मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद दिल्ली जा रहे सिद्धारमैया का विमान खराब मौसम के कारण जयपुर डायवर्ट। एयरपोर्ट पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत से हुई अनायास मुलाकात।
देश के राजनीतिक हलकों और विशेषकर राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार रात उस समय अचानक सियासी सरगर्मियां तेज हो गईं, जब कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का विशेष चार्टर विमान जयपुर हवाई अड्डे पर उतरा। मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद सिद्धारमैया का यह दौरा पूर्व निर्धारित नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से अचानक मौसम के मिजाज में आए बदलाव के कारण संभव हुआ। दरअसल गुरुवार रात दिल्ली में अचानक मौसम अत्यधिक खराब हो गया था। धूल भरी आंधी और कम विजिबिलिटी के कारण विमानों को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से बंगलुरु से दिल्ली जा रहे सिद्धारमैया के चार्टर विमान को हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) के निर्देश पर तुरंत जयपुर के सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तरफ लैंड करवाना पड़ा।
कर्नाटक की राजनीति में हाल ही में हुए बड़े बदलावों के बाद सिद्धारमैया अपनी अगली राजनीतिक दिशा तय करने और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करने के उद्देश्य से एक हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल के साथ बंगलुरु से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। विमान जब दिल्ली के हवाई क्षेत्र के पास पहुंचा, तो वहां लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल सकी।
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पायलट ने नजदीकी सुरक्षित विकल्प के तौर पर जयपुर एयरपोर्ट से संपर्क साधा। अनुमति मिलते ही विमान को राजस्थान की ओर मोड़ दिया गया। जयपुर हवाई अड्डे पर रात करीब 8.10 बजे इस चार्टर विमान की सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने कुछ ही मिनटों में जयपुर को देश की राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया।
इस विशेष चार्टर फ्लाइट में केवल सिद्धारमैया ही सवार नहीं थे, बल्कि उनके साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कई बड़े पदाधिकारी और कर्नाटक के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। विमान में मुख्य रूप से कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला सफर कर रहे थे।
इनके अलावा प्रतिनिधिमंडल में कर्नाटक सरकार के मंत्री केजे जॉर्ज, बैराती सुरेश, सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार पोन्नन्ना, विधान परिषद के सदस्य डॉ. यतींद्र और एआईसीसी सचिव अभिषेक दत्त भी शामिल थे। इन सभी नेताओं को दिल्ली पहुंचकर पार्टी के केंद्रीय आलाकमान के साथ एक बड़ी समीक्षा बैठक में हिस्सा लेना था, लेकिन मौसम के व्यवधान के कारण इन सभी दिग्गजों को जयपुर में रुकना पड़ा।
जैसे ही जयपुर में इस बात की सूचना फैली कि कर्नाटक के निवर्तमान सीएम सिद्धारमैया का विमान आपातकालीन रूप से जयपुर में लैंड हुआ है और वे एयरपोर्ट पर ही मौजूद हैं, वैसे ही राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सक्रिय हो गए। गहलोत ने बिना समय गंवाए तुरंत जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने का निर्णय लिया।
अशोक गहलोत सीधे एयरपोर्ट के सुरक्षित वीआईपी लाउंज में पहुंचे, जहां सिद्धारमैया और रणदीप सुरजेवाला सहित सभी कांग्रेसी नेता दिल्ली के लिए मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे थे। गहलोत ने वहां पहुंचकर सभी नेताओं की अगवानी की और राजस्थान की परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया। इस औचक आगमन ने दोनों राज्यों के वरिष्ठतम नेताओं को एक मंच पर बैठने का अवसर दे दिया।
दिल्ली में मौसम साफ न होने के कारण सिद्धारमैया और उनके साथ आए तमाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेता करीब 3.5 घंटे तक जयपुर एयरपोर्ट पर ही अटके रहे। इस अप्रत्याशित समय का उपयोग नेताओं ने आपस में गहन विचार-विमर्श के लिए किया।
वीआईपी लाउंज में अशोक गहलोत और सिद्धारमैया के बीच हुई यह अनायास मुलाकात पूरी तरह से गैर-राजनीतिक परिस्थितियों में शुरू हुई थी, लेकिन जब दो राज्यों के इतने बड़े क्षत्रप एक साथ बैठें, तो राजनीति पर चर्चा होना स्वाभाविक है। बंद कमरे में हुई इस अनौपचारिक बातचीत के दौरान नेताओं के बीच देश के मौजूदा सियासी माहौल, कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद बने नए समीकरणों और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
जयपुर एयरपोर्ट पर बिताए गए इन 3.5 घंटों के बाद जब दिल्ली एटीसी से हरी झंडी मिली और मौसम में सुधार हुआ, तब जाकर रात को देर गए सिद्धारमैया का चार्टर विमान एक बार फिर दिल्ली के लिए रवाना हो सका। जयपुर के नेताओं ने उन्हें सहर्ष विदा किया।
अब सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों पर टिकी हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से औपचारिक त्यागपत्र देने के बाद अब सिद्धारमैया का भावी राजनीतिक भविष्य और संगठन में उनकी नई भूमिका क्या होगी, इसका अंतिम फैसला दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान द्वारा ही किया जाएगा। जयपुर की यह मुलाकात इस पूरी सियासी यात्रा का एक बेहद दिलचस्प और अनपेक्षित पड़ाव बन गई।