जयपुर

जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज

Jal Jeevan Mission: जल जीवन मिशन में 20 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल समेत अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने फैसला सुनाया।
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Aug 13, 2026
mahesh joshi gets no relief from rajasthan high court
पूर्व मंत्री महेश जोशी (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Jal Jeevan Mission Scam: राजस्थान के जल जीवन मिशन से जुड़े करीब 20 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित मामले में नामजद कई अन्य मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। इससे पहले जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने 5 अगस्त को सभी पक्षों की दलीलें और बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी हुईं खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने केवल पूर्व मंत्री ही नहीं, बल्कि इस बड़े घोटाले में शामिल कई अन्य अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी राहत देने से इनकार कर दिया। जमानत अर्जी खारिज होने वालों में इन लोगों के नाम शामिल हैं।

  • पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल
  • संजय बड़ाया
  • महेंद्र प्रकाश सोनी
  • कृष्णदीप गुप्ता
  • संजीव कुमार गुप्ता
  • दिलीप कुमार गौड़
  • आरोपी मुकेश पाठक

क्या रहा हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष?

जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी, एडवोकेट नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा ने आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और पद का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए गंभीर आरोपों को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

महेश जोशी के वकील का तर्क

कोर्ट में सुनवाई के दौरान महेश जोशी के वकील स्नेहदीप ने तर्क दिया कि FIR के डेढ़ साल बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक ईडी हिरासत के दौरान ACB ने उन्हें कस्टडी में लेने का प्रयास नहीं किया। वह बिड एवैल्यूएशन या फाइनेंस कमेटी के सदस्य भी नहीं थे और टेंडर का काम प्रशासनिक अधिकारियों ने किया था।

वहीं, दूसरी ओर तत्कालीन एसई महेंद्र प्रकाश सोनी के वकील सुधीर जैन ने कहा कि समान तथ्यों पर एक से अधिक FIR दर्ज की गई हैं। ठेका फर्म के संचालकों को राहत मिल चुकी है और चार्जशीट दाखिल होने के कारण ट्रायल में लंबा समय लगेगा।

इसका विरोध करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी और अधिवक्ता अमन अग्रवाल ने कहा कि तत्कालीन मंत्री होने के नाते आरोपी विभाग के प्रमुख थे और अन्य आरोपियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऊंची दरों पर टेंडर दिए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

Updated on:
13 Aug 2026 02:15 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:36 pm