
संगीत और किताबों का साथ है सच्चा
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता—96
बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 16 सितंबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
पढ़ाई और संगीत
अनुसूया चारण, 11 वर्ष
अवनी को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत सुनना भी बहुत पसंद था। वह रोज़ शाम को अपनी किताबें लेकर कमरे में बैठती और पढ़ाई करती। पढ़ाई करते समय वह धीमी आवाज़ में मधुर संगीत सुनती थी। संगीत सुनने से उसका मन शांत रहता और वह उत्साह से पढ़ाई करती। एक दिन अवनी को गणित का कठिन सवाल हल करना था। वह बार-बार कोशिश करने पर भी सवाल हल नहीं कर पा रही थी। वह थोड़ी परेशान हो गई। तभी उसने कुछ देर संगीत सुना। संगीत सुनकर उसका मन शांत हुआ और उसने फिर से सवाल हल करने की कोशिश की। इस बार उसने ध्यान लगाकर सवाल पढ़ा और थोड़ी ही देर में सही उत्तर निकाल लिया। अवनी बहुत खुश हुई। उसने अपनी माँ से कहा, “माँ, संगीत मेरे मन को शांत करता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में मेरी मदद करता है। माँ ने कहा, “हाँ बेटा, संगीत अच्छा साथी है, लेकिन पढ़ाई के समय उसका उपयोग सीमित रखना चाहिए।” अपनी ने माँ की बात समझ ली। उसने पढ़ाई और संगीत के लिए अलग-अलग समय तय कर लिया। अब वह समय पर पढ़ाई करती और खाली समय में संगीत का आनंद लेती।
रिया की संगीतमय कल्पना
राघव गुप्ता, 10 वर्ष
एक छोटे से शहर में रिया नाम की लड़की रहती थी। उसे संगीत सुनना और पढ़ाई करना दोनों अच्छा लगता था। एक दिन वह सवेरे हेडफोन लगाकर ग्रामोफ़ोन पर संगीत बजाकर सुन रही थी। बाहर सुहावना मौसम और उसके सामने किताबों का ढेर खुला हुआ था। जब भी वह अपना मन पसंद संगीत सुनती थी तो, वह उन किताबों के ढेर से अपनी किताब पढ़ती और पढ़ते वक्त वह उन कहानियो में खो जाती थी। वह कभी कहानियो में परी बन जाती या अंतरिक्ष की सैर करती थी, और उनमे खो जाती थी। ये सभी काम रोज़ाना कर-कर उसे शिक्षा मिलती थी की सपना एक ऐसी चीज है जिसमे हम जो चाहे वो कर सकते है।
मनोरंजन में संतुलन
आदित्य सोलंकी, 9 वर्ष
यह एक लड़की है। इसका नाम गोपी है। वह अपने कमरे में बैठकर गाने सुन रही है। उसके कानों पर हेडफोन लगा हुआ है। वह बहुत खुश दिखाई दे रही है। उसके ऊपर एक लाइट लगी हुई है। उसका कमरा बहुत बड़ा और सुंदर है। कमरे में एक मेज भी रखी हुई है। मेज पर चाय का कप रखा है और उसके पास एक पौधा भी रखा हुआ है। कमरे में कई पुस्तकें रखी हुई हैं। गोपी ने एक पुस्तक खोल रखी है। वह कभी-कभी पढ़ती है और कभी गाने सुनती है। गोपी को संगीत सुनना बहुत पसंद है। गाने सुनते-सुनते वह बहुत आनंदित हो रही है। वह अपने पैरों को हवा में हिला रही है और संगीत का आनंद ले रही है। कुछ देर बाद वह हेडफोन उतार देती है और अपनी पुस्तक पढ़ने लगती है।
गोपी पढ़ाई के साथ-साथ संगीत सुनना भी पसंद करती है। वह अपना समय पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलित करके बिताती है। इससे वह खुश भी रहती है और अपनी पढ़ाई भी पूरी करती है।
आध्या की खुशी
वैभवी कौशल, 8 वर्ष
आध्या को गाने का आनंद लेना पसंद था वह रोज पढ़ाई करने के बाद संगीत का आनंद लेती एक दिन वह कहानी पढ़ते पढ़ते थक गई तो वह सो गई जब उसकी मां आई उन्होंने देखा कि मेरी बेटी सो रही है उसकी मां ने उसके लिए पाव भाजी बनाई उन्होंने सोचा कि मेरी बेटी जब उठेगी तब वह देखेगी कि मेरी मां ने मेरा पसंदीदा खाना बनाया तो वह खुश हो जाएगी आध्या जैसे ही उठी उसकी सुगंध आई पाव भाजी की तो उसने खुश होकर अपनी मां के लिए एक प्यारा सा संगीत बनाया उसने यह गाना बनाया तू ना होती तो मैं ना होती तू है प्यारी बहुत बहुत प्यारी मेरी मां गाना सुनकर आध्या की मां बहुत खुश हुई और उन्होंने उसे गले लगा लिया।
संगीत की धुन और पढ़ाई का समय
गुनगुन नरेड़ा
उम्र-8 वर्ष
एक दिन अनन्या अपने कमरे में आराम से लेटी हुई थी। उसके चारों ओर कई किताबें खुली पड़ी थीं। पास ही रिकॉर्ड प्लेयर पर उसकी पसंदीदा मधुर धुन बज रही थी। अनन्या को संगीत सुनना बहुत अच्छा लगता था। वह किताब खोलकर पढ़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बार-बार उसका ध्यान संगीत की ओर चला जाता। अगले दिन उसकी विज्ञान की परीक्षा थी। माँ ने कमरे में आकर देखा तो उन्होंने कहा, “अनन्या, संगीत सुनना अच्छी बात है, लेकिन पढ़ाई के समय पूरा ध्यान पढ़ाई पर होना चाहिए।” अनन्या को माँ की बात समझ में आ गई। उसने रिकॉर्ड बंद किया और मन लगाकर पढ़ाई करने लगी। उसने पहले विज्ञान का एक अध्याय पूरा किया। थोड़ी देर आराम करने के बाद उसने फिर पढ़ाई शुरू कर दी। इस तरह उसने शाम तक सभी अध्याय दोहरा लिए। अगले दिन परीक्षा में प्रश्नपत्र देखकर अनन्या बहुत खुश हुई, क्योंकि सभी प्रश्न उसे अच्छी तरह आते थे। परीक्षा के बाद अध्यापिका ने भी उसकी मेहनत की प्रशंसा की। घर लौटकर अनन्या ने माँ से कहा, “अब मैं समझ गई हूँ कि पढ़ाई और मनोरंजन दोनों जरूरी हैं, लेकिन दोनों के लिए सही समय होना चाहिए।”
माँ मुस्कुराईं और बोलीं, “समय का सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है।” उस दिन से अनन्या ने एक समय-सारणी बना ली। वह रोज मन लगाकर पढ़ाई करती और खाली समय में संगीत सुनकर अपना मन प्रसन्न करती।
एक शाम संगीत और किताबों के नाम
इनाया खान, 12 वर्ष
रिया को बचपन से ही दो चीजों का बहुत शौक था अच्छी किताबें पढ़ना और मधुर संगीत सुनना रविवार की एक सुनहरी शाम थी रिया ने अपने कमरे को एक जादूई कोने में बदल दिया उसने अपने कमरे में रंग-बिरंगे छोटे बल्बों की लड़ियां जलाई जिससे पूरे कमरे में एक प्यारी और गुनगुनी रोशनी फैल गई जमीन पर एक आरामदायक गद्दा बिछाया और उस पर लेट गई रिया ने अपने पसंदीदा लाल रंग के हेडफोन लगे और ग्रामोफोन पर अपनी पसंदीदा धुनो का रिकॉर्ड बजा दिया संगीत के मधुर लहरें लगा दी उसने अपनी आंखें बंद कर ली पूरी तरह से संगीत के सुकून में डूब गई संगीत की हर एक धुन उसके मन को असीम शांति दे रही थी प्रिया के पास ही उसकी पसंदीदा कहानियों की कुछ किताबें भी रखी थी जिन्हें वह थोड़ी देर बाद पढ़ने वाली थी पास की छोटी मेष पर गरम-गरम चाय का एक प्याला रखा था जिसकी भीनी भीनी खुशबू पूरे कमरे में महक रही थी रिया के लिए यह पल किसी जन्नत से काम नहीं थे जहां भाग दौड़ भरी जिंदगी से दूर सिर्फ वह उसका गीत और किताबों का संसार था इस सुकून भरे माहौल में उसके पूरे हफ्ते की थकान को पल भर में दूर कर दिया।
किताबी दुनिया और संगीत का जादू
प्रभास श्रीवास्तव, 8 वर्ष
मीनू को किताबें पढ़ने और संगीत सुनने का बहुत शौक था।मीनू ने अपने कानों पर हेडफ़ोन लगाए ताकि वह संगीत की हर एक धुन को गहराई से महसूस कर सके। संगीत सुनते-सुनते वह अपनी कहानियों की किताबों की दुनिया में खो गई। फर्श पर उसके चारों ओर रंग-बिरंगी किताबें बिखरी हुई थीं। वह कभी एक किताब उठाती, तो कभी दूसरी। संगीत और किताबों के इस अनोखे संगम ने उसके रविवार को बेहद खास और सुकून भरा बना दिया था।
अपने लिए कुछ पल
आशिता काबरा, 10 वर्ष
आशु को किताबें पढ़ने और संगीत सुनने का बहुत शौक था। पढ़ाई और रोज़मर्रा की भागदौड़ के कारण उसे अपने लिए समय नहीं मिल पाता था। एक दिन उसने कुछ समय सिर्फ अपने लिए निकालने का फैसला किया। उसने पसंदीदा किताब खोली, हेडफोन लगाए और पास रखी गर्म चाय का आनंद लेने लगी। संगीत सुनते हुए किताब पढ़कर उसके चेहरे पर सुकून की मुस्कान आ गई। उसे महसूस हुआ कि खुश रहने के लिए हमेशा बड़ी चीजों की जरूरत नहीं होती। आशु ने सोचा, “दूसरों के लिए समय निकालना जरूरी है, लेकिन खुद के लिए कुछ पल निकालना भी उतना ही जरूरी है।
अपनी—अपनी पसंद
हिमानी, 13 वर्ष
रिया को संगीत सुनना बहुत पसंद था। हर शाम वह अपने कमरे में आराम से लेटकर रिकॉर्ड प्लेयर पर अपने पसंदीदा गाने सुनती थी। उस दिन भी रिया ने हेडफोन लगाए और मधुर संगीत में खो गई। पास ही उसकी किताबें खुली पड़ी थीं और मेज पर गरम चाय की प्याली रखी थी। कमरे में रंग-बिरंगी लड़ियों की रोशनी और पौधे का हरापन वातावरण को और सुंदर बना रहे थे।
अचानक रिया की नजर अपनी खुली किताब पर पड़ी। उसे याद आया कि अगले दिन स्कूल में कहानी लेखन की प्रतियोगिता थी। वह कुछ देर सोचती रही कि संगीत सुने या कहानी लिखे। तभी उसके मन में एक विचार आया—क्यों न संगीत से ही कहानी की प्रेरणा ली जाए?
रिया ने हेडफोन की आवाज थोड़ी कम की और अपनी किताब तथा कॉपी लेकर बैठ गई। संगीत सुनते-सुनते उसके मन में एक सुंदर कहानी आकार लेने लगी। उसने प्रकृति, दोस्ती और सपनों पर कहानी लिखना शुरू किया। कुछ ही देर में उसकी कहानी पूरी हो गई।
अगले दिन रिया ने स्कूल में अपनी कहानी सुनाई। सभी बच्चों और शिक्षकों ने उसकी खूब प्रशंसा की। रिया को समझ आया कि संगीत मन को शांत करता है और किताबें ज्ञान व कल्पना को बढ़ाती हैं। यदि दोनों का सही उपयोग किया जाए, तो सीखना भी आनंददायक बन जाता है।
जब रिकॉर्ड ने एक राज खोला
ग्रंथ सोनी, 8 वर्ष
शाम का समय था। ग्रंथ अपने कमरे में किताब पढ़ रहा था। तभी उसकी नजर मेज पर रखे एक पुराने रिकॉर्ड प्लेयर पर पड़ी। वह रिकॉर्ड दादी ने वर्षों से संभालकर रखा था। ग्रंथ ने उत्सुकता से रिकॉर्ड चलाया और हेडफोन लगाकर धुन सुनने लगा। धुन बहुत मधुर थी। अचानक उसे लगा जैसे संगीत के बीच कोई धीमी आवाज कुछ कह रही हो। उसने ध्यान से सुना, लेकिन आवाज साफ नहीं थी। ग्रंथ तुरंत दादी के पास पहुँचा और रिकॉर्ड के बारे में पूछा। दादी कुछ पल चुप रहीं, फिर मुस्कुराकर बोलीं, “इस रिकॉर्ड में मेरी जिंदगी की सबसे प्यारी याद छिपी है।” दादी ने बताया कि बचपन में उन्हें संगीत सीखने का बहुत शौक था। इसी धुन को उन्होंने अपनी माँ से सीखा था, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका संगीत सीखने का सपना अधूरा रह गया। उन्होंने रिकॉर्ड इसलिए संभालकर रखा था, ताकि कभी कोई अपना उस धुन को फिर से जीवित करे। ग्रंथ ने दादी का हाथ पकड़कर कहा, “दादी, आपका सपना अब अधूरा नहीं रहेगा। आप मुझे यह धुन सिखाइए।” दादी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। अगले दिन से रिकॉर्ड की धुन के साथ ग्रंथ का अभ्यास भी शुरू हो गया। उस दिन ग्रंथ समझ गया कि पुरानी चीजों में केवल यादें नहीं, अपनों के अधूरे सपने भी छिपे होते हैं।
शब्द, संगीत और सपने
अनुष्का साहू, 12 वर्ष
अवनि के लिए हर किताब एक बंद दरवाज़ा थी और संगीत उसकी जादुई चाबी। एक शांत शाम, उसने कानों में हेडफ़ोन लगाया और मेज पर ज्ञान का संसार खोल लिया।जैसे ही सुर गूँजे, अक्षरों में जान आ गई। किताब के पन्नों से नीली रश्मियाँ और प्रेम के प्रतीक दिल हवा में नृत्य करने लगे। खिड़की से आती ताज़ी हवा और मधुर संगीत के इस संगम ने अवनि की कल्पना को पंख दे दिए। उसने आँखें मूँद लीं और सितारों से आगे एक ऐसी दुनिया में जा पहुँची, जहाँ सोच की कोई सीमा नहीं थी। उसने जाना कि एकाग्रता और कला का यह मेल साधारण से कमरे को भी अनंत ब्रह्मांड में बदल देता है।
Updated on:
19 Sept 2026 11:34 am
Published on:
19 Sept 2026 11:34 am
