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संतान से पहले आर्थिक सुरक्षा चाहती है आज की युवा पीढ़ी

पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और कनाडा में 35-39 वर्ष के लगभग आधे से कम युवाओं का नि:संतान होना चिंता का विषय है, जबकि अफ्रीकी देशों में यह प्रवृत्ति कम है।
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जयपुर

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Opinion Desk

Jul 11, 2026

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डॉ. विवेक एस. अग्रवाल, (सामाजिक सरोकारों से जुड़े मामलों के जानकार)

आज का युवा परिवार निर्माण से पहले आर्थिक सुरक्षा, फिटनेस और बेहतर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है। वह परिवार चाहता है, लेकिन अनुकूल आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों में ही। इसी कारण प्रजनन दर में लगातार गिरावट भविष्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की दो-तिहाई से अधिक आबादी ऐसे देशों में रहती है, जहां प्रति महिला प्रजनन दर 2.1 से कम है।

युवाओं में विवाह, मातृत्व-पितृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता प्रजनन दर में गिरावट का प्रमुख कारण मानी जा रही है। यह केवल जिम्मेदारियों से बचने का संकेत नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और आर्थिक चुनौतियों का परिणाम भी है। इसी संदर्भ में इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम 'युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करना-आज और भविष्य के लिए' रखी गई है। हालांकि जन्म दर अभी भी कई क्षेत्रों में उच्च बनी हुई है। 73 देशों में हुए सर्वेक्षण में 18-39 वर्ष के लगभग 90 फीसदी युवाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता, बेहतर स्वास्थ्य और फिटनेस को प्रमुख प्राथमिकता बताया। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सीमित रोजगार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और गंभीर बीमारियों ने आर्थिक व स्वास्थ्य सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है। इसलिए युवा परिवार से पहले स्वयं को सुरक्षित और सक्षम बनाना चाहता है। सर्वेक्षण के अनुसार, 88 फीसदी युवा बच्चा पैदा करने से पहले वित्तीय सुरक्षा, 87 फीसदी स्थिर नौकरी और 85 फीसदी भावनात्मक मजबूती को आवश्यक मानते हैं। इन पहलुओं को महिलाएं अधिक महत्त्व देती हैं और कई देशों में सुरक्षा व निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी की चुनौतियों से जूझ रही हैं। पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और कनाडा में 35-39 वर्ष के लगभग आधे से कम युवाओं का नि:संतान होना चिंता का विषय है, जबकि अफ्रीकी देशों में यह प्रवृत्ति कम है।

भारत में पश्चिमी जीवनशैली का बढ़ता प्रभाव देखते हुए, बच्चों के प्रति इस बदलते रुझान का असर भारतीय युवाओं पर भी पडऩे की आशंका है। सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव के कारण यह प्रवृत्ति केवल शहरों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि गांवों तक भी तेजी से पहुंच रही है। वहीं, बिना बच्चों वाले दो-तिहाई से अधिक युवा भविष्य में संतान चाहते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि नि:संतानता के पीछे केवल इच्छा नहीं, बल्कि परिस्थितियां भी महत्त्वपूर्ण कारण हैं। वैश्विक स्तर पर बच्चों की संख्या को लेकर स्पष्ट भौगोलिक अंतर दिखाई देता है। अफ्रीकी देशों में प्रति महिला औसतन चार बच्चे हैं, जबकि संपन्न देशों के लगभग तीन-चौथाई युवा दो या उससे कम बच्चे चाहते हैं। विश्व स्तर पर अधिकांश युवा दो बच्चों, जबकि लगभग 20 फीसदी एक या कोई बच्चा नहीं चाहते।

ऐसे में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए प्रजनन दर में लगातार हो रही गिरावट पर रोक लगाना आवश्यक है। युवाओं की धारणाओं को बदलने के लिए सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक उदाहरण आवश्यक हैं। अध्ययनों के अनुसार, बच्चों का होना स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण के लिए भी लाभकारी हो सकता है। इसलिए स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और परिवार निर्माण के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, ताकि आर्थिक स्थिरता की दौड़ में परिवार पीछे न छूट जाए।