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मुसीबत का साथी, एकता में छिपा राज

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 71 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (25 मार्च 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 71 में भेजी गई कहानियों में सताक्षी सोनी, हिमांशी कुमावत, अक्षर चौहान क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता रहे। इनके साथ सराहनीय कहानियां भी दी जा रही हैं।

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भारत

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Tasneem Khan

Mar 31, 2026

kids corner

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सोना की बिल्लियां
नाम- प्रिंस शर्मा
उम्र- 12 साल
एक छोटी सी लड़की थी जिसका नाम सोना था। वह अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से घर में रहती थी। सोना को बिल्लियों से बहुत प्यार था, और उसके घर में एक प्यारी सी बिल्ली थी जिसका नाम मिकी था। एक दिन, सोना खेलते-खेलते घर के बाहर चली गई। वह एक पेड़ के नीचे बैठ गई और मिकी को बुलाने लगी। मिकी भी उसके पास आ गई और सोना के साथ खेलने लगी। तभी, एक बड़ा सा कुत्ता वहां आया और मिकी को देखकर भौंकने लगा। मिकी डर गई और पेड़ पर चढ़ गई। सोना ने कुत्ते को भगाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। सोना ने हिम्मत करके कुत्ते के सामने खड़ी हो गई और कहा, जाओ यहां से! मिकी मेरी दोस्त है! कुत्ता डर गया और वहां से भाग गया। मिकी पेड़ से नीचे उतरी और सोना के पास आ गई। सोना ने उसे गले लगाया और कहा तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो, मिकी! उस दिन से, सोना और मिकी और भी अच्छे दोस्त बन गए। वे साथ में खेलते, खाते और सोते थे।
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नाम- अनुष्का चौधरी
उम्र- 13 साल
एक छोटी सी दया, बड़ी खुशी
एक सुहानी सुबह, एक छोटी लड़की अपनी बड़ी गुलाबी टोपी पहनकर बगीचे में घूमने निकली। बगीचा रंग-बिरंगे फूलों, हरी घास और ठंडी हवा से भरा हुआ था। उसे प्रकृति और जानवरों से बहुत प्यार था। चलते-चलते उसकी नजर एक छोटे से प्यारे पप्पी पर पड़ी। वह एक कोने में बैठा था और थोड़ा डरा हुआ लग रहा था, जैसे वह रास्ता भटक गया हो। उसकी मासूम आंखों में उदासी साफ दिखाई दे रही थी।
लड़की को उस पर दया आई। वह धीरे-धीरे उसके पास गई ताकि वह डर न जाए। उसने प्यार से कहा डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हू लड़की ने पास से कुछ खाने की चीज़ लाकर उसे दी। पहले तो पप्पी थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन लड़की की मीठी आवाज और मुस्कान देखकर वह धीरे-धीरे उसके पास आ गया। उसने खाना खाया और खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगा। लड़की ने उसे प्यार से सहलाया और उसके साथ खेलने लगी। अब पप्पी बिल्कुल खुश था। वह इधर-उधर दौड़ता और फिर वापस लड़की के पास आ जाता। उस दिन बगीचा जैसे और भी खूबसूरत लग रहा था, क्योंकि वहां एक नई दोस्ती बन चुकी थी, धीरे-धीरे यह उनकी रोज़ की आदत बन गई। लड़की जब भी बगीचे में आती, पप्पी उसका इंतजार करता। उनकी यह प्यारी दोस्ती दोनों के जीवन में खुशियां भर देती थी।
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नन्ही खुशी और उसका साथी
नाम - प्रवीण कुमार
उम्र - 10

एक सुनहरी सुबह, नन्ही खुशी एक बड़े से नारंगी हैट और अपने पसंदीदा जामुनी कपड़ों में बगीचे में खेलने निकली। उसके साथ उसका प्यारा कुत्ता, टॉफी भी था। बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले थे। खुशी ने धीरे से एक सुंदर फूल तोड़ा और उसे बड़े प्यार से टॉफी की ओर बढ़ाया। टॉफी अपनी छोटी सी पूँछ हिलाकर उस फूल को सूंघने लगा। यह देख खुशी मुस्कुरा उठी। उन दोनों की निस्वार्थ दोस्ती ने उस छोटे से बगीचे को खुशियों से भर दिया।
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दो प्यारे दोस्त

नाम- जयश्री कौशिक
उम्र- 11 वर्ष

एक छोटे से गाँव में मीना नाम की एक छोटी सी लड़की रहती थी। उसे प्रकृति से बहुत प्यार था। एक दिन, तेज़ धूप में, वह एक बड़े से बगीचे में टहलने निकली। उसने एक बड़ी सी टोपी पहनी हुई थी ताकि वह धूप से बच सके। चलते-चलते वह थक गई और फूलों के बीच एक शांत जगह पर बैठ गई।
बैठे-बैठे उसने देखा कि फूलों के चारों ओर रंग-बिरंगी तितलियाँ मंडरा रही थीं और मधुमक्खियां फूलों से रस ले रही थीं। उसने महसूस किया कि प्रकृति कितनी सुंदर और शांत है। उसे लगा जैसे फूल उसे अपनी कहानी सुना रहे हों। वह उन फूलों की खुशबू में खो गई और उसे अपने सारे काम याद आने लगे।
तभी उसकी नज़र एक छोटी सी चिड़िया पर पड़ी जो घोंसला बना रही थी। मीना को बहुत खुशी हुई। उसने सोचा कि हमें भी इस छोटी सी चिड़िया की तरह मेहनत करनी चाहिए। वह अब खुश थी और उसने ठान लिया कि वह हमेशा प्रकृति की रक्षा करेगी। उसने अपनी कहानी घर जाकर डायरी में लिखी और सोचा कि वह इसे पत्रिका में भी भेजेगी।
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नन्ही मानसी और उसका प्यारा दोस्त
नाम- धर्मराज कुमावत
उम्र 10 वर्ष
एक सुनहरी दोपहर, मानसी बगीचे में खेल रही थी उसने अपनी पसंदीदा टोपी और बैंगनी फ्रॉक पहनी थी बगीचे की हरियाली और खिले हुए फूलों के बीच मानसी बहुत खुश थी वह एक नन्हे फूल को निहार रही थी। अचानक उसे झाड़ियां के पास एक हल्की सी आवाज आई। मानसी ने पास जाकर
देखा तो वह एक छोटा सा कुत्ता बैठा था। वह थोड़ा-थोड़ा डरा हुआ लग रहा था। मानसी ने अपना हाथ उसकी और बढाया और उसे सहलाया उसकी प्यार भरी छुअन ने कुत्ते का डर दुर कर दिया। मानसी ने उस नन्हे कुत्ते का नाम शेरु रखा। जल्द ही दोनों गहरे दोस्त बन गए मानसी ने महसूस किया कि बेजुबान जानवरों को प्यार देने में जो खुशी मिलती है वह सबसे अनमोल है उस दिन से मानसी और शेरु की दोस्ती पूरे मोहल्ले में मशहूर हो गई।
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नाम- प्रवीण
उम्र- 11 वर्ष
एक सुहानी सुबह थी। वातावरण में शीतलता और हरियाली फैली हुई थी। एक छोटी लड़की अपने बगीचे में टहल रही थी। उसने सिर पर एक बड़ी सुंदर टोपी पहन रखी थी और वह प्रकृति का आनंद ले रही थी।
अचानक उसकी नजर एक छोटे से कुत्ते पर पड़ी, जो चुपचाप बैठा हुआ था। वह कुत्ता बहुत उदास और कमजोर लग रहा था। लड़की के मन में करुणा जाग उठी। वह धीरे-धीरे उसके पास गई और उसे डराने के बजाय प्यार से बुलाने लगी।
शुरुआत में कुत्ता थोड़ा सहमा हुआ था, लेकिन लड़की के स्नेहपूर्ण व्यवहार ने उसका डर दूर कर दिया। लड़की ने उसे सहलाया और पास में पड़े फूल को दिखाकर उसका ध्यान आकर्षित किया। कुत्ता अब सहज महसूस करने लगा और अपनी पूंछ हिलाने लगा।
उस दिन के बाद लड़की रोज उस कुत्ते के पास आती। वह उसे भोजन देती, उसके साथ खेलती और उसका ध्यान रखती। धीरे-धीरे कुत्ता स्वस्थ और प्रसन्न हो गया। समय के साथ दोनों के बीच गहरी मित्रता हो गई। अब वे हमेशा साथ रहते और खुश रहते।
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सारा और उसका नन्हा साथी
निमिषा पाटीदार
उम्र 8 वर्ष
एक सुनहरी दोपहर, सारा अपने पसंदीदा बगीचे में टहल रही थी। उसने अपनी बड़ी सी नारंगी टोपी पहनी हुई थी, जो उसे तेज़ धूप से बचा रही थी। सारा को प्रकृति से बहुत प्यार था और वह अक्सर घंटों फूलों के बीच बिताया करती थी।
बगीचे की हरी घास पर बैठते हुए, सारा की नज़र एक छोटे से नन्हे पिल्ले पर पड़ी। वह पिल्ला बहुत ही प्यारा और चंचल था। सारा ने धीरे से एक सुंदर सा लाल फूल तोड़ा और उसे प्यार से पिल्ले की ओर बढ़ाया।
नन्हा पिल्ला अपनी पूंछ हिलाते हुए बड़े ध्यान से उस फूल को देख रहा था। सारा की आँखों में ममता थी और पिल्ले के चेहरे पर जिज्ञासा। उस पल, बगीचे की शांति में एक अनमोल दोस्ती की शुरुआत हो रही थी। सारा ने महसूस किया कि खुशियाँ अक्सर इन छोटी-छोटी चीज़ों और बेज़ुबान दोस्तों के साथ में ही छिपी होती हैं।
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हार्दिक शर्मा
उम्र 9 वर्ष
एक बार की बात है। एक लक्षिता नाम की बच्ची थी। वह नौ वर्ष की थी। उसे जानवर बहुत पसंद थे। वह एक दिन किसी मैदान में गई। वहाँ पर उसे एक कुत्ते का बच्चा मिला, जो बहुत प्यारा था। परन्तु उसने देखा की उस बच्चे के पैर पर किसी पत्थर से चोट लगी हुई थी। लक्षिता अपने घर से कुछ दवाईयाँ और पट्टी ले आई और कुत्ते के चोट पर लगा दी। कुछ दिन बाद वह दोनो काफी अच्छे मित्र बन गए। अब कुत्ते का बच्चा भी काफी हद तक ठिक हो गया था। लक्षिता ने उस बच्चे का नाम जैक रख दिया। जैक अब खुश रहता था। एक दिन कुछ नगर निगम के कर्मचारी आए जो जैक को लेकर जा रहे थे। लक्षिता ने उन्हें देख लिया और वहा जाकार जैक को उनसे छुड़ा कर घर लेकर आ जाती है। जैक जो डर गया था। वह अब बहुत खुश हो गया। उसे अब डरने की जरूरत नहीं थी। वह लक्षिता के साथ उसके घर में रहता था। अब जैक और लक्षिता बड़े हो गए थे। लक्षिता जैक का बहुत खयाल रखती थी। एक दिन उन्के घर पर कुछ चोर आ गए जैक उस समय सो रहा था। अचानक चोरो से कुछ आवाज हो गई जैक चोरो पर टूट पड़ा चोर डर कर भाग गए। चोरी होने से बच गई भाग गए गई ।
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लिली के साथ का सुहाना सफर
हिमांशी सोनी
10 वर्ष
एक बार की बात है, एक छोटी सी लड़की थी जिसका नाम लिली था। अपने दोस्तों से मिलना-जुलना बहुत पसंद था। एक दिन वो बगीचे में खेल रही थी। वहां उसे एक छोटा सा, घुमशुदा कुत्ता मिला। कुत्ते के गले में 'पैचेस' लिखा हुआ एक पत्ता था। लिली ने पैचेस के साथ खेलना शुरू किया और उसे बगीचे में फूल दिखाए। लिली को मजा आ रहा था. पैचेज़ भी ख़ुश लग रहा था। लिली को एक बड़ा सा लाल फूल बहुत अच्छा लगा और उसने तोड़ कर पैचेस को देने का सोचा। वो डर रही थी, उसे डर लग रहा था कि कहीं उससे गलती न हो जाए। लेकिन फिर भी उसने फूल तोड़ने का फ़ैंसला किया और पैचेस को दे दिया। पैचेज लिली से फूल लेकर बहुत खुश हुआ। पैचेज़ को लिली की बात बहुत अच्छी लगी। उसके बुरे डोनो ढेर सारे फूल और पत्ते इकठ्ठे करने लगे। डोनो बगीचे के मजा लेने लगे। तभी लिली को ध्यान आया कि पैचेस को उसके मालिक के पास चोदना है। तोह उसने ढूढ़ना शुरू किया। सब जगह ढूंढने के बाद उसे कोई नहीं मिला तो वो एक पुलिस वाले के पास चली गई। पुलिस वाले ने बोला कि कल आके मेरे पास लेना। तो वो अगले दिन गई और पुलिस वाले ने उसके मालिक के पास पोहंचा दिया। का ……………………………………………………………………………………………..
छोटी नन्ही और उसका नया दोस्त
काव्यराज सिंह चौहान
10 वर्ष
एक समय की बात है, गाँव के एक छोटे से घर में 'नन्ही' नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। वह बहुत ही दयालु और प्रकृति प्रेमी थी। एक सुनहरी दोपहर, जब सूरज की किरणें बाग में खेल रही थीं, नन्ही अपने रंगीन फ्रॉक और बड़ी सी टोपी पहनकर बगीचे में टहल रही थी।
अचानक उसकी नज़र झाड़ियों के पास बैठे एक छोटे से भूरे खरगोश पर पड़ी। खरगोश बहुत डरा हुआ और भूखा लग रहा था। नन्ही धीरे से उसके पास गई और बड़े प्यार से झुककर उसे देखने लगी। उसने प्यार से पुचकारते हुए कहा, "डरो मत नन्हे दोस्त, मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगी।" नन्ही दौड़कर अंदर गई और एक ताजी गाजर लेकर आई। उसने बड़े धैर्य के साथ गाजर खरगोश की ओर बढ़ाई। खरगोश ने धीरे-धीरे नन्ही पर भरोसा किया और गाजर कुतरने लगा। उस दिन से नन्ही और वह छोटा खरगोश पक्के दोस्त बन गए। नन्ही ने सीखा कि प्यार और धैर्य से हम किसी का भी दिल जीत सकते हैं।
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गुनगुन और टोमी
मोहम्मद मुजम्मिल शेख
9 वर्ष
एक दिन गुनगुन अपनी माँ के साथ पार्क घूमने जा रही थी। तभी अचानक सामने से एक तेज रफ्तार कार आई और सड़क के किनारे बैठी एक कुतिया और उसके बच्चे को टक्कर मार दी। यह देखकर गुनगुन और उसकी माँ तुरंत कुतिया और उसके बच्चे को अस्पताल ले गईं, लेकिन वहाँ पहुँचने पर कुतिया की मृत्यु हो गई। गुनगुन को यह देखकर बहुत दुःख हुआ। वह उस कुतिया के बच्चे को अपने घर ले आई और उसका नाम “टोमी” रख दिया। साथ रहते-रहते गुनगुन और टोमी बहुत अच्छे दोस्त बन गए। कुछ समय बाद टोमी बड़ा हो गया।
फिर एक दिन गुनगुन अपने घर पर थी, तभी कुछ चोर घर में घुस आए। टोमी ने जोर-जोर से भौंककर चोरों को भगा दिया। टोमी की आवाज़ सुनकर कॉलोनी के लोग बाहर आ गए और चोरों को भागते हुए देख लिया।सभी लोगों ने टोमी को प्यार किया और गुनगुन की बहुत प्रशंसा की। इससे गुनगुन का पशुओं के प्रति प्रेम और भी बढ़ गया। वह अब और भी जानवरों की देखभाल करने लगी कुछ समय बाद सरकार ने गुनगुन को उसके पशु प्रेम के लिए पुरस्कार दिया। यह देखकर गुनगुन का परिवार बहुत खुश हुआ।
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हितार्थ शुक्ला
10 वर्ष
एक छोटे से गाँव में गुड़िया नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। उसे प्रकृति से बहुत प्यार था। हर सुबह वह अपने पुराने, बड़े से टोपी पहनकर खेतों और बगीचों में घूमने निकल जाती थी। एक दिन वह ऐसे ही टहलते हुए एक छोटे से भूरे रंग के पिल्ले से मिली। पिल्ला बहुत उदास बैठा था, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा हो।
गुड़िया ने प्यार से उसे एक फूल दिखाया और मुस्कुराते हुए उसके पास बैठ गई। पहले तो पिल्ला थोड़ा डर गया, लेकिन धीरे-धीरे वह गुड़िया के पास आ गया। गुड़िया ने उसके सिर पर हाथ फेरा और उसे दुलारने लगी। पिल्ले की आँखों में अब उदासी की जगह खुशी दिखाई देने लगी।
गुड़िया रोज उस पिल्ले से मिलने आने लगी। वह उसके लिए कभी रोटी लाती, तो कभी उसे फूल दिखाकर खेलती। धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए। पिल्ला अब गुड़िया को देखते ही पूँछ हिलाने लगता और उसके साथ खेलने लगता।
एक दिन गाँव के लोगों को पता चला कि यह पिल्ला खो गया था। उन्होंने उसके असली मालिक को बुलाया। मालिक ने आकर पिल्ले को पहचान लिया और बहुत खुश हुआ। गुड़िया को थोड़ा दुख हुआ, लेकिन उसे यह जानकर खुशी भी हुई कि उसका दोस्त अपने घर वापस जा रहा है।
उस दिन गुड़िया ने सीखा कि सच्चा प्यार वही होता है, जो किसी को खुश देखना चाहता है, चाहे वह हमारे साथ रहे या नहीं।
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कुमकुम कंवर
11 साल
एक लड़की थी । उसका नाम चिंकी था । वह रोज फूलो के बगीचे मे पानी देने जाती थी। एक दिन चिंकी उदास हो कर फूलो के बगीचे मे जा बैठी तभी उसने देखा की एक भूरे रंग का कुत्ता उसे देख रहा था। पर चिंकी को ऐसा लगा पर था नहीं। वह कुत्ता उसे नहीं बल्की एक लाल रंग के फूल को देख रहा था और उसे तोडने की कोशिश कर रहा था और उससे वह फूल तोड कर दे दिया और वह कुत्ता वहाँ से खुशी-खुशी चला गया ।
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सुबह की सुस्ती और अलार्म का शोर
नित्यम शर्मा
उम्र 7 वर्ष
सूरज की पहली किरण अभी खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में आई ही थी कि मेज पर रखी अलार्म घड़ी 'ट्रिंग-ट्रिंग' करके शोर मचाने लगी। यह आवाज़ चुटकी के लिए एक नई शुरुआत का संकेत थी, लेकिन मुनमुन के लिए यह दुनिया का सबसे बुरा शोर था।
चुटकी (बड़ी बहन) झट से उठ बैठी। उसने एक लंबी जम्हाई ली, अपनी बाँहें ऊपर की ओर फैलाकर अंगड़ाई ली और मुस्कुराते हुए दिन का स्वागत किया। चुटकी अनुशासन की पक्की थी; उसे सुबह की ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट बहुत पसंद थी। उसने अपने नीले कंबल को सलीके से हटाया और बिस्तर से उतरने ही वाली थी।
दूसरी तरफ थी छोटी मुनमुन। मुनमुन के लिए "सुबह" का मतलब था—अभी तो रात बाकी है! अलार्म बजता रहा, चुटकी बिस्तर से उठ भी गई, लेकिन मुनमुन अपने फूलों वाले पीले कंबल में दुबकी हुई गहरी नींद के मजे ले रही थी। उसके चेहरे पर एक मासूम सी मुस्कान थी, जैसे वह किसी चॉकलेट के पहाड़ का सपना देख रही हो।
चुटकी ने धीरे से मुनमुन के कान के पास जाकर कहा, "मुनमुन, उठो! देखो सूरज कितना ऊपर आ गया है।"
मुनमुन ने सोते-सोते ही अपना मुँह और ढँक लिया और बुदबुदाई, "दीदी, बस पाँच मिनट और… सूरज को कहो थोड़ी देर बाद आए।"
चुटकी ठहाका मारकर हँस पड़ी। वह समझ गई कि मुनमुन को जगाना आज भी एक बड़ी चुनौती है। उसने खिड़की के पर्दे हटा दिए ताकि धूप सीधे मुनमुन के चेहरे पर पड़े। आखिरकार, रोशनी और चुटकी की हँसी ने मुनमुन की नींद को हरा ही दिया।
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प्यार भरी सिख
हानिशा खत्री
उम्र -8
एक दिन पिंकी की मां ने उसे पढ़ाई ना करने पर डांट लगाई । जिससे वह गुस्सा होकर अपने घर के पास वाले गार्डन में चली गई। उसे एक छोटा सा पालतू कुत्ता दिखाई दिया। वह पालतू कुत्ता पिंकी के पास आया और उसके साथ मस्ती करने लगा और पिंकी के साथ खेलने की कोशिश करने लगा। पिंकी को उसके साथ खेलने में मजा आ रहा था। पिंकी सोचने लगी कि यह कुत्ता अकेला है फिर भी खुश है। पिंकी को विचार आया की मां के डांटने पर उसे गुस्सा नहीं होना चाहिए था। मां तो मां होती है। वह घर जाकर मां के गले लग जाती है और मां से माफी मांगती है।
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बडी टोपी और एक प्यारा सा तोहफा
मानशी यादव
11 वर्ष
मैदान की नरम घास पर राध्या अपनी बड़ी सुनहरी टोपी पहनकर बैठी थी। उसके पास उसका सबसे अच्छा दोस्त बैठा था वह एक छोटा सा कुत्ता था। राध्या ने एक लाल फूल तोड़ा और अपने दोस्त की और बढ़ा दिया। एक फूल ने उनकी दोस्ती की पूरी कहानी कह दी। कुत्ते ने पूंछा हिलाई और उसे ऐसा सूंघा की वह दुनिया का सबसे प्यारा तोहफा हो। राध्या की टोपी के नीचे छोटी और प्यारी दुनिया थी।
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तुलसी और टिंकू जंगल के जानकार
धर्य लोधा
11 वर्ष
एक मंगलमय नाम के गाँव में एक 11 वर्ष की एक लड़की रहती थी। जिसका नाम तुलसी था वह पूरा दिन अपने खेत में काम करती थी और जब वह शाम को अपना काम खत्म करके घर आती तब वह अपने कुत्ते के साथ समय बिताती थी। उसके कुत्ते का नाम टिंकू था। तुलसी और टिंकू हर दिन एक ही बात सोचते थे कि पूरे गाँव में जंगल खत्म क्यूँ हो रहे हैं ? एक दिन तुलसी ने अपनी माँ से पूछा," कि हमारे गाँव में जंगल खत्म क्यूँ हो रहे हैं ? तुलसी की माँ ने बोला, " बेटी, कुछ अज्ञानी लोग पेड़ों को काट रहे हैं जिससे जंगल खत्म हो रहे हैं।" तुलसी ने बोला, अच्छा माँ ! तो इस तरह हमारे गाँव के जंगल खत्म हो रहे हैं I
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दया और प्यार से किसी का जीवन बदल सकता है
नाम- हिमांशु चौधरी
उम्र- 8 वर्ष
एक बार की बात है, एक प्यारी सी लड़की थी जिसका नाम गुड़िया था। उसे फूलों और जानवरों से बहुत प्यार था । हर सुबह वह अपनी बड़ी सी टोपी पहनकर बगीचे में घूमने जाती थी। एक दिन उसे झाड़ियों के पास से हल्की-सी सिसकने की आवाज़ सुनाई दी।
वह पास गई तो देखा कि एक छोटा सा भूरा पिल्ला बैठा था। वह बहुत डरा हुआ और भूखा लग रहा था। गुड़िया धीरे-धीरे उसके पास बैठ गई और अपने हाथ से एक छोटा सा फूल आगे बढ़ाया। पिल्ला पहले थोड़ा हिचकिचाया, फिर पूँछ हिलाने लगा। गुड़िया मुस्कुराई और बोली, “डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।”
वह पिल्ले को घर ले गई, उसे दूध और रोटी खिलाई और उसका नाम रखा — “फूलू”, क्योंकि वह फूल के पास मिला था । कुछ ही दिनों में फूलू बिल्कुल ठीक हो गया और हर जगह गुड़िया के पीछे-पीछे घूमता था। उस दिन के बाद गुड़िया कभी अकेली नहीं रही। उसे एक सच्चा दोस्त मिल गया था — छोटा सा, प्यारा सा, हमेशा खुश रहने वाला।
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प्रकृति से प्रेम
नाम- भव्या यादव
उम्र - 13

एक सुनहरी सुबह थी ‌। एक छोटे से शहर में एक लड़की रहती थी। उसका नाम स्वीटी था। स्वीटी को प्रकृति से बहुत प्रेम था। एक सुबह स्वीटी अपनी पसंदीदा हैट लगाकर गार्डन में टहलने निकली गार्डन में चारों ओर रंग-बिरंगे फूल पौधे लगे थे। और चारों तरफ पक्षियों के चहकने की आवाज आ रही थी। गार्डन में उसके साथ उसका पप्पू ब्राउन भी गया था। स्वीटी गार्डन के एक कोने में जाकर बैठ गई जहां सुंदर-सुंदर फूल लगे हुए थे। उसने एक फूल तोड़ा और उसकी खुशबू का आनंद लिया और फूल को निहारने लगी उसे ऐसा करता देख उसका पपी ब्राउन उसके पास आकर बैठ गया और ब्राउन भी फूल की खुशबू की आनंद लेने लगा और उसे प्यार से निहारने भी लगा।
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नन्ही रिया और जादुई टोपी
नाम- ध्रुवी
​एक सुंदर सा गाँव था, जहाँ नन्ही रिया अपनी दादी के साथ रहती थी। रिया को प्रकृति से बहुत प्यार था, लेकिन उसकी सबसे प्रिय चीज़ थी उसकी बड़ी सी गुलाबी टोपी, जिसे उसकी दादी ने खास उसके लिए बनाया था। रिया का मानना था कि वह टोपी जादुई है।
​एक खिली हुई दोपहर में, रिया अपने शरारती कुत्ते 'शेरू' के साथ बगीचे में खेल रही थी। रिया ने अपनी बैंगनी रंग की पसंदीदा पैंट पहनी थी और वह घास पर बैठकर छोटे-छोटे फूलों को निहार रही थी। तभी उसे घास के बीच एक नन्हा सा, मुरझाया हुआ पौधा दिखा।
​रिया ने अपनी बड़ी टोपी उतारकर उस नन्हे पौधे के पास रखी और धीरे से बुदबुदाई, "घबराओ मत नन्हे दोस्त, मेरी टोपी तुम्हें तेज़ धूप से बचाएगी।" उसने शेरू से कहा कि वह पौधे की रखवाली करे और खुद दौड़कर लोटे में पानी लेने गई।
​जब रिया वापस आई, तो उसने देखा कि शेरू चुपचाप उस पौधे के पास बैठा था। जैसे ही रिया ने पानी डाला, वह नन्हा पौधा खिल उठा। रिया को लगा जैसे उसकी टोपी ने सच में जादू कर दिया हो। उसे अहसास हुआ कि असली जादू उसकी टोपी में नहीं, बल्कि उसकी दयालुता और देखभाल में था।
​सूरज ढलने लगा था, और रिया अपनी बड़ी टोपी पहनकर शेरू के साथ घर की ओर चल दी। उस दिन उसने सीखा कि छोटे-छोटे नेक काम दुनिया को और भी सुंदर बना सकते हैं।
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एक बार की बात है एक लड़की थी
गौरवांश शर्मा
उम्र नौ वर्ष
उसका नाम जैनी था | वह अपने पालतू कुत्तेशेरू के साथ नदी के पास बैठी थी और उस लड़की के आस-पास अलग अलग तरीके के रंग बिरंगे फूल गिरे थे और जैनी ने एक फूल चुना और अपने शेरू को दिखाया और वह फूल दोनो को बहुत पसंद आया और वह फूल की दुकान पर गई और वह उस फूल का बड़ा पौधा लेकर अपने घर आ गई और उसने अपने बगीचे में लगा दिया ।
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