
किताबें हैं सबसे अच्छी दोस्त और आपका शिक्षक
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता—93
बच्चों पढ़ने—लिखने के लिए अक्सर घर के बड़े और स्कूल के टीचर आपसे कुछ न कुछ कहते होंगे। कभी सोचा है कि पढ़ना और लिखना इतना जरूरी क्यों है? दरअसल, किताबें पढ़ना दुनिया को समझने जैसा है। हम जितना पढ़ते जाते हैं, हमारे विचार उतने ही विकसित होते जाते हैं। यहां हम सिर्फ कोर्स की किताबों की बात नहीं कर रहे, साहित्य, इतिहास, कला से जुड़ी कोई भी किताब आपको अलग दुनिया में ले जाती है। आप कॉमिक्स भी पढ़ते हैं तो बहुत कुछ नया सीखते हैं। इन्हीं किताबों से लगाव के लिए परिवार परिशिष्ट के 26 अगस्त के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
दादाजी की कहानियां
स्नेहा गर्ग, उम्र 9 वर्ष
रोहन अपने मां-बाप का इकलौता लड़का था। उसके मम्मी पापा दोनों सर्विस पर चले जाते तो वह स्कूल से आकर अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता था। घर में एक आया थी, लेकिन वह घर के कामों में व्यस्त रहती थी। हालांकि घर में एक छोटा खरगोश चीकू खरगोश भी उसका दोस्त था, जिसके साथ रोहन स्कूल से आकर खेलता था। रोहन ने अपने पापा से सुना था कि उसके दादाजी कहानी लिखते थे और उनकी एक किताब उनके पापा के पास थी। एक दिन रोहन जब स्कूल से आया तो उसने सोचा कि क्यों ना दादा जी की कहानियों की किताब ढूंढ कर उसको पढ़ा जाए। बस फिर क्या था रोहन ने अपने पापा की रखी सारी किताबों में दादाजी की कहानियों की किताब को ढूंढना शुरू किया। आखिरकार रोहन को दादाजी की कहानियों की किताब मिल गई। रोहन खुशी से झूम उठा। रोहन ने उस किताब को पढ़ना शुरू किया। दादाजी की सारी कहानियां बहुत शिक्षाप्रद थी। अब रोहन जब भी स्कूल से आता वह थोड़ी देर चीकू के साथ खेलता फिर दादाजी की शिक्षाप्रद कहानियां उसे बहुत मजा देती।
नकली किताबें
निवेदिता, 9 वर्ष
एक समय की बात है एक लड़का था उसका नाम था अरुण। एक दिन अरुण सोकर उठा और उसने देखा उसकी सारी किताबें गिरी हुई है। अरुण सच में पड़ गया कि यह किताबें किसने गिराई और उसने ज्यादा नहीं सोचा और किताबें वापस रख दी। जब वह खेल के वापस आया तो उसने देखा उसकी किताबें फिर से गिरी हुई है। वह किताबें रखना वापस गिर जाती ऐसा बार-बार होता। अरुण अपने दोस्तों को यह पूरी बात बताता है। इसका एक दोस्त जिसका नाम अजय था वह बताता है कि उसके चचेरे भाई के साथ भी एक बार ऐसा ही हुआ था उसने सारी किताबें पढ़ी और सब सही। अरुण भी ऐसा ही करता है लेकिन कुछ नहीं बदलता। उसकी नजर एक अलग सी किताब पर जाती है जो कभी नहीं गिरी। वह किताब किताबों की दुनिया के बारे में थी। जो घटना और उनके साथ हो रही थी उसे किताब में भी उसी के बारे में लिखा था। अरुण अपने दोस्तों को बताता है कि उसकी किताबें किताबें की दुनिया में चली गई है और यह किताबें नकली है। सारे दोस्त अरुण के साथ किताबों की दुनिया में चलने को तैयार हो जाते हैं। वह सब नशे के हिसाब से किताबों की दुनिया में जाते हैं। और किताबें बदलकर वापसले आते हैं। तब तक रात हो चुकी थी। सब अपने-अपने घर जाते हैं और सो जाते हैं। अरुण जब सुबह उठता है तो उसे पता चलता है कि यह सब एक सपना था। अरुण ने इतना रोमांचक सपना आज से पहले कभी नहीं देखा था।
सही जगह पर किताबें
जयनाम डांगी, 12 वर्ष
एक दिन राहुल अपने कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहा था। उसे अपनी हिंदी की किताब चाहिए थी। वह किताबों की अलमारी के पास गया और किताब ढूंढ़ने लगा। किताब खोजते-खोजते उसने अलमारी की कई किताबें बाहर निकाल दीं। आखिरकार उसे अपनी किताब मिल गई। वह खुशी से किताब लेकर पढ़ने बैठ गया। लेकिन उसने बाकी किताबों को फर्श पर ही छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद उसकी माँ कमरे में आईं। फर्श पर किताबें देखकर उन्होंने राहुल को समझाया कि किताबों को इधर-उधर नहीं छोड़ना चाहिए। राहुल को अपनी गलती समझ में आ गई। उसने तुरंत सारी किताबें उठाईं और उन्हें साफ-सुथरे ढंग से अलमारी में रख दिया। इसके बाद उसने अपना कमरा भी व्यवस्थित किया।
राहुल ने मां से कहा, अब मैं हमेशा अपनी किताबों को सही जगह पर रखूंगा।
चीकू की किताबें और अलमारी
शौर्य सोनी, 12 वर्ष
एक छोटा और चंचल लड़का था, जिसका नाम चीकू था। चीकू को खेलने-कूदने और नई-नई चीज़ों के बारे में जानने का बहुत शौक था। उसके जन्मदिन पर उसके पिताजी ने उसे एक सुंदर लकड़ी की अलमारी और बहुत सारी रंग-बिरंगी किताबों के सेट उपहार में दिए। पिताजी ने कहा, चीकू, यह तुम्हारी अपनी किताबों की अलमारी है। इसे हमेशा सजाकर रखना। चीकू बहुत खुश हुआ। उसने अपनी अलमारी के ऊपर अपनी एक प्यारी सी तस्वीर लगाई। अलमारी के एक कोने में उसने अपना पसंदीदा खिलौना 'बनी' (खरगोश) भी रख दिया। चीकू हर दिन स्कूल से आने के बाद अपनी अलमारी को साफ करता और किताबों को सलीके से रखता था। धीरे-धीरे चीकू को किताबों से लगाव होने लगा। जब भी वह अलमारी से कोई नई किताब निकालता, उसे लगता जैसे वह एक नई और जादुई दुनिया में कदम रख रहा है। किताबों की कहानियों ने उसे कभी राजा-रानी के महलों की सैर कराई, तो कभी अंतरिक्ष के तारों तक पहुँचाया। किताबों को पढ़ते-पढ़ते चीकू के चेहरे पर एक अनोखी मुस्कान आ जाती थी, ठीक वैसी ही जैसी इस चित्र में दिख रही है। इस आदत की वजह से चीकू न सिर्फ अपनी पढ़ाई में तेज़ हो गया, बल्कि वह एक समझदार और ज़िम्मेदार बच्चा भी बन गया। उसने सीख लिया था कि अलमारी में सजी हुई किताबें ही उसकी सबसे सच्ची और सबसे अच्छी दोस्त हैं।
मम्मी की सीख
वर्षा मांजू, 12 वर्ष
एक बार रोहन अपने कमरे में खेल रहा था। उसके पापा जब रोहन के कमरे में आए तो " "सब सामान बिखरा हुआ देखकर उन्होंने रोहन को डाँटा। फिर रोहन नाराज होकर अपनी मम्मी के पास गया, तो उसकी मम्मी ने समझाया कि जब हम अपने कमरे को साफ-सुथरा रखते हैं तो कमरा देखने में भी अच्छा लगता है और गंदगी भी नहीं फैलती रहती। रोहन अपनी मम्मी की बात ध्यान से सुनता है और इस सीख के लिए मम्मी को धन्यवाद भी करता है। फिर अपना कमरा साफ करने में लग जाता है। वह रोज अपनी अलमारी में अपने कपड़े रखता और अपने खिलौने उनके स्थान पर रखता।
रोहन की मस्ती और फुर्ती
स्वस्तिका, 11 वर्ष
रोहन बहुत ही होनहार लड़का था उसका एक पालतू बिल्ला था जिसका नाम चीकू था। एक दिन की बात है रोहन के मम्मी-पापा और उसकी बहन चुनमुन किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे। घर पर केवल रोहन और उसका बिल्ला चीकू ही था। दोनों ने घर पर रहकर काफी सारी मस्ती की जिससे घर का सामान भी इधर-उधर बिखर गया। लेकिन वे दोनों आपस में पूरा दिन खेलते रहे। शाम होने पर चुनमुन ने अपने भाई रोहन को फोन कर बताया कि वे थोड़ी देर में घर पर आने वाले हैं। यह जानकर रोहन डर गया क्योंकि उसने स्कूल का काम भी पूरा नहीं किया था। तुरंत ही उसने अलमारी में से सारी किताबें निकालकर अपने स्कूल का सारा होमवर्क किया और घर की तुरंत साफ सफाई करके मम्मी-पापा के लिए चाय भी बना कर रख ली। घर आने पर सारा सामान अच्छी तरीके से रखा होने पर रोहन की मम्मी पापा बहुत खुश हुए और उन्होंने रोहन को इनाम में बहुत सारी चॉकलेट और मिठाइयां दीं।
जादुई किताब से दोस्ती
यश सिंह, 7 वर्ष
रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला था। यश और चुनमुन इस बार राखी पर अपनी नानी के घर जाने वाले थे इस बात को लेकर वे दोनों बहुत ही उत्साहित थे। उन्होंने रंग—बिरंगी राखी और कपड़े भी खरीदें, लेकिन यश की परीक्षा होने के कारण इस बार राखी पर यश अपनी नानी के घर नहीं जा पा रहा था, जिस कारण से यश बहुत ही दुखी था। इस बात को जानकर यश की पालतू बिल्ली ने उसे एक जादुई किताब के बारे में बताया। यश ने तुरंत ही उसे जादुई किताब से सारा पाठ जल्दी-जल्दी याद कर लिया और सारा पाठ जाकर अपने स्कूल में मैडम को सुना दिया। जिससे मैडम बहुत ही खुश हुई और यश को भी राखी पर नानी के घर जाने की छूट दे दी। इसे जानकर यश और चुन्नू बहुत ही खुश हुए और भी खुशी-खुशी रक्षाबंधन पर अपनी नानी के घर चली गए।
किताबों की कद्र करो
श्रेया शुक्ला, उम्र 8 वर्ष
एक दिन एक बच्चे के कमरे में उसकी सारी किताबें इधर-उधर बिखरी हुई थीं। उसका होमवर्क भी बाकी था। उसे पढ़ाई और होमवर्क करना बिल्कुल पसंद नहीं था और कमरे की सफाई करने में भी उसे बहुत आलस आता था। एक दिन उसने अपना कमरा साफ करने का फैसला किया। सफाई करते समय उसे अपनी खोई हुई किताब मिल गई। उसकी माँ यह देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने उसे समझाया कि हमें अपनी किताबों और दूसरी चीजों की हमेशा कदर और देखभाल करनी चाहिए। अगर हम अपनी चीजों का सम्मान नहीं करेंगे, तो वे भी हमारे काम नहीं आएगी। उस दिन बच्चे को अपनी गलती समझ में आ गई और उसने अपनी किताबों को संभालकर रखने का वादा किया।
शरारती किताबें
भुवन, 10 वर्ष
रविवार की सुबह रोहन की नजर अपनी किताबों की अलमारी पर पड़ी। उसने देखा कि उसकी बहुत सी किताबें नीचे गिरी हुई है। अलमारी से कई किताबें बाहर भी झांक रही थी। जैसे ही उन्हें बाहर की दुनिया देखनी हो। रोहन ने कहा, आज मैं तुम्हें ठीक कर देता हूं। तभी उसके हाथ से एक किताब छूट कर नीचे गिर गई, उसे देखकर दूसरी किताब भी नीचे आ गिरी। उस समय रोहन हंसने लगा। पास बैठा उसका सफेद खरगोश उसके पास आकर बैठ गया, मानो जैसे वह भी किताब ठीक कर रहा हो। रोहन बोला, वाह आज तो इसे भी किताबें पढ़नी है। रोहन ने खरगोश को हटाया और किताबों को अपने विषय के अनुसार जमाने लगा। जैसे पहली पंक्ति में रोमांचक कहानियां, दूसरी में विज्ञान की किताबें तथा तीसरी में चित्र की किताबें। उसने नीचे गिरी हुई किताबें भी उठाकर रख दी। थोड़ी देर के बाद वह अलमारी बहुत सुंदर दिखने लगी। काम पूरा होने के बाद उसने अपनी एक कहानी की किताब निकाली और फर्श पर बैठकर पढ़ने लगा। उसके साथ उसका सफेद खरगोश भी उसकी बात सुनने लगा। रोहन हंसकर बोला, लगता है, तुम्हें भी पढ़ने की आदत लग गई है। बहुत खुश होकर दोनों रोज साथ बैठकर किताबों की दुनिया में नई-नई रोमांचक यात्राएं करने लगे।
यश और उसकी पुस्तकें
पायोशनिका कोठारी, 8 वर्ष
यश के पास कई तरह की पुस्तकें थीं। वह उन पुस्तकों को बुकशेल्फ में रख रहा था। शेल्फ के सबसे ऊपर एक तारा रखा हुआ था, और फर्श पर रखे मैट पर एक रुई वाला खरगोश बैठा था। उसके पास अपने परिवार की एक फोटो फ्रेम भी थी, जो बुकशेल्फ के ऊपर रखी थी। उसके पास लिखने की कॉपियाँ और होमवर्क की पुस्तकें भी थीं। छुट्टियों में वह बाजार जाता था ताकि और नई पुस्तकें खरीद सके और ढूंढ सके। उसे बहुत सारी किताबें पढ़ना पसंद था। जब वह बोर होता था, तो वह पुस्तकें पढ़ता था। उसे पुस्तकें पढ़ना बहुत अच्छा लगता है।
इस बार वह एक कहानी की पुस्तक ढूंढ रहा था जो उसके दोस्त ने उसे पढ़ने के लिए दी थी। और फिर, उसे वो पुस्तक डिब्बे में मिली, जो बुकशेल्फ में रखी हुई थी। वो बहुत खुश हुआ और उसने वो पुस्तक तारे और अपने प्यारे से खरगोश को सुनाई।
रोहन और उसका खरगोश
श्रद्धा खंडेलवाल, 11 वर्ष
एक बार की बात है रोहन नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। उसके पास एक छोटा सा सफेद रंग का खरगोश भी था। जो उसका बहुत अच्छा दोस्त था और उसके साथ रोहन घंटो - घंटो तक खेला करता था। रोहन एक बहुत ही अच्छा लड़का था जो अपने माता-पिता की सारी बातें मानता था। एक दिन रोहन की माता ने उससे कहा कि वह अपनी पुस्तकों को अपनी अलमारी में जमाऐ और इधर-उधर फैलाएं ना रखें। रोहन अपने कमरे में जाकर अपनी पुस्तक अपनी अलमारी में जमाने लगता है। उस दिन उसे और भी बहुत सारे काम थे जिस वजह से वह अपने खरगोश के साथ नहीं खेल पाया और उसके साथ वक्त भी नहीं बिता पाया, यह देखकर खरगोश बहुत उदास हो गया। रोहन ने जब अपने खरगोश को उदास देखा तो उसने सोचा कि अब उसके पास चाहे कितनी ही काम हो वह थोड़ा सा वक्त निकाल कर अपने खरगोश के साथ खेलेगा और अपने परिवार और खरगोश के साथ वक्त बिताएगा, बाद में जब रोहन अपने खरगोश के साथ खेलता है और उसके साथ वक्त बीताता है। इससे रोहन की थकान भी दूर हो जाती है और खरगोश भी खुश हो जाता है।
नेक काम की आदत
कीर्तिका, 8 वर्ष
एक बार की बात है रमेश बुक सेल्फ में बुक रख रहा था तभी उसने देखा कि उसका बचपन का खिलौना एक पौधे के पास पड़ा है। वह एक सितारे वाला खिलौना था तभी वह तेज चमकने लगा। रमेश यह देखकर हैरान हुआ तभी एक प्यारा खरगोश प्रकट हुआ। रमेश ने खुश होकर पूछा तुम यहां कैसे आए खरगोश ने सितारे की तरफ इशारा करके बताया यह सितारा जादुई है जो भी बच्चा अच्छा और नेक काम करने की इच्छा करता है तो यह जादुई सितारा उसे एक प्यारा दोस्त देता है। रमेश ने खरगोश को अपना दोस्त बना लिया। अब रमेश और खरगोश ने मिलकर बिखरी किताबें उठाई और उन्हें बुक सेल्फ में अच्छे से रख दिया। फिर रमेश ने फर्श पर बिखरे सामान और कमरे को साफ किया। अचानक जादुई सितारा फिर चमकने लगा। खरगोश खुशी से कूदने लगा और बोला वाह वाह रमेश समझ गया कि असली जादू सितारे वाले खिलौने में नहीं बल्कि अच्छे और नेक काम करने में है। उस दिन के बाद रमेश और खरगोश मिलकर रोजाना जरूरतमंद लोगों की मदद करके अच्छे और नेक काम करने लगे।
किताब संभालकर रखें
शिवांगी राठौड़, उम्र 11 वर्ष
एक रोहन नाम का लड़का था। वह अपनी किताबें और होमवर्क हमेशा बिखेर-बिखेर कर रखता था। उसे सफाई बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसके पास एक खरगोश भी था। वह उस खरगोश के कमरे को रोज़ साफ करता था। एक दिन उसकी मां ने उसके इस बर्ताव से परेशान होकर उसे बोला कि तुम अपनी किताबें और दूसरी वस्तुएं सही से रखा करो। पर रोहन ने उनकी बात नहीं मानी। फिर एक दिन उन्होंने रोहन को बुलाया और पूछा, तुम अपना सामान साफ़ नहीं रखते, तो खरगोश का कमरा क्यों साफ़ करते हो? रोहन ने जवाब दिया, क्योंकि वह गंदगी में नहीं रह सकता। तब मां ने उसे बोला, और तुम रह सकते हो? उसने बोला, मुझे तो आदत हो गई है। इस पर उसकी मां बोली, तो तुम्हें भी गंदगी की आदत छोड़नी चाहिए। रोहन ने मां से बोला, नहीं मां, मुझसे वैसे किताबें साफ़ नहीं होतीं। तो मां ने कहा, मैं खरगोश को बाहर छोड़ देती हूं। फिर जब वह कीचड़ और मिट्टी में गंदा हो जाएगा, तो उसकी साफ़ रहने वाली आदत छूट जाएगी। रोहन बोला, यह गलत आदत है। तो मां बोली, यही गंदी आदतें बुरी होती हैं, तो उस दिन के बाद से रोहन समझ गया। उसने अपनी किताबें और अन्य वस्तुएं जमाकर रखना शुरू कर दिया। अब उसका कमरा ही घर का सबसे साफ़ कमरा था। वह खरगोश की तरह अपने साथ सफाई भी रखने लगा।
Updated on:
05 Sept 2026 02:52 pm
Published on:
05 Sept 2026 02:52 pm
