
जयपुर . सिविल लाइन्स में मुख्यमंत्री आवास के पास सरकारी जमीन को खुर्द—बुर्द कर फर्जी तरीके से पट्टा जारी करने के मामला गरमा गया है। जेडीए ने मान लिया है कि 949 वर्गगज बेशकीमती जमीन का गलत तरीके से पट्टा जारी हुआ, जिसे निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह मैसर्स अम्बिका ट्रेडिंग कंपनी के नाम जारी किया। जमीन भी सीएम आवास से 50 मीटर दूर ही है। गांधी नगर थाने में तत्कालीन जेडीए जोन उपायुक्त (आरएएस अधिकारी) पंकज ओझा व अन्य के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज के जरिए धोखाधड़ी से सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का मामला दर्ज हुआ है। महाराजा सवाई मानसिंह वेलफेयर सोसायटी के उपाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह शेखावत ने कोर्ट इस्तगासे से यह रिपोर्ट दी है।
रिपोर्ट में बताया
मामला मुख्यमंत्री निवास के सामने स्थित सरकारी जमीन को निजी खातेदारी में दर्ज करने से जुड़ा है। पंकज ओझा उस समय जेडीए में सम्बन्धित जोन उपायुक्त थे। कोर्ट के आदेश के बाद 1991 में जमीन जेडीए यानी सरकार की सम्पत्ति हो गई थी। 2013 में प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान जेडीए के तत्कालीन जोन आयुक्त पंकज ओझा व अन्य ने सरकारी रिकार्ड की जांच किए बिना कूटरचित दस्तावेज से उक्त भूमि को सोसायटी की मानते हुए निजी खातेदार अम्बिका ट्रेडिंग कंपनी के नाम पट्टा जारी कर दिया। इससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई। तत्कालीन जेडीए सचिव, जोन प्रथम तहसीलदार, टाऊन प्लानर की भी मामले में मिलीभगत बताया है।
सीलिंग एक्ट में सरकारी हुई
जेडीए अधिकारियों के मुताबिक सीलिंग एक्ट के तहत भूमि सरकार ने ले ली। 1500 वर्गमीटर देना का प्रावधान था, मामले में यह प्रभावी नहीं है। गलत तरीके से पट्टा जारी करने की शिकायत आई। अतिरिक्त आयुक्त ओ.पी. बुनकर की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने माना कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में सरकारी जमीन पर पट्टा दिया गया, सीमा भी अधिकतम 300 वर्गमीटर निर्धारित की थी। मामले में 949 वर्गगज भूमि का पट्टा जारी कर दिया। जानकारी लोकायुक्तको भेजी है।
एक भी दस्तावेज नहीं, शपथ पत्र पर दे दिया पट्टा
आवेदनकर्ता ने एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं लगाया गया, जो पट्टा लेने के लिए आवश्यक है। बल्कि, शपथ पत्र के आधार पर ही पट्टा जारी कर दिया गया। कागजों में उस वक्त भी भूमि सरकारी ही थी।
जेडीसी वैभव गालरिया ने बताया कि पट्टा गलत तरीके से जारी हुआ है। इसे निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सिविल कोर्ट से निरस्त होगा। जिम्मेदार उपायुक्त के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को लिख रहे है।