुआ था। वहां कोई बताने वाला भी नहीं कि रास्ता कब खुलेगा या वैकल्पिक मार्ग कौन सा रहेगा। त्रिपोलिया बाजार, किशनपोल बाजार, अजमेरी गेट से लेकर एमजीडी स्कूल, अशोक मार्ग जाम था।

-डॉ. विनय सोनी, एक जागरूक नागरिक

Published on:
15 May 2026 12:49 pm