कोटा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में 104 बच्चों की मौत की खबर के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर की सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में भी दिसम्बर महीने में 146 बच्चों की मौतों ने प्रशासन में हड़कम्प मचा दिया।
जोधपुर/बीकानेर। कोटा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में 104 बच्चों की मौत की खबर के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर की सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में भी दिसम्बर महीने में 146 बच्चों की मौतों ने प्रशासन में हड़कम्प मचा दिया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन हालांकि मौतों की संख्या को सामान्य बताते हुए शिशु मृत्यु दर में कमी का दावा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर बीकानेर एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्व पीबीएम अस्पताल में राजकीय शिशु अस्पताल में दिसम्बर में तीस दिन में 162 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया।
समपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार गत दिसम्बर में शिशु रोग विभाग में 3002 नवजात समेत 4689 बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें से 146 बच्चों की मौत हुई। इनमें 102 बच्चे नवजात थे। नवजात बच्चों में 61 बच्चे विभिन्न जिलों से रैफर होकर जोधपुर आए थे, जबकि यहां जन्मे 41 बच्चों ने दम तोड़ा। पूरे साल में इन विभागों में 47815 बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें से नियोनेटल केयर यूनिट व पीडियाट्रिक आइसीयू में 754 बच्चों की मौत हुई है। इस हिसाब से मेडिकल कॉलेज में 1.57 फीसदी बच्चों ने दम तोड़ा, जबकि साल 2000 में यह आंकड़ा 8.44 प्रतिशत था।
दावा यह
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसएस राठौड़ ने बच्चों की मौत के आंकड़ों में कमी का दावा करते हुए कहा कि जोधपुर में अन्तरराष्ट्रीय मानक (3 फीसदी) के मुकाबले काफी कम है। पूरे पश्चिमी राजस्थान व एम्स जोधपुर के बच्चे रैफर होकर यहां आते हंै। हम तो सभी बच्चों को बचाने की कोशिश करते हैं। जयपुर समेत प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलजों के मुकाबले जोधपुर मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग की शिशु मृत्यु दर काफी कम है। पिछले दो साल से मेडिकल कॉलेज की नर्सरी को राज्य सरकार की ओर से बेस्ट नर्सरी का अवार्ड मिल रहा है। मेडिकल कॉलेज सुविधाओं को और बेहतर बनाने का निरंतर प्रयास करता रहता है।
ये सुविधाएं हैं शिशु रोग विभाग में
उम्मेद अस्पताल के एनआइसीयू में 30 बैड हैं। पीआइसीयू में 30 बैड हैं। थैलेसीमिया व हिमोफिलिया के अलग से वार्ड बने हुए हंै। एमडीएम में बच्चों के आइसीयू 15 बैड का है। सात प्रोफेसर समेत 18 चिकित्सक कार्यरत हैं, लेकिन सम्भाग का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण यहां हमेशा चिकित्सकों पर काम का दबाव रहता है। कई बार रैफर होकर आने वाले बच्चों को सम्भालने के लिए ओपीडी में भी चिकित्सक नहीं मिलते।
गंभीर हालत में अस्पताल आए थे सभी बच्चे
बीकानेर. एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम अस्पताल के राजकीय शिशु अस्पताल में दिसम्बर के तीस दिन में 162 बच्चों की मौत का आंकड़ा शनिवार को सामने आया। इसके बाद जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन सक्रिय हुआ। एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एचएस कुमार ने 30 दिन में 162 मौत होने की पुष्टि करते हुए बच्चों के उपचार में लापरवाही नहीं होने की बात कही है।
मेडिकल कॉलेज के अनुसार शिशु अस्पताल में दिसम्बर-2019 में 2,219 बच्चे भर्ती किए गए। इनमें से 162 बच्चों की आइसीयू में उपचार के दौरान मौत हो गई। वहीं पिछले साल 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक 628 बच्चों की उपचार के दौरान मौत हुई है। जनवरी-2020 के पहले चार दिन में छह बच्चों की मौत हुई है।
दिसम्बर में ज्यादा बच्चे आए
प्राचार्य एचएस कुमार ने बताया कि बीकानेर ट्रसरी सेंटर है। जननी सुरक्षा योजना शुरू होने के बाद नवजात बच्चे गंभीर होते ही रेफर होकर शिशु अस्पताल पहुंचते हैं। पिछले सालों की तुलना में इस बार दिसम्बर में ज्यादा बच्चे अस्पताल आए। दिसम्बर में 162 बच्चों की मौत की सूचना मासिक रिपोर्ट में जयपुर मुख्यालय भेजी जा चुकी है। शिशु अस्पताल में बच्चों के उपचार में कोई लापरवाही आदि से मौत नहीं हुई है। यहां उपचार की भी समुचित व्यवस्था है।