जयपुर

एक मददगार की आप बीती… मजदूरों को सरकारी सिस्टम पर विश्वास नहीं, इंतजार कब तक करें?

-एक व्यक्ति ने मदद करना चाही, लेकिन चाहकर भी साधन का इंतजाम नहीं करा पाए
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May 15, 2020
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जयपुर. लॉकडाउन के बीच मजदूरों का पलायन जारी है। सरकारी सिस्टम पर मजदूरों का विश्वास नहीं है। वे पैदल ही घर तक का सफर तय करने निकल पड़े हैं। ऐसे ही एक मजदूरों के समूह से शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी राजीव रावत ने बात की। उनकी मदद करना चाही। साधन मुहैया कराने के लिए वे शहर के दो थानों से लेकर बस का पास बनवाने के लिए कलक्ट्रेट तक गए। इधर, मजदूरों को डर था कि सरकारी साधन का सहारा लिया तो क्वॉरंटीन रहना पड़ेगा। सरकारी सिस्टम भी ऐसा था कि निजी बस का भी इंतजाम नहीं हो पाया। रावत की चार घंटे की मशक्कत के बाद 50 लोगों के इस समूह को झांसी भेजने की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि जाते मजदूरों से उन्होंने कहा कि सब कुछ सही होने के बाद जब जयपुर आओ, तो आकर हमारे यहां काम करना।

समूह में बच्चे और महिलाएं भी
रावत ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि वे दोपहर दो बजे झालाना बायपास से गुजर रहे थे। यहां से 50 लोगों का समूह आगरा रोड की ओर जा रहा था। इसमें छोटे बच्चे और महिलाएं भी थीं। बातचीत में मजूदरों ने बताया कि वे झांसी जा रहे हैं। पैदल जाने के सवाल पर मजदूरों ने कहा कि १५ दिन पहले पंजीयन कराया था। कब तक इंतजार करें। इसके बाद रावत ने बस से भेजने की बात कही। वे गांधी नगर, ट्रांसपोर्ट नगर के बाद कलक्ट्रेट गए। मजदूरों को क्वॉरंटीने का डर सता रहा था। इस दौरान मजदूर टनल पार कर आगरा रोड पर पहुंच गए थे। आखिर में बस का इंतजाम नहीं हो पाया और मजदूरों का आगे का सफर भी पैदल ही जारी रहा।

हेल्प डेस्क बनाए प्रशासन
आगरा रोड पर सर्वाधिक पलायन: आगरा रोड से उप्र, मप्र, पश्चिम बंगाल, बिहार से लेकर नेपाल तक के लोगों की आवाजाही होती है। यहां प्रशासन को हेल्प डेस्क लगानी चाहिए। ताकि श्रमिकों की मदद हो सके।

Published on:
15 May 2020 07:02 am