jaipuria hospital : प्रशासन ने मिलीभगत से अस्पताल परिसर में खुलवा दिया प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर, मरीजों से हो रही अवैध वसूली, अधीक्षक बोले-मुझे जानकारी नहीं
जयपुर. जयपुरिया अस्पताल में अस्पताल प्रशासन और एक निजी फर्म की मिलीभगत का मामला सामने आया है। जिससे सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज उपलब्ध करवाने के दावे की पोल खुल गई है। कारण कि यहां पर एक निजी सोनोग्राफी सेंटर शुरू हो गया है। जिसमें मरीजों से जांच के नाम पर अवैध वसूली हो रही है।
गौरतलब है कि, जयपुरिया अस्पताल राजधानी का दूसरा बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां न केवल मालवीय नगर, दुर्गापुरा बल्कि मानसरोवर, सांगानेर के अलावा गोनेर, शिवदासपुरा समेत कई इलाकों से रोजाना 3 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। कई मरीजों को डॉक्टर सोनोग्राफी जांच करवाने के लिए कहते हैं और जैसे ही मरीज रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंचता हैं तो उसकी पर्ची पर 10 से 15 दिन बाद की तारीख डाल दी जाती है। ऐसे में मरीजों को सोनोग्राफी जांच के लिए उसी दिन आना पड़ेगा, भले ही उसे पीड़ा आज हो रही हो। यह समस्या लंबे समय जारी है। हैरानी की बात है कि अस्पताल प्रशासन ने सरकारी स्तर पर कोई समाधान करने की बजाय एक निजी फर्म को इसका ठेका दे दिया है। यानी अस्पताल परिसर में गत दिनों एक प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर खुलवा दिया। मरीजों को इमरजेंसी में भी वेटिंग का हवाला देकर रवाना किया जा रहा है। ऐसे मेें मजबूरन मरीज को प्राइवेट सेंटर पर ही जांच करवानी पड़ रही है।
अधीक्षक बोले, संभव नहीं, पता करता हूं: हैरानी की बात है कि सेंटर में सोनोग्राफी की सुविधा शुरू कर दी गई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेश मंगल को इसकी जानकारी ही नहीं है। उनका कहना है कि एक निजी फर्म को दुकानें आवंटित की थी। वो उसमें सोनोग्राफी सेंटर खोलना चाहता था। इसका पता लगाने के लिए हमने कलक्ट्रेट से जवाब मांगा था, जो अभी मिला नहीं है। ऐसे में यहां सोनोग्राफी होना संभव नहीं है।
प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर अस्पताल परिसर स्थित ब्लड कलेक्शन सेंटर के पास खोला गया है। उसे देखकर कई मरीज वहां पहुंच भी रहे हैं। मरीजों ने बताया कि 600 रुपए से जांच की जा रही है। अगर जांच नि:शुल्क करवानी हो तो उसके लिए अस्पताल के अंदर ही जाना पड़ेगा। इतना ही नहीं, इसी फर्म ने वहीं एक निजी मेडिकल स्टोर खोल लिया है। जबकि अस्पताल में लाइफलाइन और सहकारिता विभाग द्वारा संचालित दवा की दुकानें पहले से हैं।