
जयपुर
राज्य में ग्रामीण क्षेत्र में जनता जल योजना के तहत लगे हुए करीब सात हजार कर्मचारियों को जलदाय विभाग से झटका लगा है। जलदाय विभाग ने इन कर्मचारियों को पंचायतीराज का बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है। विभाग ने सरकार को भेजी अपनी टिप्पणी में यह कहा है कि इन कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने के लिए सक्षम स्तर पर बैठक में ही फैसला लिया जा सकता है।
दरअसल, राज्य में 1994 से जनता जल योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंप ड्राइवर, हेल्पर कार्यरत हैं। करीब 7 हजार कर्मचारी इस योजना के तहत कार्यरत हैं। कर्मचारी नियमति करने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में 9 जुलाई को इन्होंने जलभवन पर प्रदर्शन कर नियमित करने की मांग की थी। जनता जल योजना से जुड़े कर्मचारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि चिकित्सा, शिक्षा विभाग की तरह उन्हें भी अनुभव के आधार बोनस अंक दिए जाएं। बोनस अंकों के आधार पर उन्हें नियमित किया जाए। कर्मचारियों ने 15 मई को मंत्रीमंडलीय उप समिति की बैठक में भी ज्ञापन दिया था, जिसके बाद इस संबंध में समिति ने जलदाय विभाग से टिप्पणी मांगी थी। अब विभाग ने सरकार को अपनी टिप्पणी भेजते हुए इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है।
जलदाय विभाग ने झाड़ा पल्ला
जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता अनिल कुमार श्रीवास्तव ने पीएचईडी के संयुक्त शासन सचिव द्वितीय को लिखे पत्र में जनता जल योजना से जुड़े कर्मचारियों को पंचायतीराज विभाग के अधीन बताया है। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि इन कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने का निर्णय सरकारी स्तर पर ही लिया जा सकता है। साथ ही अनुभव प्रमाण पत्र तभी मान्य होगा जब यह खंड विकास अधिकारी से प्रमाणित होगा। विभाग की इस सफाई से जनता जल योजना में लगे कर्मचारियों को नियमित करने का मामला अब पंचायतीराज विभाग के पाले में चला गया है।
1994 से कार्यरत हैं कर्मचारी
दरअसल, जनता जल योजना में लगे कर्मचारियों को शुरूआत में 1994 में इन्हें 500 रुपए का मासिक मानदेय मिलता था जो कि अब 5538 रुपए हो गया है। ये कर्मचारी पिछले 24 साल से कार्यरत हैं। पूर्व में यह कर्मचारी पीएचईडी के अधीन थे लेकिन 2011 से यह पंचायतीराज अधीन आ गए हैं।
कर्मचारियों ने जताई नाराजगी
प्रदेश जनता जल योजना संघ के प्रदेशाध्क्ष प्रहलाद राय अग्रवाल का कहना है कि कर्मचारी सालों से कार्यरत हैं। सरकार को इन्हें बोनस अंकों का लाभ देकर नियमित करना चाहिए। संघ का कहना है कि कर्मचारियों को नियमित करने के नाम पर टालमटोल करने से कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारी अपना आंदोलन जारी रखेंगे।