जयपुर

Electoral Bonds : चुनावी चंदा देने में राजस्थान की कंपनियां भी आगे, शुरुआती पड़ताल में आए ये चौंकाने वाले आंकड़े?

Electoral Bonds: राजनीतिक पार्टियों को राजस्थान की कंपनियां और लोगों ने भी चुनावी चंदा (इलेक्टोरल बॉन्ड) दिया है। अब तक की जानकारी में सामने आया कि ऐसे चुनावी बॉन्ड 500 करोड़ रुपए से ज्यादा हैं।

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Mar 16, 2024

Electoral Bonds: राजनीतिक पार्टियों को राजस्थान की कंपनियां और लोगों ने भी चुनावी चंदा (इलेक्टोरल बॉन्ड) दिया है। अब तक की जानकारी में सामने आया कि ऐसे चुनावी बॉन्ड 500 करोड़ रुपए से ज्यादा हैं। इनमें भी बिजली मीटर, इलेक्ट्रिक उपकरण बनाने वाली कंपनी, सीमेंट व अन्य कंपनियां शामिल हैं। ऐसी कई कंपनियों के मालिकों ने अपने परिवारजन के नाम से भी चंदा दिया है। इनमें जीनस पावर, वंडर सीमेंट ग्रुप, श्रीसीमेंट सहित अन्य कंपनियां हैं। शुरुआती टॉप 60 में राजस्थान की दो कंपनी जीनस पावर और वंडर सीमेंट ग्रुप व उसके निदेशक शामिल हैं। बताया जा रहा है चुनावी चंदा देने में महाराष्ट्र और गुजरात की कंपनियां आगे रहीं।

-जीनस पावर- 34.5 करोड़
-वंडर ग्रुप (सीमेंट, मिनरल्स, मानमोस्टोंस व निदेशक)- 32 करोड़
-ओम मेटल- 9 करोड़
-मोहित मिनरल्स- 5 करोड़
-नवल किशोर अग्रवाल- 4 करोड़
-श्रीसीमेंट- 1.5 करोड़
-संजय अग्रवाल-1 करोड़
(अब तक पड़ताल के अनुसार)

चुनावी या इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम 2017 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री ने पेश की थी। 2 जनवरी 2018 को केंद्र सरकार ने इसे नोटिफाई किया। ये एक तरह का प्रॉमिसरी नोट होता है। इसे बैंक नोट भी कहते हैं। इसे कोई भी भारतीय नागरिक या कंपनी खरीद सकती है। दावा किया गया था कि इससे राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाली फंडिंग और चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान जाहिर नहीं की जाती है, इससे ये चुनावों में काले धन के इस्तेमाल का जरिया बन सकते हैं।

Published on:
16 Mar 2024 07:23 am
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