22 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan News : ‘जल महल’ में जल समाधि लेंगे सरकारी कर्मचारी! जानें भजनलाल सरकार से खिलाफ क्यों तेज़ हुआ आंदोलन?

राजस्थान के पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने 8 सूत्रीय मांगों को लेकर किया जयपुर कूच। जानें क्यों दी 7 जुलाई को जल महल में जल समाधि की चेतावनी।

4 min read
Google source verification
Rajasthan Panchayati Raj Employees Jal Samadhi Protest Jaipur CM House Gherao Details

File PIC

राजस्थान की भजनलाल सरकार के सामने इस वक्त सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य के ग्रामीण इलाकों की रीढ़ माने जाने वाले ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी पुरानी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला किया है। पिछले करीब 20 दिनों से 'स्वाभिमान बचाओ आंदोलन' के बैनर तले ब्लॉक और जिला स्तर पर पेन डाउन हड़ताल कर रहे इन कर्मचारियों ने अब राजधानी जयपुर कूच की रूपरेखा तैयार कर ली है। इस आंदोलन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य, प्रमाण पत्र बनाने के काम और पंचायती राज से जुड़े विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।

क्या है 'स्वाभिमान बचाओ आंदोलन'?

पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन (राजस्थान) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ा है। सरकार द्वारा ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित किए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' को कर्मचारियों ने ठप कर दिया है।

आंदोलन के जमीनी हालात कुछ इस प्रकार हैं:

  • पिछले 20 दिनों से प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक और अन्य मंत्रालयिक स्टाफ कार्यालयों में तो आ रहा है, लेकिन वे किसी भी सरकारी फाइल पर काम नहीं कर रहे हैं।
  • सरकार के महत्वपूर्ण शिविरों का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण इलाकों के लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
  • विभागीय स्तर पर आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) और वीबी जी राम जी बैठकों का भी कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से बहिष्कार जारी रखा है।

23 से 25 जून : जयपुर कूच का पूरा शेड्यूल

संगठन ने सरकार पर रणनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से जयपुर कूच की योजना बनाई है। आगामी 3 दिनों के भीतर पूरे राजस्थान से पंचायती राज के सरकारी बाबुओं का काफिला जयपुर में डेरा डालेगा।

संगठन द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम इस प्रकार है:

23 जून 2026 (मंगलवार शाम): इस दिन राजस्थान के सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री और जिला कोषाध्यक्ष अपनी जिला स्तरीय टीमों के साथ जयपुर के लिए रवाना होंगे।

24 जून 2026 (बुधवार): जयपुर पहुंचने के बाद समस्त प्रदेश कमेटी के सदस्य, जिलाध्यक्ष और महामंत्री राज्य सरकार के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष अपना आधिकारिक मांग पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन शाम को सभी ब्लॉक अध्यक्ष और ब्लॉक मंत्री अपनी कार्यकारिणियों के साथ जयपुर के लिए कूच करेंगे।

25 जून 2026 (गुरुवार): जयपुर पहुंचे सभी ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक महामंत्री और ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्य सचिवालय और विभिन्न विभागीय स्तरों पर अपनी मांगों के समर्थन में व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मांग पत्र सौंपकर दबाव बनाएंगे।

कर्मचारियों की ये हैं प्रमुख मांगें

मंत्रालयिक कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से केवल आश्वासनों के भरोसे काम कर रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में उनके कैडर को काफी मजबूत किया जा चुका है। कर्मचारी संगठन मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी और प्रशासनिक मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:

  1. उत्तराखंड पैटर्न लागू करना: कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग है कि राजस्थान के पंचायतीराज विभाग में भी उत्तराखंड राज्य की तर्ज पर मंत्रालयिक कैडर का पुनर्गठन किया जाए ताकि पदोन्नति के बेहतर अवसर मिल सकें।
  2. स्वतंत्र कार्य विभाजन और कैडर रिव्यू : विभाग में काम का बोझ बढ़ने के कारण एक स्पष्ट और स्वतंत्र कार्य विभाजन नीति बनाई जाए और पूरे कैडर की समीक्षा कर नए पद सृजित किए जाएं।
  3. अंतर-जिला स्थानांतरण नीति: पंचायती राज कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी और स्थाई अंतर-जिला तबादला नीति का निर्माण किया जाए ताकि बरसों से अपने गृह जिलों से दूर बैठे कर्मचारियों को राहत मिल सके।
  4. पदनाम में बदलाव: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत कनिष्ठ लिपिक के पद को अपग्रेड करते हुए उसे 'पदेन सचिव' या 'पदेन कार्यक्रम अधिकारी' घोषित किया जाए।
  5. वित्तीय भत्ते: कर्मचारियों के लिए नोशनल बेनिफिट्स को मंजूरी दी जाए, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम करने के बदले 'हार्ड ड्यूटी भत्ता' और 'अतिरिक्त पंचायत भत्ता' स्वीकृत किया जाए।

मुख्यमंत्री आवास का घेराव और 'जल समाधि'

यदि 23 जून से शुरू हो रहे जयपुर कूच और मांग पत्र सौंपने के दौर के बाद भी भजनलाल सरकार और प्रशासनिक अमले की तरफ से कोई सकारात्मक वार्ता या ठोस आदेश जारी नहीं होते हैं, तो संगठन ने आंदोलन को एक बेहद उग्र और ऐतिहासिक मोड़ देने का निर्णय लिया है।

संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों के अनुसार आगामी बड़े कार्यक्रम इस प्रकार प्रस्तावित हैं:

6 जुलाई 2026: राजस्थान भर से आए हजारों पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी जयपुर की सड़कों पर उतरेंगे और सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ेंगे।

7 जुलाई 2026: इस आंदोलन का सबसे चौंकाने वाला और संवेदनशील चरण 7 जुलाई को देखने को मिलेगा। कर्मचारियों ने घोषणा की है कि वे अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में जयपुर के ऐतिहासिक 'जल महल' के सामने एकत्रित होंगे और वहां 'जल समाधि' कार्यक्रम का आयोजन करेंगे।