
ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर. पेपर लीक मामले में बाबूलाल कटारा 251 दिन से जेल में है। इसके बावजूद वह आरपीएससी (राजस्थान लोक सेवा आयोग) के सदस्य जैसे संवैधानिक पद पर काबिज है। भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चुनाव जीतने वाली भाजपा सरकार के सामने अब कटारा को बर्खास्त करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है। कटारा ने 24 दिसम्बर 2022 को होने वाली वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा का पेपर अक्टूबर में ही लीक कर दिया था। कटारा के पास विशेषज्ञों से पेपर सैट कराने की जिम्मेदारी थी। पेपर तैयार होते ही वह सभी सैट की मूल प्रति अपने सरकारी आवास पर ले गया। वहां उसके भांजे विजय डामोर से सभी सवाल उतरवा लिए, फिर उसने प्रिंटिंग के लिए पेपर कार्यालय में जमा करा दिया। विजय के लिखे पर्चे की फोटो पेपर लीक गिरोह के शेरसिंह ने अपने मोबाइल में ली थी, जिसके बाद पर्चा कई आरोपियों तक पहुंचा। एसओजी ने कटारा को 18 अप्रेल को गिरफ्तार किया था। वह तभी से न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने जेल में पूछताछ के बाद उसकी सम्पत्ति अटैच की। उसके भांजे व कुछ अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की गई। एसीबी ने कटारा के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति जुटाने की एफआईआर दर्ज की है। मामले में एसओजी कटारा सहित करीब 65 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मुख्य आरोपी सुरेश ढाका फरार है। एसओजी की ओर से जून में चालान पेश करने के बाद राज्य सरकार ने अगस्त में कटारा को बर्खास्त करने के लिए रेफरेंस राज्यपाल को भेजा। राज्यपाल के यहां से रेफरेंस राष्ट्रपति को भेजने की प्रक्रिया की गई। हालांकि आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
बर्खास्त करने की यह रहती है प्रक्रिया
राज्य सरकार राज्यपाल के माध्यम से रेफरेंस बनाकर राष्ट्रपति को भेजती है। राष्ट्रपति उसे सुप्रीम कोर्ट के जज को भेजते हैं। जज के रिकमंड के बाद आरपीएससी सदस्य को हटाने के आदेश जारी होते हैं।
इस तरह हुई कटारा के खिलाफ कार्रवाई
कटारा एसओजी में गिरफ्तारी 18 अप्रेल
एसओजी ने कटारा के खिलाफ 15 जून को पेश किया चालान
ईडी ने मामला दर्ज कर 18 अगस्त को की सम्पत्ति अटैच
कटारा की बर्खास्तगी के लिए अगस्त में राज्यपाल को भेजा रेफरेंस
कटारा के खिलाफ एसीबी ने ३० अगस्त को दर्ज किया केस