जयपुर

क्लिक से क्लियरेंस तक लंबा इंतजार…डिजिटल सिस्टम में फंसी लोगों की उम्मीदें

शुरू की गईं नगर निगम की ऑनलाइन सेवाएं आज लोगों के लिए लंबा इंतजार बनती जा रही हैं। फायर एनओसी, पट्टा, म्यूटेशन, ट्रेड लाइसेंस और बिल्डिंग प्लान जैसी जरूरी सेवाओं के आवेदन पोर्टल पर तो दर्ज हैं, लेकिन निस्तारण फाइलों में उलझा है। बड़ी संख्या में आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। उनकी जानकारी आवेदकों को […]

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Mar 01, 2026

शुरू की गईं नगर निगम की ऑनलाइन सेवाएं आज लोगों के लिए लंबा इंतजार बनती जा रही हैं। फायर एनओसी, पट्टा, म्यूटेशन, ट्रेड लाइसेंस और बिल्डिंग प्लान जैसी जरूरी सेवाओं के आवेदन पोर्टल पर तो दर्ज हैं, लेकिन निस्तारण फाइलों में उलझा है। बड़ी संख्या में आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। उनकी जानकारी आवेदकों को नहीं दी गई। ऐसे में नगर निगम के डिजिटल सिस्टम ने लोगों की उम्मीदों को अधर में लटका दिया है। यहां लोगों को सुविधा के नाम पर सिर्फ तारीखें मिल रही हैं। पड़ताल में सामने आया कि 27 फरवरी तक निगम की 10 सेवाओं में करीब 37 हजार आवेदन आए। इनमें से 13 हजार से अधिक रिजेक्ट कर दिए गए। यानी 36 फीसदी आवेदन तो रिजेक्ट ही कर दिए। इनमें फायर एनओसी से लेकर ट्रेड लाइसेंस के आवेदन भी शामिल हैं।

दरअसल, ऑनलाइन आवेदन का उद्देश्य था कि घर बैठे लोगों का काम हो जाए और समय भी बचे, लेकिन नगर निगम की डिजिटल व्यवस्था में यही ‘क्लिक’ आमजन के लिए लंबा इंतजार बन गया।

आवेदनों का हाल

सेवा - कुल आवेदन- -स्वीकृति लम्बित

फायर एनओसी 11092- -7804 904

लीज डीज (पट्टा) 11149- -812 4665

ट्रेड लाइसेंस 3680- -1466 636

बिल्डिंग प्लान अप्रूवल 911- -79 538

असर क्या पड़ रहा?

-ट्रेड लाइसेंस और नवीनीकरण में देरी से नए प्रतिष्ठान शुरू करने में अड़चन हो रही है। कई लोग बिना लाइसेंस के ही प्रतिष्ठान शुरू कर चुके हैं।

-बिल्डिंग प्लान अप्रूवल लंबित होने से निर्माण ठप हैं। वहीं, कुछ निर्माण ऐसे भी हैं जो निगम अधिकारियों की मिलीभगत से किए जा रहे हैं।

-पट्टा और म्यूटेशन में देरी से सम्पत्ति खरीद और बिक्री अटकी हुई है। नामांतरण भी अटक गए हैं।

-फायर एनओसी लंबित होने से स्कूल, होटल और कॉमर्शियल भवन संचालन बिना फायर अनुमति के ही चल रहे हैं। ऐसे में हादसा होने पर जिम्मेदार कौन होगा?

इनके आवेदन किए खारिज

सेवा संख्या

लीज डीड (पट्टा) 5675

फायर एनओसी 2348

ट्रेड लाइसेंस 1514

म्यूटेशन 1671

समस्याओं की भी नहीं हो रही सुनवाई

नगर निगम लोगों की नहीं सुन रहा है। स्थिति यह है कि सफाई से लेकर सीवर और अवैध निर्माण की शिकायतें तो रोज दर्ज हो रही है, लेकिन इनके निस्तारण की प्रक्रिया बेहद धीमी है। स्थिति यह है कि सडक़ और नाली की सफाई की 1700 से अधिक शिकायतें लम्बित हैं। सीवर की समस्याएं भी 1600 के आस-पास हैं। इनको कम करने के लिए निगम के पसीने छूट रहे हैं। निगम में छह हजार से अधिक शिकायतें लम्बित हैं।

सीएस के निर्देश...सक्रिय हुए आयुक्त

नगर निगम में लोगों की समस्याओं के निस्तारण की धीमी चाल पर आयुक्त गौरव सैनी ने बैठक की। उन्होंने पट्टा जारी करने में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से 10 मार्च तक पट्टे के लम्बित प्रकरणों का निस्तारण करने की बात कही। नाम हस्तान्तरण, उपविभाजन, पुनर्गठन के सभी प्रकरणों को त्वरित गति से निस्तारण कर आमजन को राहत देने का प्रयास करने को कहा। साथ ही कहा कि जिन पट्टों को खारिज किया गया उनकी सूचना आवश्यक रूप से दें।आयुक्त ने फायर एनओसी, बिल्डिंग अप्रूवल, ट्रेड लाइसेंस और सब डिवीजन के प्रकरणों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। दरअसल, कुछ दिन पहले मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से लम्बित प्रकरणों को निस्तारित करने की बात कही थी।

Published on:
01 Mar 2026 06:10 pm
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