आरजीएचएस में अनियमितताओं पर राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए सीकर के 7 डॉक्टर निलंबित किए हैं। भरतपुर के कशिश फार्मेसी व नर्सिंग होम पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। बिना अनुमति बोर्ड लगाकर लाभार्थियों का इलाज कर पोर्टल पर फर्जी बिल समायोजित कर भुगतान लेने के मामले में एफआईआर दर्ज होगी।
जयपुर: राज्य सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले के 7 चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। एक अस्पताल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम ने मिलीभगत कर योजना में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुंचाई है। अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल ने आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित नहीं होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया।
उन्होंने अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया और टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए। उपचार के बाद अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर समायोजित कर भुगतान प्राप्त किया। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर कार्रवाई की जा रही है।
बीकानेर के डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं। कुछ मरीजों के जांचों का औचित्य स्पष्ट नहीं था। कुछ मामलों में टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई। ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।
पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताया कि पर्चियों पर उनके नाम एवं सील पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके नहीं हैं। कुछ चिकित्सकों संबंधित अवधि में अवकाश पर थे या उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था।