
AIMIM Chief Owaisi and RLP Chief Hanuman Beniwal meeting in New Delhi
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच नई दिल्ली में मुलाक़ात और बंद कमरे में हुई बातचीत ने राजस्थान के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय निकाय और आगामी पंचायत चुनावों से ठीक पहले हुई इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि ये मुलाकात एक बार फिर तीसरे मोर्चे का एक नया और ठोस प्रयोग साबित हो सकती है।
राजस्थान की राजनीति में हनुमान बेनीवाल का मुख्य जनाधार जाट व किसान समुदाय पर टिका है, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की सीधी नजर अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं पर है। मारवाड़, शेखावाटी और मेवात जैसे क्षेत्रों में यदि जाट और मुस्लिम मतदाता एक मंच पर आते हैं, तो यह समीकरण दर्जनों सीटों पर हार-जीत तय करने का माद्दा रखता है।
राजस्थान में मुस्लिम और जाट मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मुख्य स्तंभ माना जाता रहा है। यदि RLP और AIMIM ज़मीनी स्तर पर चुनावी तालमेल करते हैं, तो सबसे गहरा झटका कांग्रेस को लगेगा। ओवैसी अल्पसंख्यक वोटों में और बेनीवाल किसान-जाट वोटों में सेंध लगाकर कांग्रेस के गणित को बिगाड़ सकते हैं।
इस बैठक की टाइमिंग बेहद अहम है। प्रदेश में जल्द होने वाले स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव दोनों दलों के लिए अपनी कैडर ताकत परखने का जरिया हैं। फिलहाल तो दोनों दलों ने पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अपने दम पर लड़ने का ऐलान किया है और 'गठबंधन' को लेकर औपचारिक तौर पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
ऐसे में ओवैसी-बेनीवाल मुलाकात के बाद अटकलें लगने लगी हैं कि दोनों दल साथ मिलकर मजबूत स्थानीय प्रत्याशियों को मैदान में उतारने और एक-दूसरे के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गठबंधन कर भाजपा और कांग्रेस दोनों को कड़ी टक्कर देने की फिराक में हैं।
राजस्थान में लंबे समय से एक सशक्त तीसरे मोर्चे की कमी महसूस की जाती रही है। संसद में ओवैसी, हनुमान बेनीवाल, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के राजकुमार रोत और आजाद समाज पार्टी (ASP) के चंद्रशेखर आजाद के बीच एक नया सियासी तालमेल देखा गया है। यह दिल्ली बैठक इसी गठबंधन को 2028 के विधानसभा चुनावों तक एक मजबूत राजनीतिक विकल्प बनाने की पहली कड़ी भी माना जा रहा है।
इससे पहले भी संसद के पटल पर असदुद्दीन ओवैसी ने हनुमान बेनीवाल को लोकसभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए आगे बढ़ाकर अपनी सियासी मंशा जाहिर की थी। दिल्ली में बेनीवाल के साथ हुई इस बैठक से साफ है कि दोनों शीर्ष नेता अब संसदीय तालमेल से आगे बढ़कर राजस्थान के ग्रामीण और शहरी वोटरों के बीच सीधी साझी पैठ बनाने के मूड में हैं।
Updated on:
14 Aug 2026 09:32 am
Published on:
14 Aug 2026 09:32 am
