
प्रकृति की दुनिया में तितलियों की उड़ान और चींटियों की जिद
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता— 102
बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 28 अक्टूबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
भाई-बहन और जादुई बगीचा
दक्ष चौधरी, 8 वर्ष
एक सुनहरी सुबह थी, आकाश में मुस्कुराता हुआ सूरज चमक रहा था और चारों ओर हरियाली छाई हुई थी। दोनों भाई—बहन दक्ष और जयश्वि अपने घर के पीछे वाले बगीचे में हाथ में मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर पहुंचे। उन्हें प्रकृति के छोटे-छोटे जीवों के बारे में जानना बहुत पसंद था। जैसे ही वे घास के करीब बैठे, उन्हें वहां एक रंग-बिरंगी दुनिया नजर आई। दक्ष ने लेंस से देखा तो घास के पत्तों पर एक प्यारी सी लाल और काले धब्बों वाली लेडीबग बैठी थी, जो मुस्कुरा रही थी। दूसरी ओर जयश्वि ने अपनी लेंस से एक लंबी सी इल्ली को धीरे-धीरे चलते हुए देखा, जो उन्हें देखकर बहुत खुश लग रही थी। आसमान में सुंदर तितलियाँ और नन्हीं मधुमक्खियाँ फूलों के आसपास मंडरा रही थीं, मानो वे दक्ष और जयश्वि का स्वागत कर रही हों। बगीचे के छोटे-छोटे जीव भी इन बच्चों से बिल्कुल नहीं डर रहे थे, क्योंकि वे सभी उनके पक्के दोस्त बन चुके थे।
दोनों भाई बहन घंटों उस हरी-भरी घास के बीच बैठकर उन नन्हे जीवों की हरकतों को देखा और बहुत कुछ सीखा। सूरज की मीठी धूप में बच्चों की हँसी और प्रकृति का यह अनोखा मेल देखकर ऐसा लग रहा था मानो पूरा बगीचा उनके साथ झूम रहा हो।
सुंदर तितली और लेडीबर्ड
एलिजा चौहान, 8 वर्ष
एक दिन सुबह राहुल और एलिज़ा अपने बगीचे में खेलने गए। दोनों के हाथों में आवर्धक काँच थे। वे बगीचे में नई-नई चीज़ें खोजने के लिए बहुत उत्साहित थे। अचानक एलिज़ा को एक सुंदर रंग-बिरंगी तितली दिखाई दी। वह फूलों पर बैठकर रस पी रही थी। पास में एक मधुमक्खी भी भिनभिनाते हुए उड़ रही थी। दोनों बच्चे उन्हें देखकर बहुत खुश हुए। थोड़ी देर बाद राहुल को घास में एक लाल रंग की लेडीबर्ड दिखाई दी, जिसके शरीर पर काले धब्बे थे। पास ही एक लंबी इल्ली पत्ते पर रेंग रही थी। एलिज़ा ने कहा, “शायद यह बड़ी होकर सुंदर तितली बनेगी!” फिर उन्होंने एक चींटी को देखा, जो अपने से बड़ा भोजन का टुकड़ा उठाकर ले जा रही थी। राहुल बोला, “चींटियाँ कितनी मेहनती होती हैं! हमें भी मेहनत करनी चाहिए।” दोनों ने बगीचे में टिड्डे, फूल और कई छोटे जीव देखे। उन्होंने किसी भी कीड़े को परेशान नहीं किया और पौधों को पानी भी दिया। शाम को उन्होंने अपनी खोज के बारे में मम्मी-पापा को बताया। सबने उनकी खूब प्रशंसा की। उस दिन दोनों ने सीखा कि प्रकृति बहुत सुंदर है और हर जीव का अपना महत्त्व है।
नन्हे वैज्ञानिकों की खोज
ख्याति पवार, 11 वर्ष
एक दिन रोहन और उसकी बहन रिया बगीचे में खेलने गए। सूरज चमक रहा था, रंग-बिरंगी तितलियां उड़ रही थीं और फूल खिले हुए थे। तभी रिया को घास में कुछ रेंगता हुआ दिखा। उसने कहा, "देखो, कितने सारे छोटे-छोटे कीड़े!" रोहन तुरंत घर से दो मैग्नीफाइंग ग्लास ले आया। दोनों घास में बैठ गए। कांच से देखने पर उन्हें एक नई दुनिया दिखी। एक लाल लेडीबग पत्ते पर आराम कर रही थी, एक गुलाबी कीड़ा मुस्कुरा रहा था, और एक रंगीन इल्लियाँ फूल पर बैठी थी। नीचे एक टिड्डा और एक छोटी मक्खी भी थी। ऊपर दो मधुमक्खियाँ भिन-भिन कर रही थीं। रिया बोली, "ये तो हमारे जैसे ही हैं, इनका भी अपना घर है।" रोहन ने कहा, "हाँ, हमें इनकी दुनिया को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।" दोनों ने तय किया कि वे बगीचे के कीड़ों पर एक डायरी बनाएंगे। वे रोज़ आते, उन्हें ध्यान से देखते और चित्र बनाते। उस दिन उन्होंने सीखा कि बड़ी खुशी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं। जिज्ञासा और प्यार भरी नजर से देखो तो घास का छोटा-सा कोना भी एक बड़ा जादुई संसार बन जाता है।
जादुई बगीचे की सैर
भूमिका राव, 7 वर्ष
एक सुनहरी सुबह रोहन और रिया अपने हाथों में मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर प्यारे से बगीचे में पहुँचे। सूरज मुस्कुरा रहा था और चारों तरफ हरियाली थी। उन्होंने लेंस से घास के पास देखा, तो एक सुंदर लेडीबग, एक प्यारी इल्ली और नन्हें टिड्डे उन्हें देखकर मुस्कुराते नजर आए। तितलियाँ और भंवरे उनके आस-पास गुनगुनाने लगे। प्रकृति के इस छोटे से जादुई संसार को देखकर दोनों भाई-बहन बहुत खुश हुए और उन्होंने प्रकृति के इस अनोखे रूप का पूरा आनंद लिया।
गुनगुनी धूप और कीड़े
रियांशी सुमन, 9 साल
रोहन और रिया की इस जादुई खोज में अब और भी मज़ा आने लगा था। दोपहर की गुनगुनी धूप में पूरा बगीचा चहक रहा था। "रिया, यहाँ देखो!" रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा। उसने अपना लेंस एक बड़ी सी हरी पत्ती की तरफ घुमाया, जहाँ एक नन्हीं सी लाल लेडीबग बैठी हुई थी। "यह कितनी सुंदर है! इसके ऊपर काले-काले डॉट्स तो देखो।" रिया ने भी अपना मैग्निफाइंग ग्लास आगे बढ़ाया और एक नारंगी फूल पर आराम कर रहे मुस्कुराते हुए कैटरपिलर (इल्ली) को करीब से देखने लगी। "रोहन, यह देखो! इसके कितने सारे छोटे-छोटे पैर हैं, और यह कैसे धीरे-धीरे पत्ती चबा रहा है!" रिया की आँखों में अचरज और खुशी साफ दिख रही थी।
तभी उनके पास से गुनगुनाती हुई एक मधुमक्खी गुज़री, जो पास ही के पीले फूल से रस इकट्ठा करने में जुटी थी। आसमान में एक रंग-बिरंगी तितली भी उनके ऊपर से उड़ती हुई मानो उन्हें हैलो कह रही थी। ज़मीन पर रेंगती छोटी चींटियाँ और पत्तों के बीच से झाँकता एक नन्हा टिड्डा, सब मिलकर इस बगीचे को एक छोटी सी जादुई नगरी बना रहे थे। सूरज दादा आसमान से मुस्कुराते हुए इन दोनों छोटे वैज्ञानिकों को देख रहे थे। रोहन और रिया को समझ आ गया था कि प्रकृति का हर एक जीव, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खास और ज़रूरी है। दोनों ने तय किया कि वे हर रोज़ इसी तरह प्रकृति के नए-नए दोस्तों से मिलने आएँगे। शाम होने को आई थी, और दोनों बच्चे आज के इस अनोखे सफर की ढेरों कहानियों के साथ खुशी-खुशी अपने घर की ओर चल पड़े।
लाल-काली लेडीबर्ड
राघव गौड़, 12 वर्ष
एक सुनहरी सुबह राहुल और राधा अपने बगीचे में खेलने निकले। सूरज मुस्कुरा रहा था, फूल महक रहे थे और रंग-बिरंगी तितलियाँ हवा में उड़ रही थीं। दोनों अपने आवर्धक लेंस लेकर प्रकृति के रहस्यों को खोजने लगे।
अचानक राहुल ने एक पत्ते पर बैठी लाल-काली लेडीबर्ड देखी। “वाह! प्रकृति ने इसे कितने सुंदर रंग दिए हैं!” वह खुशी से बोला। तभी राधा की नजर एक छोटी-सी इल्ली पर पड़ी। दोनों उसे ध्यान से देखने लगे और सोचने लगे कि एक दिन यही इल्ली सुंदर तितली बन जाएगी। आगे उन्हें मधुमक्खियाँ फूलों से रस इकट्ठा करती दिखाई दीं। पास ही चींटियाँ मिलकर भोजन का एक टुकड़ा अपने घर ले जा रही थीं। राहुल ने कहा, “देखो राधा, ये छोटे जीव भी मिल-जुलकर कितना बड़ा काम करते हैं!” तभी उन्हें घास में एक घायल तितली दिखाई दी। उसके पंख गीले थे और वह उड़ नहीं पा रही थी। दोनों ने उसे सावधानी से एक सूखे पत्ते पर बैठाया और पास में फूल रख दिए। कुछ देर बाद सूरज की गर्मी से उसके पंख सूख गए। तितली ने पंख फैलाए और आसमान की ओर उड़ गई। यह देखकर दोनों खुशी से उछल पड़े। उन्होंने बगीचे में पौधों को पानी दिया और कूड़ा उठाकर कूड़ेदान में डाला। फिर उन्होंने अपने दोस्तों को भी प्रकृति बचाने का संदेश दिया। उस दिन राहुल और राधा समझ गए कि सच्चा वैज्ञानिक वही है, जो प्रकृति के रहस्यों को जानने के साथ उसकी रक्षा भी करता है।
छोटे जीवों की अनोखी दुनिया
चित्रांशु शर्मा, 11 वर्ष
एक दिन राहुल और रीमा अपने घर के पास वाले सुंदर बगीचे में खेलने गए। वहां चारों तरफ हरी-हरी घास मखमली कालीन की तरह बिछी हुई थी। रंग-बिरंगे फूल खिले थे, जिन पर रंगीन तितलियां और सुनहरी मधुमक्खियां खुशी से मंडरा रही थीं। आसमान में चमकता हुआ सूरज भी उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा था।
दोनों बच्चों के पास एक-एक जादुई आवर्धन लेंस था। वे ज़मीन पर बैठकर घास के बीच छिपे छोटे-छोटे जीवों को गौर से देखने लगे। लेंस के ज़रिए उन्हें एक नन्हीं लेडीबग और फूलों पर मटकती हुई कैटरपिलर बहुत बड़ी और साफ़ दिखाई दी। वे इन छोटे जीवों की अनोखी दुनिया और उनकी बनावट को देखकर बेहद हैरान और रोमांचित थे। दोनों समझ गए कि ये नन्हें जीव भी हमारी तरह इस धरती का एक ज़रूरी हिस्सा हैं।
जादुई लेंस और रहस्यमयी बगीचा
कुंदन राज, 11 वर्ष
रोहन और रिया दोनों भाई-बहन थे, जिन्हें प्रकृति और नई-नई खोजें करने का बहुत शौक था। एक दिन उन्हें अपने दादाजी के पुराने बक्से से दो अनोखे आवर्धक लेंस (मैग्नीफाइंग ग्लास) मिले। वे दोनों उन लेंसों को लेकर अपने घर के पीछे बने घने बगीचे में निकल पड़े। जैसे ही उन्होंने उन लेंसों को अपनी आँखों के सामने लगाया, उनकी दुनिया ही बदल गई। लेंस के पीछे से देखने पर बगीचे की हर चीज़ सामान्य से बिल्कुल अलग और जादुई दिखने लगी। घास के मैदान में रेंगने वाले छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े अब बड़े और रंग-बिरंगे जीवों की तरह बात करते हुए प्रतीत हो रहे थे। एक छोटी सी चींटी उनके सामने आकर मुस्कुराई और आगे बढ़ने का इशारा करने लगी। दोनों बच्चे उत्सुकता से उसके पीछे-पीछे चलने लगे। आगे जाकर उन्होंने देखा कि एक प्यारी सी लेडीबग (चित्र-विचित्र कीड़ा) और एक छोटा घोंघा (स्नेल) फूलों के बीच किसी गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। आसमान में चमकीला सूरज मुस्कुरा रहा था और तितलियाँ संगीत की धुन पर नाच रही थीं। तभी रोहन की नज़र एक सुनहरी मधुमक्खी पर पड़ी, जो एक चमकीले लाल फूल के पास फंसी हुई थी।
रोहन और रिया ने बिना डरे अपनी सूझबूझ से उस मधुमक्खी को आज़ाद कराया। आज़ाद होते ही मधुमक्खी ने उन्हें धन्यवाद दिया और बगीचे के सबसे खूबसूरत हिस्से का रास्ता दिखाया। उस दिन रोहन और रिया को समझ आया कि हमारी प्रकृति में कितनी अद्भुत और जादुई दुनिया छिपी है, बस उसे एक नए नज़रिए से देखने की ज़रूरत है।
बगीचे के नन्हे दोस्त
विहान शर्मा, 10 वर्ष
एक दिन बगीचे में सभी कीड़े-मकोड़े इकट्ठा होकर खेल रहे थे। तितली और मधुमक्खी हवा में उड़ रही थीं, जबकि टिड्डा और चींटी घास में दौड़ लगा रहे थे। तभी वहाँ दो बच्चे आए। पहले तो नन्हे कीड़े डर गए कि कहीं बच्चे उन्हें नुकसान न पहुँचाएँ। लेकिन बच्चों ने प्यार से हाथ में शीशा लेकर उन्हें सिर्फ मुस्कुराते हुए देखा। बच्चे किसी को छू भी नहीं रहे थे, बस उनकी सुंदरता की तारीफ कर रहे थे। यह देखकर लेडीबग और इल्ली ने भी मुस्कुराकर बच्चों का स्वागत किया। उस दिन कीड़ों और बच्चों के बीच एक अनोखी दोस्ती हो गई।
प्रकृति की पाठशाला
सहज मिढ़ा, 7 वर्ष
एक सुहानी और चमकीली सुबह थी। आसमान में सूरज मुस्कुरा रहा था और चारों तरफ हरियाली छाई हुई थी। दो पक्के दोस्त, अवि और जैकलीन, अपने घर के पास वाले एक खूबसूरत बगीचे में सैर करने आए थे।
वह बगीचा रंग-बिरंगे फूलों से भरा हुआ था, जिन पर प्यारी-प्यारी तितलियाँ और भँवरे मंडरा रहे थे। अवि और जैकलीन दोनों ही बहुत जिज्ञासु बच्चे थे। उन्हें प्रकृति के इस अनूठे संसार को करीब से देखना और समझना बहुत पसंद था। आज वे दोनों अपने साथ एक खास मैग्नीफाइंग ग्लास (आवर्धक लेंस) लेकर आए थे, ताकि वे घास और फूलों में छिपे छोटे-छोटे जीवों के रहस्यों का पता लगा सकें। दोनों बच्चे हरी-भहरी घास पर घुटनों के बल बैठ गए और अपनी खोजबीन शुरू कर दी— अवि ने अपने लेंस से ज़मीन पर रेंगते हुए एक प्यारे से लाल भौंरे (लेडीबग) को देखा, जिसकी पीठ पर बहुत सुंदर काले धब्बे बने थे। वहीं पास में बैठी जैकलीन ने अपनी लेंस से एक रंग-बिरंगी इल्ली (कैटरपिलर) को देखा, जो फूल की पंखुड़ी पर बड़े मजे से आगे बढ़ रही थी।
उनके आस-पास कुछ नन्हे टिड्डे और एक छोटी सी मधुमक्खी भी उड़ रहे थे, मानो वे भी अवि और जैकलीन के इस मजेदार खेल को देखकर खुश हो रहे हों। सूरज की सुनहरी धूप में चमकते हुए प्रकृति के इस छोटे से संसार को देखकर अवि और जैकलीन का मन आनंद से भर गया। उन्हें यह समझ आ गया कि हमारी दुनिया में हर एक छोटा जीव कितना महत्वपूर्ण और अनोखा है।
Updated on:
4 Nov 2026, 4:30 PM IST
Published on:
4 Nov 2026, 4:30 PM IST
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