जयपुर

राजस्थान में भजनलाल सरकार ने बढ़ाया ‘ओवरटाइम’, तो MLA रविंद्र सिंह भाटी ने क्यों जताया ऐतराज?

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र 2026 में 'राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान विधेयक' पर चर्चा के दौरान मजदूरों के हक और पश्चिमी राजस्थान के युवाओं के रोजगार का मुद्दा गरमाया रहा। सदन में इस विधेयक के सकारात्मक पहलुओं का स्वागत तो हुआ, लेकिन ओवरटाइम की सीमा में की गई भारी वृद्धि और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार को कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।
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Updated: 6 Mar 2026, 12:36 PM IST
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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में 'राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान विधेयक 2026' पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल उस वक्त गंभीर हो गया जब मजदूरों के शोषण और सुरक्षा मानकों का मुद्दा उठाया गया। जहाँ एक ओर विधेयक में प्रशिक्षुओं की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष करने जैसे सुधारों की सराहना हुई, वहीं ओवरटाइम की सीमा को सीधे तीन गुना करने के प्रावधान पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया।

ओवरटाइम में 3 गुना वृद्धि: "मजदूर हैं या मशीन?"

विधेयक में सबसे विवादास्पद मुद्दा ओवरटाइम की समय सीमा को 50 घंटे से बढ़ाकर सीधे 144 घंटे करना रहा।

  • तर्कहीन वृद्धि: शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन में सवाल उठाया कि जब अन्य प्रावधानों में आंशिक सुधार किए गए हैं, तो ओवरटाइम में यह अचानक तीन गुना वृद्धि किस आधार पर की गई है?
  • भुगतान की निगरानी: यह चिंता भी जताई गई कि मजदूरों को इस अतिरिक्त काम का पूरा और समय पर भुगतान मिलेगा या नहीं, इसकी निगरानी के लिए सरकार के पास क्या तंत्र है।

डिजिटल भुगतान की मांग: भ्रष्टाचार पर 'UPI' की चोट

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मजदूरों को मजदूरी न मिलने या कम मिलने की शिकायतों पर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को अहम सुझाव दिए गए:

  • पारदर्शिता का अभाव: अक्सर मजदूर काम तो करते हैं, लेकिन उन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल पाता।
  • अनिवार्य डिजिटल पेमेंट: सरकार से आग्रह किया गया कि सभी श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डिजिटल माध्यम (UPI/ऑनलाइन ट्रांजैक्शन) से अनिवार्य किया जाए। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और पारदर्शिता आएगी।

पश्चिमी राजस्थान: औद्योगिक चमक के पीछे 'सुरक्षा' का अंधेरा

पश्चिमी राजस्थान में चल रही बड़ी परियोजनाओं और मल्टीनेशनल कंपनियों में मजदूरों की सुरक्षा की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया गया:

  • सेफ्टी मानकों की अनदेखी: औद्योगिक दुर्घटनाओं में घायल होने वाले या जान गंवाने वाले मजदूरों की पैरवी करने वाला कोई नहीं होता।
  • कंपनियों की जिम्मेदारी: कंपनियों द्वारा जिम्मेदारी से हाथ खींच लेने की प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए सख्त निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की गई।

"इंसान है मजदूर, चाहे वह किसी भी राज्य का हो"

मजदूरों की गरिमा पर जोर देते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन में कहा कि चाहे श्रमिक बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात का हो या राजस्थान का—वह सबसे पहले एक इंसान है। सरकार को उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए समय-समय पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि उन्हें कार्यस्थल पर वास्तविक सुरक्षा मिल सके।

स्थानीय रोजगार नीति: पश्चिमी राजस्थान के युवाओं का हक

सदन में पश्चिमी राजस्थान के युवाओं के भविष्य का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा:

  • MNCs में स्थानीय उपेक्षा: कई मल्टीनेशनल कंपनियां वहां काम कर रही हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
  • स्पष्ट नीति की मांग: कम से कम अनस्किल्ड (अकुशल) और प्राथमिक स्तर की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए एक स्पष्ट सरकारी नीति बनाने का आग्रह किया गया है। क्या बदलेगा: मुख्य प्रावधान-दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों में दैनिक कार्य समय 9 से बढ़ाकर 10 घंटे किया गया।-साप्ताहिक कार्य अवधि 48 घंटे ही रहेगी।-ओवरटाइम की सीमा 50 घंटे प्रति तिमाही से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई।- लगातार काम के बाद विश्राम की सीमा 5 घंटे से बढ़ाकर 6 घंटे।बच्चों और किशोरों से जुड़े नए नियम-प्रशिक्षु की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष।-14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर रखने पर रोक।-किशोरों की आयु श्रेणी अब 14 से 18 वर्ष।-14 से 18 वर्ष के किशोरों से रात्रि में काम नहीं लिया जा सकेगा।
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6 Mar 2026, 12:36 PM IST
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