
Asaduddin Owaisi and Amit Shah - File PIC
राजस्थान से सटे भारत-PAK बॉर्डर पर इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद इस अभियान को केंद्रीय गृह मंत्रालय और राजस्थान सरकार मिलकर अंजाम दे रहे हैं। इसके तहत बॉर्डर के 15 से 50 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में बिना वैध प्रशासनिक अनुमतियों के स्थाई निर्माणों को जमींदोज किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस-प्रशासन इस अभियान को सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से पूरा करने में लगे हैं। इसी अभियान के तहत हाल ही में जैसलमेर के नाचना थाना क्षेत्र के अंतर्गत कालरो की ढाणी में एक निर्माणाधीन अवैध मदरसे और बाड़मेर के गडरारोड उपखंड के मालाणा गांव में सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी बताया जा रहा है, वहीं अब इस पूरे मामले ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप अख्तियार कर लिया है।
राजस्थान के स्थानीय नेताओं के बीच इस कार्रवाई को लेकर चल रही खींचतान के बाद अब हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की भी एन्ट्री हो गई है। ओवैसी ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया है। ओवैसी ने सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की है।
असदुद्दीन ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए लिखा, "राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर और बाड़मेर में मस्जिदों, दरगाहों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर ढहाने की एक लहर सी चल पड़ी है। मैंने एआईएमआईएम के बीकानेर जिला अध्यक्ष शफी जमील कासमी से बात की है, जिन्होंने बताया कि बीकानेर में 4 मस्जिदें और फलौदी, जैसलमेर व बाड़मेर में 9 मस्जिदें और दरगाहें पहले ही ध्वस्त की जा चुकी हैं। खबरों के अनुसार सैकड़ों अन्य धार्मिक स्थलों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं। इन प्रशासनिक कार्रवाइयों के दायरे में जैसलमेर के रामगढ़-तनोट बाईपास रोड पर स्थित हजरत महमूद शाह जिलानी की लगभग 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक दरगाह भी आ रही है, जो कि बेहद चिंताजनक है।"
ओवैसी ने अपनी पोस्ट में सुरक्षा के तर्कों को खारिज करते हुए आगे लिखा, "इन ढांचों को गिराए जाने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधारों को सही ठहराया जा रहा है। हालांकि, इन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों में से कोई भी कभी भी इस तरह की किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहा है। केवल मुस्लिम इबादतगाहों को ही निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने पहले दावा किया कि कुछ ढांचे चरागाह भूमि पर बने हैं। लेकिन जिन मामलों में यह दिखाया गया कि ये ढांचे पूरी तरह से निजी संपत्ति पर स्थित हैं, वहां प्रशासन का आरोप कथित तौर पर आवश्यक अनुमतियों या सरकारी मंजूरियों की कमी पर स्थानांतरित हो गया। अमित शाह, ये भेदभावपूर्ण और लक्षित डिमोलिशन पूरी तरह से अवैध हैं और इन्हें तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए।"
सीमावर्ती जिलों में चल रहे इस बुल्डोजर एक्शन ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति को भी पूरी तरह से दो धड़ों में बांट दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बायतु से विधायक हरीश चौधरी ने इस पूरी प्रशासनिक मुहिम पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि दशकों से इन दुर्गम रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले गरीब और ग्रामीण तबके के लोगों के आस्था स्थलों को बिना किसी उचित वैकल्पिक संवाद के इस तरह अचानक ढहाया जाना सामाजिक ताने-बाने और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसके ठीक विपरीत, बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने इस 'ऑपरेशन क्लीन' का पूरी तरह से खुलकर समर्थन किया है। कैलाश चौधरी का तर्क है कि जब मामला देश की सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो, तो वहां किसी भी प्रकार की तुष्टिकरण की राजनीति या सामाजिक रियायत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध निर्माण की जांच करना और उसे हटाना सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन का संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है।
इस पूरे बड़े अभियान की रूपरेखा कुछ समय पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बीकानेर में आयोजित एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान तय की गई थी। इस बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव और सीमावर्ती जिलों (बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और फलौदी) के जिला कलेक्टर (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हुए थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के संवेदनशील बेल्ट के भीतर होने वाले किसी भी प्रकार के अनधिकृत और अवैध निर्माणों के खिलाफ पूरी तरह से 'जीरो-टॉलरेंस' नीति अपनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
सीमा सुरक्षा एजेंसियों (BSF) ने सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी, ड्रोन गतिविधियों, जासूसी और घुसपैठ की आशंकाओं के मद्देनजर बॉर्डर के नजदीक तेजी से पनपने वाले अवैध स्थाई ढांचों पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही थी।
इसी निर्देश के अनुपालन में जैसलमेर जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल और एसपी अभिषेक शिवहरे सहित अन्य सीमावर्ती जिला प्रशासनों ने कुल 102 सरहदी गांवों और ढाणियों का एक व्यापक तकनीकी और राजस्व सर्वे शुरू किया, जिसके तहत चरागाह (गोचर) भूमि और बिना वैध सीएलयू या स्थानीय पंचायत की एनओसी के बिना बने ढांचों को चिन्हित कर हटाया जा रहा है।
Updated on:
22 Jun 2026 12:03 pm
Published on:
22 Jun 2026 12:03 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
