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आराम कुर्सी पर किताबों का शौक और टॉमी की उदासी

कहानियां सुनना जितना मजेदार है, उससे कहीं ज्यादा मजेदार है उन्हें अपनी कल्पना से सुनाना। 14 अक्टूबर के 'परिवार परिशिष्ट' में बच्चों को चित्र देखकर कहानी लिखने का मौका दिया गया, जिसमें देशभर से कई शानदार कहानियां मिलीं। चुनिंदा कहानियां अखबार में छापी गई हैं और बाकी कहानियाँ यहाँ साझा की जा रही हैं। हमारा उद्देश्य यही है कि बच्चे अपनी सोच और लिखने की आदत को हमेशा आगे बढ़ाते रहें।
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जयपुर

•

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Tasneem Khan

•

Oct 21, 2026

आराम कुर्सी पर किताबों का शौक और टॉमी की उदासी

आराम कुर्सी पर किताबों का शौक और टॉमी की उदासी

चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता— 100

बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 14 अक्टूबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।

सच्चा दोस्त
पल्लवी, 10 वर्ष
एक दिन की बात है। राहुल नाम का एक लड़का अपने घर में आरामकुर्सी पर लेटकर किताब पढ़ रहा था। उसके पास एक प्यारा-सा कुत्ता भी था, जिसका नाम मोती था। मोती हमेशा राहुल के साथ रहता था। राहुल को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन वह अपने आसपास की चीजों पर कम ध्यान देता था। एक दिन उसकी माँ ने उसे बाजार से कुछ सामान लाने के लिए कहा। राहुल ने किताब बंद की और बाजार जाने के लिए तैयार हो गया। मोती भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। रास्ते में राहुल ने देखा कि एक छोटा-सा पिल्ला नाली के पास फँसा हुआ था। वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था। राहुल उसे देखकर रुक गया, पर उसे समझ नहीं आया कि क्या करे। तभी मोती तेजी से पिल्ले के पास गया और जोर-जोर से भौंकने लगा। उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग वहाँ आ गए। राहुल ने एक व्यक्ति की मदद से पिल्ले को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पिल्ला बाहर आते ही खुशी से अपनी पूँछ हिलाने लगा। राहुल ने उसे पानी पिलाया और उसके लिए खाने का इंतजाम किया। उस दिन राहुल को समझ आया कि सच्ची समझदारी केवल किताबें पढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को समझने और उनकी मदद करने में भी है। उसने मोती को प्यार से गले लगाया और कहा, "तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो। आज तुमने मुझे इंसानियत का असली अर्थ सिखा दिया।" उस दिन से राहुल ने निश्चय किया कि वह पढ़ाई के साथ-साथ जानवरों और जरूरतमंद लोगों की मदद भी करेगा।

रहस्य से भरा दिन
तन्मयी मेहता, 11 वर्ष
एक शाम विवान अपने सोफ़े पर आराम से लेटकर एक पुरानी कहानी की किताब पढ़ रहा था। उसका कुत्ता शेरू पास में बैठा था। किताब में एक ऐसे पुराने घर का वर्णन था, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ एक अनमोल रहस्य छिपा है।
विवान जैसे-जैसे पन्ने पलटता गया, कहानी और रोचक होती गई। तभी शेरू अचानक उठा और सोफ़े के नीचे रखे एक पुराने डिब्बे को सूँघने लगा। वह बार-बार विवान की ओर देखकर भौंकता, मानो उसे कुछ दिखाना चाहता हो। विवान ने किताब बंद की और डिब्बा बाहर निकाला। उसके भीतर एक पीला पड़ा लिफ़ाफ़ा था। लिफ़ाफ़े पर लिखा था, “जो इस पुस्तक को ध्यान से पढ़ेगा, वही इस रहस्य को समझ पाएगा।” विवान हैरान रह गया। उसने किताब के पन्ने फिर से पलटे। आख़िरी पन्ने पर एक छोटी-सी पहेली लिखी थी। बहुत सोचने के बाद उसे उत्तर मिल गया—रहस्य किसी ख़ज़ाने का नहीं, बल्कि उसके दादाजी की पुरानी डायरी का था, जिसमें परिवार की भूली-बिसरी यादें लिखी थीं। डायरी पढ़ते-पढ़ते विवान को पता चला कि उसके दादाजी ने बचपन में इसी तरह किताबें पढ़ने का सपना देखा था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे।
अगले दिन विवान ने डायरी दादाजी को दिखाई। उनकी आँखों में खुशी चमक उठी। विवान समझ गया कि कभी-कभी सबसे बड़ा रहस्य किसी संदूक में नहीं, बल्कि अपने परिवार की यादों में छिपा होता है। हर पुरानी चीज़ में एक कहानी होती है; ज़रूरत होती है उसे खोजने वाली नज़र की।

किताब की अनोखी दुनिया
गुनगुन राजपूत, 13 वर्ष
एक दिन आरव अपने घर के मजबूत और आरामदायक सोफ़ा पर बैठकर अपनी पसंदीदा कहानी की किताब पढ़ रहा था। उसे किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। जब भी वह कोई किताब खोलता, उसे लगता जैसे वह एक नई ही काल्पनिक दुनिया में पहुँच गया हो। आरव कहानी में इतना खो गया कि उसने पास में रखी पानी की बोतल पर ध्यान ही नहीं दिया। बोतल से पानी थोड़ा-थोड़ा रिसकर नीचे ज़मीन पर गिरने लगा था। सोफ़ा के पास ही आरव का प्यारा पालतू कुत्ता 'मोती' बैठा हुआ था। मोती बहुत ही समझदार कुत्ता था। जब उसने देखा कि पानी गिर रहा है और आरव किताब पढ़ने में व्यस्त है, तो उसने आरव का ध्यान खींचना चाहा। मोती ने धीरे से आवाज़ निकाली और अपने पंजे से आरव का पैर छुआ। आरव ने जैसे ही नीचे देखा, उसे मोती की समझदारी पर बहुत प्यार आया। उसने तुरंत किताब साइड में रखी और बोतल को सीधा करके पानी साफ़ किया।
आरव ने मोती को गले लगाया और उसे शाबाशी दी। उसके बाद दोनों फिर से एक साथ सोफ़ा के पास बैठ गए। इस घटना ने आरव को सिखाया कि किताबों की दुनिया में खोना बहुत अच्छी बात है, लेकिन अपने आस-पास की चीज़ों पर भी ध्यान देना ज़रूरी होता है।

बाहर खेलने का दबाव
प्रतीक देवड़ा, 11 वर्ष
अजय अपने पसंदीदा सोफे पर लेट कर कॉमिक पढ़ रहा था तभी उसके माता-पिता ने कहा की कॉमिक्स पढ़ने से अच्छा तुम टॉमी के साथ खेलो देखो में तुम्हारे कहने पर मैं यह डॉगी लाई हूं तुम इसके साथ क्यों नहीं खेलते हो कॉमिक पढ़ने से अच्छा तुम इसके साथ बाहर गार्डन में खेलो और यह क्या तुम फिर से कोल्ड ड्रिंक पीने लग गए। अजय— मम्मी अब मैं नहीं पियूंगा मुझे पढ़ने दो। मम्मी— नहीं और कॉमिक मत पढ़ो इससे अच्छा बाहर जाकर खेल लो और टॉमी को खाना खिला दो और कोल्ड ड्रिंक की बोतल डस्टबिन में डाल दो। टॉमी बहुत उदास है तुम उसके साथ खेलो और उसको बाहर घूमने ले जाओ कॉमिक का फटाफट रख दो और टॉमी के साथ बाहर जाकर खेलो।

किताब और वफादार दोस्त
एकांश शर्मा, 8 वर्ष
राजू को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वह सारा दिन सोफे पर लेटा-लेटा किताब पढ़ता रहता था। उसके घर में मोती नाम का एक प्यारा कुत्ता था। मोती राजू से बहुत प्यार करता था। एक दिन राजू सोफे पर पैर ऊपर करके किताब पढ़ने में मगन था। नीचे जमीन पर मोती भूखा-प्यासा उदास लेटा हुआ था। उसकी थाली खाली पड़ी थी। पास में रखी दूध की बोतल से दूध की बूंद-बूंद नीचे गिर रही थी, पर मोती तक नहीं पहुँच पा रही थी। राजू को तो कुछ दिख ही नहीं रहा था, वह तो किताब में खोया था। तभी मोती ने धीरे से भौं-भौं किया। राजू का ध्यान टूटा। उसने नीचे देखा। मोती की उदास आँखें देखकर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। राजू तुरंत उठा। उसने मोती की थाली में दूध और रोटी डाली। मोती खुश होकर पूँछ हिलाने लगा और जल्दी-जल्दी खाने लगा। उस दिन राजू ने सीखा कि किताबें पढ़ना अच्छी बात है, लेकिन अपने पालतू जानवर और अपनी जिम्मेदारी का ध्यान रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

मस्ती की पाठशाला
स्नेहा आशीष मैथ्यू, 7 वर्ष
एक दिन चिंटू आरामकुर्सी पर लेटकर मजे से कहानी की किताब पढ़ रहा था। उसके पैर कुर्सी पर फैले थे और पास में उसका प्यारा कुत्ता मोती उदास होकर बैठा था। कमरे में पानी की बोतल और चप्पल भी बिखरी पड़ी थीं। मोती ने चिंटू की ओर देखा, मानो कह रहा हो, “काश! तुम थोड़ी देर मेरे साथ भी खेल लेते।” लेकिन चिंटू किताब में इतना खोया था कि उसे मोती की उदासी दिखाई ही नहीं दी। कुछ देर बाद चिंटू ने किताब बंद की। तभी उसकी नजर मोती पर पड़ी। उसकी आँखों में उदासी देखकर चिंटू को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तुरंत कुर्सी से उतरा, मोती को गले लगाया और उसके साथ खेलने लगा।
मोती खुशी से पूँछ हिलाने लगा। उसकी खुशी देखकर चिंटू भी खिलखिला उठा। उस दिन चिंटू ने सीखा कि किताबें ज्ञान देती हैं, लेकिन अपनों के साथ बिताए पल दिल को खुशी देते हैं।

किताब से बड़ा दोस्त
अनमोल साहू, 9 वर्ष
अमन को किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। एक दिन मम्मी बोली, "अमन, मैं बाज़ार जा रही हूँ, मोती को दूध दे देना।" और चली गई। अमन सोफे पर लेट कर किताब पढ़ने लगा। पढ़ते-पढ़ते वह कहानी में खो गया। नीचे ज़मीन पर मोती भूखा बैठा था। सामने खाली बोतल और प्लेट पड़ी थी। मोती बार-बार अमन को देख रहा था, पर अमन ने ध्यान ही नहीं दिया। शाम को मम्मी आई। मोती को उदास देखा तो बोली, "अमन, तुमने मोती को खाना नहीं दिया?" अमन चौंक गया। उसे अपनी गलती समझ आई। उसने तुरंत मोती को दूध पिलाया और रोटी खिलाई। मोती खुश हो कर पूँछ हिलाने लगा। अमन ने उसे प्यार से गले लगा लिया। अमन बोला, "माफ़ कर दे मोती, किताब से बड़ा मेरा दोस्त है।" उस दिन से अमन ने वादा किया, पहले मोती का ख्याल, फिर किताब।

रोहन और उसकी जादुई किताब
शिवांश शर्मा, 11 वर्ष
​रोहन अपनी पुरानी, आरामदायक लाल आर्मचेयर की गोद में दुबका हुआ था। खिड़की के बाहर रिमझिम बारिश हो रही थी, जिसने घर के अंदर के माहौल को और भी शांत और आरामदायक बना दिया था। मेज पर रखी दवा की बोतल और चम्मच इस बात का सबूत थे कि रोहन अभी-अभी तेज़ बुखार से उबरा है। उसकी माँ ने उसे डाँट-डपटकर आराम करने के लिए कहा था।
​लेकिन रोहन का मन तो कहीं और ही था। वह उस पत्रिका में पूरी तरह खोया हुआ था जिसमें बच्चों द्वारा लिखी गई कहानियाँ छपी थीं। उसके पैरों के पास बैठा उसका कुत्ता, शेरू, बड़ी बेताबी से इंतज़ार कर रहा था कि कब उसका मालिक 'किताबी दुनिया' से बाहर आएगा और उसके साथ खेलेगा। ​रोहन एक ऐसी कहानी पढ़ रहा था जिसमें एक जादुई जंगल में एक वीर लड़का और उसका वफादार शेर एक शापित राजकुमारी को बचाने के लिए एक खतरनाक सफ़र पर निकलते हैं। पढ़ते-पढ़ते रोहन की कल्पना पंख फैलाने लगी। उसे महसूस हुआ कि उसकी आर्मचेयर एक सोने के सिंहासन में बदल गई है और शेरू एक विशाल, सुनहरे बालों वाला शेर बन गया है! तभी कहानी के पन्नों से एक भयानक ड्रैगन की दहाड़ गूँजी! रोहन चौंक गया। उसने देखा कि शेरू एक असली शेर की तरह गुर्रा रहा था और अपनी पूंछ फटकार रहा था। "क्या यह सच है?" रोहन ने सोचा। ​तभी उसकी माँ की आवाज़ गूँजी, "रोहन! दूध पीने का समय हो गया।" ​रोहन पलक झपकते ही अपनी 'किताबी दुनिया' से बाहर आ गया। शेरू ने उसे देखकर अपनी पूंछ हिलाई और "भौंह-भौंह" किया। रोहन ने फिर से पत्रिका के नीचे लिखी लाइनों को पढ़ा, "…कहानियाँ सराहनीय रहीं, उन्हें पढ़ने के लिए स्कैन करें…"। ​रोहन के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।

तितली की कहानी
प्रिंसी कुमारी, 8 वर्ष
एक दिन राहुल नाम का एक लड़का अपने घर में आराम से सोफे पर लेटकर किताब पढ़ रहा था। उसके पास एक प्यारा-सा कुत्ता भी लेटा हुआ था। कमरे में एक बोतल और जूते पड़े थे। राहुल अपनी किताब पढ़ने में व्यस्त था। तभी अचानक एक सुंदर, रंग-बिरंगी तितली उड़ती हुई कमरे में आई। उसके पंख बहुत सुंदर थे। राहुल ने जब तितली को देखा, तो वह बहुत खुश हुआ। उसने किताब एक तरफ रख दी और तितली को ध्यान से देखने लगा। तितली कभी सोफे के पास उड़ती, तो कभी खिड़की के पास जाकर बैठ जाती। राहुल उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन तितली तुरंत उड़ गई। कुत्ता भी तितली को देखकर उठ गया और उसे देखने लगा। राहुल तितली के पीछे-पीछे चलने लगा। कुछ देर बाद तितली खिड़की से बाहर बगीचे में चली गई। वहाँ बहुत सारे रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। तितली एक सुंदर फूल पर बैठ गई और उसका रस पीने लगी। राहुल ने तितली को देखकर सोचा कि तितलियाँ प्रकृति की सुंदरता बढ़ाती हैं। हमें उन्हें पकड़ना नहीं चाहिए, बल्कि उनकी रक्षा करनी चाहिए। उसने अपने बगीचे में और फूल लगाने का निश्चय किया, ताकि तितलियाँ वहाँ आ सकें। उस दिन राहुल ने सीखा कि प्रकृति और छोटे जीव-जंतुओं से प्रेम करना बहुत जरूरी है।

असली खुशी
हितांश मेहता, 14 साल
अमन को खाली समय में किताब पढ़ना बहुत पसंद था। एक दिन वह अपनी नई किताब लेकर आरामकुर्सी पर बैठ गया। उसका पालतू कुत्ता शेरू पास में ही खेल रहा था। खेलते-खेलते शेरू ने मेज पर रखी पानी की बोतल गिरा दी। पानी फर्श पर फैल गया और शेरू डरकर एक कोने में जाकर बैठ गया। अमन ने किताब से नजर उठाई तो उसे सब दिखाई दिया। पहले उसे थोड़ा गुस्सा आया, लेकिन शेरू का डरा हुआ चेहरा देखकर उसका मन बदल गया। उसने किताब बंद की और शेरू को प्यार से अपने पास बुलाया। अमन ने फर्श साफ किया और बोतल सही जगह रख दी। फिर उसने शेरू को पानी पिलाया। शेरू खुशी से उसकी गोद में आकर बैठ गया। अमन मुस्कुराते हुए बोला, “किताब मुझे बहुत कुछ सिखाती है, लेकिन आज तुमने मुझे एक और जरूरी बात सिखाई—गलती पर गुस्सा करने से ज्यादा जरूरी है उसे समझना और सुधारना।” उस दिन अमन को समझ आया कि दूसरों की मदद करने और उनकी भावनाओं को समझने में ही सच्ची खुशी है।

आलसी राजू और वफादार मोती
जितेंद्र सिंह राजपुरोहित, 10 वर्ष
राजू बहुत आलसी लड़का था। दिन भर सोफे पर लेटा-लेटा किताबें पढ़ता रहता, पर घर का कोई काम नहीं करता। एक दिन राजू सोफे पर लेटा कहानी की किताब पढ़ रहा था। नीचे उसका पालतू कुत्ता मोती भूखा-प्यासा बैठा था। पास में पानी की बोतल गिरी हुई थी, पानी बह रहा था और केले के छिलके थाली में पड़े थे। मोती ने सोचा - "मालिक को प्यास लगी होगी, बोतल गिर गई है।" वो भौंकने लगा। पर राजू ने डांटा - "चुप रहो, मुझे पढ़ने दो।" थोड़ी देर में राजू को प्यास लगी। उसने बोतल देखी तो सारा पानी फर्श पर बह चुका था। उठने लगा तो केले के छिलके पर पैर फिसला और वह धड़ाम से गिर पड़ा। मोती दौड़कर आया और राजू को उठाने लगा। राजू को अपनी गलती समझ आई। उस दिन से राजू ने आलस छोड़ दिया। वह अपना काम खुद करने लगा और मोती का भी पूरा ध्यान रखने लगा।

चिंटू की समझदारी
मीनाक्षी, 8 वर्ष
एक दिन चिंटू घर पर अकेला था। दोपहर का समय था और बाहर बहुत तेज धूप थी। चिंटू ने सोचा कि क्यों न इस खाली समय का सही उपयोग किया जाए। वह अपनी पसंदीदा कॉमिक्स की किताब लेकर हॉल में रखे लाल रंग के सोफे पर आराम से बैठ गया। चिंटू किताब पढ़ने में इतना खो गया कि उसे आस-पास की किसी चीज़ का होश ही नहीं रहा। उसका पालतू कुत्ता, टॉमी, भी सोफे के नीचे फर्श पर चुपचाप लेटकर आराम कर रहा था। तभी अचानक टॉमी की पूंछ सोफे के पास रखी पानी की बोतल से टकरा गई। बोतल फर्श पर गिर गई और सारा पानी कालीन पर फैलने लगा। टॉमी डरकर उठ खड़ा हुआ और पानी को देखने लगा। वहीं पास में एक साफ कपड़ा भी गिरा हुआ था। किताब पढ़ते-पढ़ते अचानक चिंटू का ध्यान नीचे गया। उसने देखा कि पानी फर्श पर फैल रहा है। चिंटू ने तुरंत अपनी किताब बंद की। उसने बिना गुस्सा किए प्यार से टॉमी को सहलाया और फर्श पर गिरे कपड़े को उठाया। चिंटू ने झटपट सारा पानी साफ कर दिया ताकि कोई फिसलकर गिर न जाए।

किताबों में खोया बच्चा
अक्षत सैनी, 10 साल
रविवार का दिन था। रोहन नाम का एक लड़का अपने घर के आरामदायक सोफे पर लेटकर किताब पढ़ रहा था। उसे कहानियाँ पढ़ने का बहुत शौक था। वह किताब पढ़ने में इतना मग्न था कि उसे अपने आसपास की कोई सुध नहीं थी। उसका पालतू कुत्ता मोती सोफे के नीचे उदास होकर लेटा था। सुबह से रोहन ने उसे न तो खाना दिया था और न ही उसके साथ खेलने गया था। पास में रखी दूध की बोतल भी गिरकर खाली हो गई थी, लेकिन रोहन का ध्यान उस ओर नहीं गया। कुछ देर बाद रोहन की माँ कमरे में आईं। उन्होंने देखा कि मोती भूखा-प्यासा लेटा है और रोहन किताब पढ़ने में व्यस्त है। माँ ने प्यार से कहा, “बेटा, किताबें पढ़ना अच्छी बात है, लेकिन हमें अपने आसपास की जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए। मोती भी तुम्हारे परिवार का हिस्सा है। उसे भी तुम्हारे प्यार और देखभाल की जरूरत है।” माँ की बात सुनकर रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत किताब बंद की, मोती के लिए पानी और खाना लाया और उसे प्यार से सहलाया। मोती खुशी से अपनी पूँछ हिलाने लगा। इसके बाद रोहन ने निश्चय किया कि वह पढ़ाई और मनोरंजन के साथ-साथ अपने परिवार और पालतू जानवर का भी पूरा ध्यान रखेगा। उसने अपनी दिनचर्या में सभी कामों के लिए समय निर्धारित कर लिया। उस दिन रोहन ने सीखा कि किताबें हमें ज्ञान देती हैं, लेकिन जीवन में दूसरों के प्रति प्रेम, दया और जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है।

किताब में खोया आरव और उसका प्यारा टॉमी
प्रनिका महर, 10 वर्ष
रविवार की एक आलस भरी दोपहर में दस साल का आरव अपने घर के बड़े से सोफे पर मजे से लेटा हुआ था। सोफे के कुशन पर पीठ टिकाए, पैर ऊपर उठाए वह एक रोमांचक जासूसी कहानी की किताब पढ़ने में पूरी तरह खोया हुआ था। किताब का हर पन्ना उसे एक नई रहस्यमयी दुनिया की सैर करा रहा था। आरव पढ़ाई और अपनी किताबों में इतना लीन हो जाता था कि अक्सर अपने आसपास का सब कुछ भूल जाता था। सोफे के ठीक पास फर्श पर उसकी पानी की बोतल रखी थी। अचानक उसका ध्यान भटका और गलती से बोतल से पानी छलककर नीचे फर्श पर बहने लगा। बोतल से टपकता पानी पास रखी एक प्लेट और कपड़े को भिगोने लगा, लेकिन आरव को इसका जरा भी एहसास नहीं हुआ। वही पास फर्श पर बैठा उसका वफादार कुत्ता, टॉमी, यह सब बड़े ध्यान से देख रहा था। टॉमी ने उदास और मासूम नज़रों से आरव की तरफ देखा, मानो वह आरव से कहना चाह रहा हो, "मालिक, ज़रा किताब से ध्यान हटाओ और देखो फर्श पर पानी फैल रहा है!" टॉमी अपनी पूंछ हिलाकर और हलकी सी आवाज़ निकालकर आरव का ध्यान खींचने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद जब टॉमी ने उसके पैर को छुआ, तब जाकर आरव की तंद्रा टूटी। उसने नीचे देखा तो पानी बह रहा था। आरव ने तुरंत किताब रखी, बोतल सीधी की और फर्श साफ किया। उसने प्यार से टॉमी को गले से लगा लिया और उसकी समझदारी की तारीफ करते हुए उसे एक बिस्किट दिया। आरव समझ गया कि किताबों की दुनिया जितनी सुंदर है, अपने आसपास की चीज़ों का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है।

किताबी कीड़ा और भूखा मोती
स्वाति रामावत, 9 वर्ष
रमन को किताब पढ़ने का बहुत शौक था। एक दिन वह सोफे पर लेटकर किताब में इतना खो गया कि उसे कुछ होश ही नहीं रहा। उसी सोफे के नीचे उसका कुत्ता मोती भूखा लेटा था। सामने उसकी थाली में खाना पड़ा था और पास में दूध की बोतल से दूध टपक कर बर्बाद हो रहा था। मोती देर तक मालिक को देखता रहा, फिर भूख से भौंक उठा। तब रमन का ध्यान टूटा। उसे अपनी गलती समझ आई। उसने तुरंत बोतल सीधी की और मोती को खाना खिलाया।

हेमू की समझदारी
रिद्धि बांयल, 11 वर्ष
एक गाँव में हेमू नाम का एक लड़का रहता था। उसके पास एक पालतू कुत्ता था। हेमू को किताबें पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। वह सारा दिन सोफे पर लेटकर किताबें पढ़ता रहता था। उसका कुत्ता भी उसके पास बैठा रहता था।हेमू की माँ उसे रोज समझाती थी कि बेटा, थोड़ा बाहर खेला करो और अपने कुत्ते को भी घुमाने ले जाया करो। लेकिन हेमू उनकी बात नहीं मानता था। कुछ दिनों बाद हेमू बीमार पड़ गया। उसे कमजोरी होने लगी। उसका कुत्ता भी बीमार रहने लगा क्योंकि वह भी दिनभर घर में ही रहता था। हेमू की माँ उसे डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने उसे अच्छी आदतें अपनाने और रोज थोड़ा व्यायाम करने को कहा। हेमू को अपनी गलती समझ में आ गई। अब वह रोज सुबह जल्दी उठने लगा। वह अपने कुत्ते को बाहर घुमाने ले जाता और खुद भी खेलता था। वह समय पर खाना खाता और रात को जल्दी सो जाता था।कुछ दिनों बाद हेमू की तबीयत ठीक हो गई। उसका कुत्ता भी पहले से अच्छा रहने लगा। हेमू बहुत खुश हुआ और उसने अपनी माँ से कहा कि अब वह रोज अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखेगा