
जंगल में सुनहरा हिरण और रंगीन कल्पनाएं
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता—97
बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 23 सितंबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
सच्ची मित्रता
वनिशा कालरा, 7 वर्ष
एक घने जंगल में मिंकी नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। वह बहुत दयालु और प्रकृति से प्रेम करने वाली थी। एक दिन वह जंगल में फूलों का सुंदर गुलदस्ता लेकर घूम रही थी। तभी उसकी नजर एक सुंदर हिरण पर पड़ी। हिरण उसे देखकर पहले थोड़ा डर गया, लेकिन मिंकी ने प्यार से उसे फूल दिखाए और कहा, “डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।” धीरे-धीरे हिरण का डर दूर हो गया। मिंकी रोज उसके लिए फूल और फल लेकर आने लगी। दोनों अच्छे दोस्त बन गए। एक दिन मिंकी जंगल में रास्ता भटक गई। वह बहुत घबरा गई और रोने लगी। तभी हिरण ने उसे देखा। वह मिंकी के पास आया और उसे जंगल से बाहर सुरक्षित रास्ते तक ले गया। मिंकी ने खुशी से हिरण को गले लगाया और कहा, “सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में अपने दोस्त का साथ दे।” उस दिन से दोनों की दोस्ती और भी गहरी हो गई।
हिरन और फूलों की दोस्ती
अंश, 10 वर्ष
एक सुंदर जंगल में एक प्यारा-सा हिरन रहता था। वह बहुत शांत और दयालु था। एक दिन वह जंगल में घूम रहा था। तभी उसकी नजर एक छोटी बच्ची पर पड़ी। बच्ची के हाथ में रंग-बिरंगे फूलों का सुंदर गुलदस्ता था। वह हिरन के पास आई और प्यार से उसे फूल देने लगी।
हिरन बच्ची को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने फूलों को सूँघा और अपनी गर्दन हिलाकर जैसे उसका धन्यवाद किया। बच्ची भी हिरन से दोस्ती करके बहुत खुश हुई। दोनों रोज मिलने लगे। बच्ची हिरन के लिए फूल लाती और हिरन उसके साथ जंगल में घूमता। एक दिन जंगल में तेज आँधी आई। कई पेड़ और पौधे टूट गए। बच्ची को डर लगा कि उसके फूल भी नष्ट हो जाएँगे। हिरन ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। आँधी रुकने के बाद दोनों ने मिलकर टूटे पौधों को फिर से लगाया और उनमें पानी डाला। कुछ दिनों बाद जंगल फिर से हरा-भरा हो गया और चारों ओर सुंदर फूल खिलने लगे। बच्ची और हिरन बहुत खुश हुए।
जंगल का अनोखा दोस्त
चार्वी संचेती, 12 वर्ष
एक रविवार की सुबह मितांशी फूलों का सुंदर गुलदस्ता लेकर जंगल के पास घूमने गई। उसे प्रकृति और पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। अचानक उसे झाड़ियों के पीछे से किसी के कराहने की आवाज़ सुनाई दी। उसने पास जाकर देखा तो एक सुंदर हिरण खड़ा था। उसके पैर में काँटों की बेल बुरी तरह उलझी हुई थी। मितांशी ने बिना डरे धीरे-धीरे काँटों को हटाया। कुछ ही देर में हिरण आज़ाद हो गया। उसने मितांशी की ओर देखा, जैसे धन्यवाद कह रहा हो और फिर जंगल की ओर दौड़ गया। अगले दिन मितांशी फिर उसी जगह पहुँची। वही हिरण उसके सामने आ गया और बार-बार पीछे मुड़कर उसे देखने लगा। मितांशी उसके पीछे चल पड़ी। थोड़ी दूर जाकर उसने देखा कि हिरण का एक छोटा बच्चा गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था। मितांशी ने तुरंत मदद के लिए लोगों को बुलाया। थोड़ी देर में बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हिरणी अपने बच्चे को देखकर बहुत खुश हुई। मितांशी समझ गई कि उसकी छोटी-सी मदद आज किसी की बड़ी खुशी का कारण बन गई थी।
रिया और बारहसिंगा
रीमा मीना, 8 वर्ष
एक बार की बात थी, एक छोटे से गाँव में एक छोटी सी प्यारी लड़की रहती थी। उसका नाम रिया था। रिया बहुत दयालु और नरम दिल की लड़की थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। रिया को जानवरों से दोस्ती करना बहुत पसंद था। वो कभी बिल्ली से खेलती, कभी कुत्ते के साथ दौड़ती और कभी-कभी शेर के बच्चों से भी बातें करती थी। सब जानवर उसे पसंद करते थे क्योंकि वो किसी को दुख नहीं पहुँचाती थी।
एक दिन रिया जंगल में घूमने निकली। हरी-भरी पत्तियों और सुंदर फूलों के बीच वो खुशी-खुशी घूम रही थी। अचानक उसे एक सुंदर बारहसिंगा दिखाई दिया। वो बारहसिंगा बहुत प्यारा और शर्मीला था। उसके लंबे सींग चमक रहे थे। रिया ने उस बारहसिंगा को देखा तो बहुत खुश हो गई। रिया आस-पास देखने लगी। उसे कई रंग-बिरंगे फूल मिल गए। उसने उन फूलों को इकट्ठा किया और धीरे-धीरे बारहसिंगा के पास गई। लेकिन बारहसिंगा रिया को देखते ही डर के मारे भाग गया। रिया ने प्यार से कहा, "मत डरो, मैं तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाती। मैं तुम्हारी दोस्त बनना चाहती हूँ।" रिया की मीठी आवाज़ सुनकर बारहसिंगा रुक गया। वो धीरे-धीरे वापस आया। रिया ने हाथ आगे बढ़ाया और प्यार से उसे फूल दे दिए। बारहसिंगा ने फूल सूँघे और खुश हो गया। उस दिन से दोनों की दोस्ती हो गई। रिया रोज़ जंगल में आती और बारहसिंगा से मिलती। दोनों साथ खेलते और घूमते। कुछ दिनों बाद रिया को कहीं दूर अपने नाना-नानी के यहाँ जाना था। जब बारहसिंगा ने यह बात सुनी तो उसके आँखों में आँसू आ गए। वो बहुत उदास हो गया। रिया ने उसे गले लगाया और कहा, "मैं जल्दी वापस आऊँगी। तुम चिंतित मत होना।" रिया जब भी छुट्टी में आती, जंगल में जाती और बारहसिंगा तथा दूसरे जानवरों के लिए फल-फूल लाती। उनकी दोस्ती हमेशा बनी रही और दोनों बहुत खुश रहते थे।
हिरन से दोस्ती
अनन्या गुर्जर, 10 वर्ष
एक दिन रिया जंगल में घूमने गई। वहाँ उसने एक सुंदर हिरन देखा। रिया के हाथ में फूलों का गुलदस्ता था। उसने प्यार से हिरन को फूल दिए। हिरन पहले थोड़ा डरा, लेकिन फिर धीरे-धीरे रिया के पास आ गया। रिया ने देखा कि हिरन के पैर में काँटा चुभा हुआ था। उसने सावधानी से काँटा निकाल दिया। हिरन खुश होकर रिया के आसपास घूमने लगा। रिया ने उसे प्यार से सहलाया और कहा, “डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।” उस दिन रिया ने सीखा कि जानवरों से प्यार करना और उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। वह खुशी-खुशी घर लौट गई।
ध्रुवी की सैर
लविष्का माली 9 वर्ष
एक बार ध्रुवी अपने माता-पिता के साथ रणथंभोर घूमने गई। वहाँ जब वो लोग जंगल सफारी के लिए गये तो उनको रास्ते में एक छोटा-सा बारहसिंगे का बच्चा मिला। जो कि शायद अपने माता-पिता से बिछड़ गया था और घायल था और देख कर ऐसा लग रहा था कि भूखा भी हो। ध्रुवी व उसके माता पिता को उस पर दया आ गई और उसको अपने साथ ले आए और उसका इलाज करवाया और अपने साथ रखने लगे। सबको उससे अलग ही प्रेम हो गया । लेकिन वो ये बात समझते थे कि सभी जीवों का अपने जंगल से ओर अपने समान जीवों से ही प्यार होता है और उनके साथ रहना ही अच्छा लगता है। तो जब छोटा बारहसिंगा छः महीने बाद पूरी तरह स्वस्थ हो गया तो ध्रुवी ओर उसका परिवार नाम आँखो से उसे फिर वही रणथंभोर के जंगलों में छोड़ आए और बस कुछ यादों के साथ ध्रुवी ने भी उसको अलविदा कहा।
नन्ही बच्ची और हिरन
गौरांशी जोशी, 7 वर्ष
एक घने और सुंदर जंगल में चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पेड़ और रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। उसी जंगल के पास एक छोटी-सी बच्ची रहती थी। उसका नाम राधा था। उसे फूलों और पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। एक दिन राधा फूलों का एक सुंदर गुलदस्ता लेकर जंगल में घूमने गई। वहाँ उसने एक सुंदर हिरन को देखा। हिरन बहुत शांत और प्यारा था। राधा को उसे देखकर बहुत खुशी हुई। वह धीरे-धीरे हिरन के पास गई, ताकि वह डरकर भाग न जाए। फिर उसने प्यार से अपना फूलों का गुलदस्ता उसकी ओर बढ़ा दिया। हिरन ने राधा को ध्यान से देखा और उसके पास आकर खड़ा हो गया। राधा ने उसके सिर पर हाथ फेरा। हिरन भी राधा से बिल्कुल नहीं डरा। दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे के साथ खेलते रहे। राधा ने हिरन को समझाया कि जंगल के पेड़-पौधे और सभी जीव-जंतु हमारे मित्र हैं। हमें उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। कुछ समय बाद राधा अपने घर लौटने लगी। हिरन भी कुछ दूर तक उसके पीछे आया और फिर जंगल में वापस चला गया। राधा ने उस दिन समझा कि पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम और दया रखने से मन में सच्ची खुशी मिलती है।
फूलों का सच्चा दोस्त
अमन मीना, 10 वर्ष
एक घने जंगल के पास अनाया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे फूलों और पेड़-पौधों से बहुत प्यार था। एक दिन वह रंग-बिरंगे फूलों का गुलदस्ता लेकर जंगल में गई। वहाँ उसे एक सुंदर हिरन दिखाई दिया। हिरन उदास था। अनाया ने प्यार से पूछा, “तुम उदास क्यों हो?” हिरन उसे जंगल के एक सूखे हिस्से में ले गया। वहाँ पौधे मुरझाए हुए थे और जमीन सूखी थी। अनाया समझ गई कि जंगल को देखभाल की जरूरत है। उसने फूल तोड़कर देने के बजाय उनके पौधे जमीन में लगाने का निश्चय किया। वह पास की धारा से पानी लाई और पौधों को सींचने लगी। हिरन भी उसकी मदद करने लगा। दोनों रोज वहाँ आते और पौधों की देखभाल करते। कुछ ही दिनों में सूखी जमीन हरी हो गई। रंग-बिरंगे फूल खिल उठे। तितलियाँ आने लगीं और पक्षियों की चहचहाहट से जंगल फिर गूंजने लगा। अनाया मुस्कुराकर बोली, “फूल तोड़ने से सुंदरता थोड़ी देर रहती है, लेकिन फूल उगाने से सुंदरता हमेशा बढ़ती है।” हिरन ने प्यार से उसकी ओर देखा। उस दिन अनाया ने संकल्प लिया कि वह प्रकृति की हमेशा रक्षा करेगी।
पक्के दोस्त
प्रभाष श्रीवास्तव, 8 वर्ष
एक घने और सुंदर जंगल में सोनू नाम का एक बारहसिंगा (हिरण) रहता था।सोनू अक्सर अकेला महसूस करता था।उसी जंगल के पास वाले गाँव में मीनू नाम की एक छोटी लड़की रहती थीवह हर रोज़ जंगल की सैर करने आती थी और रंग-बिरंगे फूल इकट्ठा करती थी।एक दिन, जब मीनू जंगल में फूल चुन रही थी, तभी उसकी नज़र सोनू पर पड़ी। सोनू एक पेड़ के पास चुपचाप खड़ा था। मीनू को देखकर वह थोड़ा घबराया,मीनू ने मुस्कुराते हुए अपने हाथों में लिया हुआ सुंदर फूलों का गुलदस्ता सोनू की तरफ बढ़ाया।मीनू के इस प्यार भरे व्यवहार को देखकर सोनू का डर दूर हो गया। दोनों पक्के दोस्त बन गए।
सभी की मदद
अधिरा वर्मा, 7 वर्ष
पर्यावरण के दिन सिया के माता पिता सिया को वन्य जीव अभ्यारण घुमाने ले गए। सिया ने वहा मोर बंदर भालू ओर खूब सारे जीव जंतु देखे। कुछ देर बाद सिया और उसके माता पिता वहा से जाने लगे थोड़ी दूर जाने के बाद उनकी गाड़ी खराब हो गयी। सिया के पिता गाड़ी को ठीक करने लगे सिया की माँ भी मदद करने लगी। तभी सिया को थोड़ी दूर लाल रंग के फूल दिखाई दिये सिया फूल तोड़ने के लिए चलती गयी और काफी दूर तक जंगल मे चली गई। सिया ने बहुत सारे फूल तोड़े तभी सिया ने पीछे मुड़कर देखा तो उसको माता पिता नही दिखे ओर सिया जोर जोर से रोने लगी। सिया की आवाज सुन एक हिरण सिया के पास आकर खड़ा हुआ और सिया को देखने लगा फिर हिरण आगे आगे चलने लगा और सिया हिरण के पीछे पीछे और थोड़ी देर मे सिया अपने माता पिता के पास पहुँच गयी और सिया अपने माता पिता के गले मिलकर बहुत खुश हुई। और सिया हिरण के पास आकर शुक्रिया अदा करने के तौर पर उन लाल फूलों का गुलदस्ता बनाकर भेट किया। और हिरण ने अभिवादन मे अपना सिर हिलाकर वह से चला गया और सिया और उसके माता पिता अपने घर चले गए।
सच्ची मित्रता
रुचिका राजपुरोहित, 8 वर्ष
एक गाँव के पास सुंदर जंगल था। उसी गाँव में मीना नाम की छोटी लड़की रहती थी। उसे फूलों से बहुत प्यार था। एक दिन मीना जंगल में फूल तोड़ने गई। वहाँ उसने देखा एक हिरण पेड़ के नीचे उदास खड़ा है। उसका पैर एक झाड़ी में उलझा था। मीना डरी नहीं, धीरे-धीरे पास गई और प्यार से उसका पैर निकाल दिया। हिरण को आराम मिला। तभी से दोनों में दोस्ती हो गई। मीना रोज उसके लिए ताजे फूलों का गुलदस्ता लाती। हिरण भी उसके इंतजार में उसी जगह आकर खड़ा हो जाता। जंगल के दूसरे जानवर यह दोस्ती देखकर हैरान थे। एक दिन गाँव के कुछ लोग हिरण का शिकार करने आए। मीना ने हिम्मत दिखाई और हिरण के सामने खड़ी हो गई। उसने कहा - "यह मेरा दोस्त है, इसे मत मारो।" मीना के प्यार और सच्ची दोस्ती को देखकर शिकारी शर्मिंदा हो गए और लौट गए। उस दिन से गाँव वालों ने तय किया कि वे जंगल के जानवरों को कभी नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। मीना और हिरण की सच्ची मित्रता पूरे गाँव के लिए मिसाल बन गई।
जानवरों से प्यार और मदद करना सच्ची दयालुता
निधि कसेरा, 8 वर्ष
एक सुंदर जंगल में निधि नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। एक दिन वह जंगल में रंग-बिरंगे फूलों का गुलदस्ता लेकर घूम रही थी। तभी उसे पेड़ों के बीच एक सुंदर हिरण दिखाई दिया। हिरण बहुत शांत और प्यारा था। निधि धीरे-धीरे उसके पास गई और प्यार से उसे फूलों का गुलदस्ता दिखाया। हिरण ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से निधि को देखा और उसके पास आ गया। निधि ने हिरण से कहा, 'डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। हिरण ने खुशी से अपनी पूँछ हिलाई। दोनों जंगल में साथ-साथ घूमने लगे। निधि ने देखा कि हिरण के पैर में एक छोटा-सा काँटा चुभा हुआ था। उसने सावधानी से काँटा निकाल दिया। हिरण बहुत खुश हुआ और निधि के चारों ओर घूमने लगा। उस दिन से निधि और हिरण बहुत अच्छे दोस्त बन गए। निधि ने सीखा कि जानवरों से प्यार और उनकी मदद करना सच्ची दयालुता है।
सुंदर वन और प्यारा हिरन
आरव प्रजापत, 6 वर्ष
एक बार की बात है। एक घने और सुंदर जंगल में रिया नाम की एक छोटी-सी लड़की रहती थी। उसे फूलों और पेड़-पौधों से बहुत प्यार था। वह रोज सुबह जंगल के पास जाती और रंग-बिरंगे फूलों को देखकर बहुत खुश होती थी। एक दिन रिया फूलों का सुंदर गुलदस्ता लेकर जंगल में घूम रही थी। तभी उसने एक बहुत सुंदर हिरन को देखा। हिरन के सिर पर बड़े-बड़े सींग थे और उसकी आँखें बहुत प्यारी थीं। रिया उसे देखकर खुश हो गई। वह धीरे-धीरे हिरन के पास गई, ताकि वह डरकर भाग न जाए। रिया ने प्यार से कहा, “हिरन भाई, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?” हिरन ने रिया की ओर देखा और अपनी पूँछ हिलाई। रिया ने अपने हाथों में पकड़ा फूलों का गुलदस्ता उसकी ओर बढ़ा दिया। हिरन ने फूलों को सूँघा और रिया के पास ही खड़ा रहा। रिया ने हिरन को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। उसने उसे समझाया कि जंगल के सभी जानवर हमारे मित्र हैं। हमें उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए और न ही पेड़-पौधों को काटना चाहिए। कुछ देर बाद हिरन जंगल की ओर चला गया। रिया भी अपने घर लौट आई। अगले दिन वह फिर जंगल में गई तो हिरन उसे देखकर उसके पास आ गया। अब दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे। रिया ने यह बात अपने दोस्तों को भी बताई। सभी बच्चों ने मिलकर प्रण लिया कि वे जंगल, पेड़-पौधों और जानवरों की रक्षा करेंगे।
सुंदर और घना जंगल
याशिका हाडा, 8 वर्ष
एक बार की बात है, मीना नाम की एक छोटी बच्ची सुंदर और घने जंगल के पास रहती थी। उसे पेड़-पौधों और जानवरों से बहुत प्यार था।
एक दिन जंगल में टहलते हुए मीना को एक बहुत ही सुंदर बारहसिंगा दिखाई दिया। उसके बड़े-बड़े सींग बहुत शानदार थे। मीना को देखकर बारहसिंगा पहले थोड़ा झिझका, फिर वहीं रुक गया। मीना ने मुस्कुराते हुए रास्ते से कुछ रंग-बिरंगे फूल चुने और उनका एक प्यारा सा गुच्छा बनाया। मीना धीरे-धीरे आगे बढ़ी और फूलों का गुलदस्ता बारहसिंगे की ओर बढ़ा दिया। बारहसिंगे ने प्यार से अपनी गर्दन झुकाई और मीना के हाथों से फूल स्वीकार कर लिए। मीना की खुशी का ठिकाना न रहा! उस दिन के बाद से मीना और बारहसिंगा पक्के दोस्त बन गए। मीना रोज़ उसके लिए ताजे फूल लाती और दोनों जंगल में साथ में सुकून के पल बिताते। सच्ची दोस्ती भाषा नहीं, सिर्फ प्यार और देखभाल समझती है।
एक अनोखी मुलाकात
वर्तिका नाथावत, 11 वर्ष
एक दिन चित्रा अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। तभी चित्रा ने गेंद को बहुत जोर से लात मारी और गेंद सीधी जंगल के अंदर जाकर गिर गई। उसके दोस्तों ने कहा, "चित्रा, अब गेंद तुम ही लेकर आओगी।" चित्रा ने कहा, "ठीक है, मैं ही लेकर आऊंगी।" चित्र अकेले जंगल में गेंद लेने चली गई। घूमते- घूमते उसे गेंद तो मिल गई , लेकिन वह खुद ही जंगल में खो गई। वह रास्ता ढूंढने लगी, लेकिन उसे कोई रास्ता समझ नहीं आया। जंगल चारों ओर से बहुत घना था और वहां पेड़ों के बीच से हल्की-हल्की धूप आ रही थी। चित्र थोड़ी घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। तभी उसके सामने एक सुनहरा हिरण आया। चित्र को जानवरों से बहुत लगाव था। वह सुनहरे हिरण को देखकर बहुत खुश हुई और खुशी से उछलने लगी। हिरण भी चित्रा के पास आकर खड़ा हो गया। तभी उसे अपने पास बहुत सारे फूल दिखाई दिए। उसने वे फूल उस सुनहरे हिरण को दे दिए और उससे दोस्ती कर ली। दोनों कुछ देर वही साथ रहे। चित्रा ने हिरण को प्यार से सहलाया और वह भी बहुत खुश हुआ। लेकिन तभी उसके दोस्त उसे ढूंढते हुए जंगल में आ पहुंचे। चित्रा ने अपने नए दोस्त हिरण को अलविदा कहा और अपने दोस्तों के साथ वापस घर चली गई
छोटी बच्ची और हिरन
मायरा बेद, 10 वर्ष
एक बार की बात है। एक छोटी-सी लड़की का नाम रानी था। उसे पेड़-पौधों और जानवरों से बहुत प्यार था। एक दिन रानी अपनी माँ के साथ जंगल में घूमने गई। जंगल बहुत सुंदर था। वहाँ चारों तरफ हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और चिड़ियों की मीठी आवाजें थीं। अचानक रानी ने एक सुंदर हिरन को देखा। हिरन बहुत प्यारा था और उसे देखकर डर रहा था। रानी धीरे-धीरे उसके पास गई और बोली, “डरो मत, मैं तुम्हें कुछ नहीं करूँगी।” उसने हिरन को कुछ फल खाने के लिए दिए। हिरन ने फल खाए और रानी के पास खड़ा हो गया। रानी बहुत खुश हुई। तभी रानी ने देखा कि पास में एक जाल बिछा हुआ है। उसे समझ आ गया कि कोई हिरन को पकड़ना चाहता है। रानी ने तुरंत हिरन को वहाँ से दूर जाने का इशारा किया। हिरन तेजी से भागकर सुरक्षित जगह चला गया। रानी ने अपनी माँ को सारी बात बताई। उसकी माँ ने उसकी समझदारी की बहुत तारीफ की। रानी ने मन ही मन सोचा कि वह हमेशा जानवरों की मदद करेगी। उस दिन से रानी और हिरन बहुत अच्छे दोस्त बन गए।
परी का जंगल
नित्या राजपूत, 8 वर्ष
एक घने और सुंदर जंगल के पास एक छोटी सी बच्ची रहती थी, नाम था परी। परी को फूलों से बहुत प्यार था। हर सुबह वह जंगल में जाती और रंग-बिरंगे फूल चुनकर लाती। एक दिन जब वह फूल तोड़ रही थी, तो उसने देखा कि एक सुंदर हिरण पेड़ों के बीच खड़ा उसे देख रहा है। हिरण के बड़े-बड़े सींग और चमकदार आँखें थीं। पहले तो परी थोड़ा डर गई, फिर उसने प्यार से हिरण की तरफ फूलों का गुलदस्ता बढ़ा दिया। हिरण धीरे-धीरे उसके पास आया और फूलों को सूंघने लगा। परी ने उसके सिर पर हाथ फेरा। उस दिन से दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। अब परी रोज जंगल जाती, हिरण के लिए ताजे फूल और वह उसके लिए जंगल के मीठे फल लाता। दोनों फूलों भरी घास पर खेलते, हँसते और पूरा दिन साथ बिताते। जंगल के सारे पेड़-पौधे उनकी दोस्ती देखकर खुश होते। एक बार शिकारी जंगल में आए। परी ने हिरण को समय पर सावधान कर दिया और उसे सुरक्षित जगह छिपा दिया। हिरण की जान बच गई। इस तरह एक नन्ही बच्ची और एक हिरण ने सिखाया कि सच्ची दोस्ती में न भाषा देखी जाती है, न प्रजाति - बस प्यार और विश्वास होना चाहिए। यही दोस्ती प्रकृति और इंसान के बीच सबसे सुंदर रिश्ता है।
अनमोल दोस्ती
शिवराज सिंह रावल, 8 वर्ष
दुर्गापुर गाँव के पास एक घना और खूबसूरत जंगल था। उसी गाँव में मानसी नाम की एक छोटी और नन्ही बच्ची रहती थी। मानसी को पशु-पक्षियों और जानवरों से बहुत लगाव व प्रेम था। वह अक्सर जंगल के पास घूमने जाती थी और सुंदर-सुंदर रंग-बिरंगे फूलों को बड़े ध्यान से देखती थी। एक दिन मानसी जब पशुओं को बड़े प्यार से देख रही थी, तब जंगल से एक हिरण उसके बगीचे में आ गया। वह आकर वहीं बैठ गया। हिरण के पैर में चोट लगी थी। मानसी को उस पर बहुत दया आ गई। वह बिना डरे उसके पास गई और उसे प्यार से सहलाने लगी। उसने उसके पैर को साफ किया तथा उसकी चोट पर घर से दवाई लाकर लगाई। उस दिन के बाद उन दोनों की गहरी दोस्ती हो गई। हिरण और मानसी रोज उसी बगीचे में मिलने लगे और साथ में खेलने लगे। मानसी की बातें व नटखट हरकतों से हिरण बहुत प्रसन्न होता और अपनी पूँछ हिलाता।
सच्ची दोस्ती और जादुई हिरण
खुशी डांगी, 10 वर्ष
सुंदरवन के किनारे एक बेहद खूबसूरत पार्क था। वहाँ रोज़ शाम को पिंकी और चिंकी नाम की दो पक्की सहेलियाँ खेलने आती थीं। दोनों की दोस्ती पूरे गाँव में मशहूर थी।एक सुनहरी शाम, जब वे दोनों लुका-छिपी खेल रही थीं, तभी झाड़ियों में एक अजीब हलचल हुई। अचानक सामने एक अद्भुत जीव आया—वह एक जादुई हिरण था! उसकी त्वचा सोने जैसी चमक रही थी, सींगों से हल्की रोशनी निकल रही थी और शरीर पर सितारों जैसे प्यारे निशान थे। दोनों सहेलियाँ उसे देखकर दंग रह गईं।तभी चिंकी की नज़र हिरण के पिछले पैर पर पड़ी, जहाँ एक नुकीला काँटा चुभा हुआ था। दर्द के मारे उसकी आँखों में आँसू थे। पिंकी और चिंकी ने तुरंत फैसला किया कि वे उसकी मदद करेंगी। पिंकी ने बड़े प्यार से हिरण को सहलाकर उसका डर दूर किया, और चिंकी ने बिना वक्त गँवाए धीरे से वह काँटा निकाल दिया।काँटा निकलते ही एक चमत्कार हुआ! हिरण का दर्द गायब हो गया और उसके सींगों से रंग-बिरंगी जादुई रोशनी पूरे पार्क में बिखर गई। आसमान से चमकीले फूल बरसने लगे। हिरण ने खुशी से दोनों सहेलियों को अपनी पीठ पर बिठाया और हवा में तैरते हुए पार्क की सैर कराई।सूरज ढलने पर, वह जादुई मित्र दोनों को धन्यवाद कहकर जंगल में ओझल हो गया। उस दिन पिंकी और चिंकी ने जाना कि सच्ची दोस्ती और दयालुता में ही असली जादू छिपा होता है।
एक अनोखी दोस्ती
थिया मेहता, 8 वर्ष
शहर के शोर-शराबे से दूर, एक शांत जंगल के किनारे मीना नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसे प्रकृति से बहुत प्यार था और वह रोज़ाना फूलों की खोज में जंगल के रास्ते पर निकल जाती थी। एक दिन, फूलों का एक सुंदर गुलदस्ता इकट्ठा करते समय, उसकी नज़र एक राजसी हिरण पर पड़ी। हिरण, जिसके पास विशाल और शानदार सींग थे, डरने के बजाय शांत खड़ा था। मीना ने ध्यान से देखा कि हिरण के पैर में एक छोटी सी खरोंच थी। वह धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ी और अपने गुलदस्ते से कुछ फूल तोड़कर उसकी चोट पर लगा दिए। हिरण ने एक शांत नज़रों से उसकी ओर देखा, मानो उसे धन्यवाद कह रहा हो। उस दिन से, मीना और हिरण की एक अनोखी दोस्ती शुरू हो गई। वे रोज़ाना जंगल में मिलते थे। मीना उसे रंगीन फूल और स्वादिष्ट फल खिलाती थी, जबकि हिरण उसे जंगल के छिपे हुए रास्तों और सुंदर दृश्यों के बारे में बताता था। उनकी दोस्ती निस्वार्थ और गहरी थी, जो प्रेम और सम्मान पर टिकी थी। वे एक-दूसरे के लिए साथी बन गए थे, जो एक-दूसरे को समझते और परवाह करते थे। यह दोस्ती साबित करती है कि प्रेम और करुणा किसी भी भाषा और प्रजाति से परे है।
जंगल में पिकनिक
हिताक्षी, 6 वर्ष
मेरा नाम हिताक्षी है। मैं 6 साल की हूँ। एक दिन, मैं और मेरे मम्मी-पापा बहुत दूर एक जंगल में पिकनिक मनाने गए। वह जंगल बहुत बड़ा और गहरा था। चारों तरफ ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे और रंग-बिरंगे फूल खिले थे। मुझे फूल बहुत पसंद हैं, इसलिए मैं घास पर घूमते हुए सुंदर फूल चुनने लगी। मैं इतने मजे में थी कि मैं रास्ता भूल गई। मुझे थोड़ा डर लग रहा था क्योंकि मम्मी-पापा बहुत दूर रह गए थे।
तभी, एक पेड़ के पीछे से एक बारहसिंगा बाहर आया। ओह! वह कितना सुंदर था। उसके सर पर जो सींग थे, वे बिल्कुल झाड़ियों जैसे दिखते थे और बहुत बड़े थे। उसका शरीर हल्का भूरा था और उस पर सफेद धब्बे थे। उसकी आँखें बहुत बड़ी और काली थीं और वे बहुत नरम लग रही थीं। वह चुपचाप मुझे देख रहा था। मैं पहले बहुत डर गई, लेकिन फिर उसने अपनी पूंछ हिलाई और मुझे लगा कि वह मुझे नमस्ते कर रहा है। मेरे हाथों में एक फूलों का बड़ा गुलदस्ता था जो मैंने अभी-अभी जंगल से तोड़ा था। उसमें लाल, गुलाबी और सफेद फूल थे। वे बहुत महक रहे थे। मुझे लगा कि यह हिरण इतना प्यारा है, तो मैं उसे यह फूलों का गुलदस्ता देना चाहती हूँ। मैं धीरे-धीरे उसके पास गई। हिरण चुपचाप खड़ा रहा। मैंने अपना गुलदस्ता उसकी तरफ बढ़ाया और कहा, "नमस्ते प्यारे हिरण! मैं रीमा हूँ। यह गुलदस्ता आपके लिए है, क्या आप मुझसे दोस्ती करेंगे?" हिरण ने अपना मुंह फूलों के गुलदस्ते की तरफ किया और उसे प्यार से सूंघा। उसने अपने बड़े सींगों को धीरे से नीचे झुकाया। मुझे लगा कि वह मुस्कुरा रहा है और मुझे 'धन्यवाद रीमा' कह रहा है। मैं इतनी खुश हुई कि मैं बता नहीं सकती। मेरा सारा डर गायब हो गया। वह भागकर जंगल में नहीं गया, बल्कि वहीं मेरे पास खड़ा रहा। सूरज की किरणें उसके सींगों पर पड़ रही थीं और वे सोने की तरह चमक रहे थे। मुझे लगा कि यह एक जादुई हिरण है।
मैं उसके पास घास पर बैठ गई। वह भी मेरे पास आकर बैठ गया। वह बहुत गर्म था। मैंने उसके नरम सींगों को हाथ लगाया। हमने साथ में बहुत देर तक बातें कीं। मैंने उसे बताया कि मुझे चॉकलेट और कार्टून बहुत पसंद हैं। हिरण ने अपनी बड़ी आँखें घुमाई और मुझे लगता है कि उसे मेरी बातें बहुत पसंद आ रही थीं। जंगल में बहुत शांति थी और बस चिड़ियों की आवाज़ आ रही थी। मुझे लगा कि यह मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। जब शाम होने लगी, तो मम्मी-पापा मुझे ढूंढने लगे। वे खुश थे कि मैं मिल गई और मैंने उन्हें सब कुछ बताया। वे बहुत हैरान थे। उन्होंने कहा कि जानवर बहुत प्यारे होते हैं और अगर हम उन्हें प्यार दें, तो वे भी हमसे प्यार करते हैं। मैं घर वापस आ गई, लेकिन मैं उस दिन को कभी नहीं भूलूँगी जब मैं जंगल में अपने प्यारे दोस्त बारहसिंगे से मिली। मैं उससे मिलने फिर से जंगल जाऊँगी।
सच्ची दोस्ती
अनिका अग्रवाल, 11 वर्ष
एक दिन की बात है। एक छोटी लड़की का नाम रिया था। रिया को फूल बहुत पसंद थे। एक दिन वह जंगल में फूल लेने गई। जंगल बहुत सुंदर था। चारों तरफ पेड़-पौधे और रंग-बिरंगे फूल थे। रिया फूल तोड़ ही रही थी कि अचानक उसे एक सुंदर हिरन दिखाई दिया। हिरन बहुत प्यारा था। रिया हिरन को देखकर बहुत खुश हुई। वह धीरे-धीरे हिरन के पास गई और उसे फूलों का गुलदस्ता दिखाया। हिरन भी रिया को देखकर डर नहीं रहा था। रिया ने हिरन से कहा, “तुम बहुत अच्छे हो। क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?” हिरन चुपचाप रिया को देखने लगा। फिर वह रिया के पास आकर खड़ा हो गया। रिया ने उसे प्यार से सहलाया। दोनों बहुत खुश हुए। रिया ने हिरन को कुछ फूल खाने के लिए दिए। तभी अचानक जंगल में तेज हवा चलने लगी। रिया डर गई और रास्ता भूल गई। हिरन ने रिया को अकेला नहीं छोड़ा। वह आगे-आगे चलने लगा और रिया उसके पीछे चलती गई। थोड़ी देर बाद हिरन रिया को जंगल से बाहर ले आया। रिया अपने घर पहुँच गई। उसने हिरन को धन्यवाद कहा। उस दिन रिया को समझ आया कि सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में हमारा साथ दे।
सच्ची मित्रता
प्रिशा जैन, 8 वर्ष
एक दिन की बात है। एक छोटी-सी लड़की रिया अपनी माँ के साथ जंगल के पास बने पार्क में घूमने गई। रिया को फूल बहुत पसंद थे। वह रंग-बिरंगे फूलों का एक छोटा-सा गुलदस्ता बनाकर आगे बढ़ रही थी। तभी उसकी नजर एक सुंदर हिरन पर पड़ी। हिरन बहुत शांत और प्यारा था। रिया धीरे-धीरे उसके पास गई और उसे प्यार से फूल दिखाए। हिरन रिया से बिल्कुल नहीं डरा। दोनों में जैसे दोस्ती हो गई।
रिया रोज उस हिरन से मिलने जंगल के पास जाने लगी। वह उसके लिए फल और हरी पत्तियाँ भी ले जाती। हिरन भी रिया को देखकर खुशी से उसके पास आ जाता। एक दिन अचानक जंगल में तेज बारिश होने लगी। रिया रास्ता भूल गई और डरकर एक पेड़ के नीचे खड़ी हो गई। तभी वही हिरन उसके पास आया। वह आगे-आगे चलने लगा और रिया उसके पीछे चलती गई। हिरन उसे सुरक्षित रास्ते से बाहर ले आया।
रिया के माता-पिता उसे ढूँढ़ते हुए वहाँ पहुँच गए। अपनी बेटी को सुरक्षित देखकर वे बहुत खुश हुए। रिया ने अपने माता-पिता को बताया कि उसके हिरन दोस्त ने उसकी मदद की। रिया ने हिरन को प्यार से गले लगाया और कहा, “सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में हमारा साथ दे।” उस दिन से रिया और हिरन की दोस्ती और भी गहरी हो गई।
हिरण की खुशी
निया शर्मा, 8 वर्ष
एक बार की बात है एक छोटी सी लड़की थी उसका नाम नैना था। उसके घर के पास ही एक घन और सुंदर पार्क था। नैना अक्सर वहां खेलने जाती थी। वह पार्क अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता था। वहां हर तरफ गुलाब के फूल ही फूल थे। एक बार नैना उसे पार्क में गुलाब के फूलों को देख रही थी, तभी अचानक झाड़ियां के पीछे से कोई आवाज आती है। नैना हिम्मत करके जब पीछे देखी है तो उसे घायल हिरन दिखता है। नैना उसकी मदद करनी चाहती थी लेकिन वह इतनी छोटी थी कि कर नहीं सकती थी। तभी नैना को उसकी मां की बात याद आती है छोटी उम्र में हम कुछ भी काम कर सकते हैं अगर हमारे मन में विश्वास है तो। नैना को अपनी मां की बात पर और अपने आप पर पूरा विश्वास था कि वह काम कर सकती है। उसने इतने भारी हिरण को उठाया। अपनी दादी के पुराने नुस्खे को करके उसको जहां लगी थी वहां पर लेप दिया। पल भर में वह हिरण खड़ा हो गया। नैना ने जो गुलाब के फूल इकट्ठे कर थे वह नैना ने हिरण को दिए। हिरण ने खुशी-खुशी उसे अपने मुंह में दबा दिया।
Updated on:
24 Sept 2026 03:11 pm
Published on:
24 Sept 2026 03:10 pm
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