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काम की खबर : राजस्थान में अब ‘अमिताभ बच्चन’ की फर्जी आवाज-वीडियो से करोड़ों की ठगी, पुलिस ने जारी की एडवाइज़री 

Rajasthan Police Advisory: राजस्थान पुलिस की बड़ी साइबर एडवाइजरी। अमिताभ बच्चन और बड़े उद्योगपतियों के डीपफेक वीडियो से हो रही करोड़ों की ठगी। एडीजी वीके सिंह ने दी 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत की सलाह।

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Rajasthan Police Cyber Advisory AI Deepfake Amitabh Bachchan Fake Investment Apps

Rajasthan Police Cyber Advisory - AI PIC

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने साइबर अपराधों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरनाक हथकंडों को देखते हुए प्रदेश की जनता के लिए एक चेतावनी जारी की है। इस एडवाइज़री में बताया गया है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों के चेहरों और उनकी आवाजों का क्लोन तैयार कर रहे हैं। इस नए और हाईटेक तरीके से हो रही वित्तीय धोखाधड़ी पर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है। पुलिस के मुताबिक वर्तमान में फर्जी स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट ऐप्स, डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया विज्ञापनों का एक ऐसा जाल बुना गया है, जिसके जरिए राजस्थान के अलग-अलग जिलों से हर दिन करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।

'महानायक' की फर्जी आवाज का हो रहा इस्तेमाल

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) वीके सिंह ने इस नए साइबर ट्रेंड का पूरा खुलासा करते हुए बताया कि अपराधी किस प्रकार तकनीक का सहारा लेकर सीधे लोगों के मनोविज्ञान से खेल रहे हैं।

एडीजी वीके सिंह ने बताया, "आजकल साइबर अपराधी बेहद शातिर हो चुके हैं। वे इंटरनेट पर मौजूद प्रसिद्ध निवेशकों, बड़े उद्योगपतियों और सेलिब्रिटीज, विशेष रूप से महानायक अमिताभ बच्चन जैसे लोकप्रिय चेहरों के असली वीडियो फुटेज उठाते हैं। इसके बाद एआई टूल्स (AI Tools) की मदद से उनकी नकली आवाज (Voice Clone) और चेहरे के हाव-भाव को पूरी तरह से बदल देते हैं। इन फर्जी विज्ञापनों में कथित तौर पर यह दावा किया जाता है कि अमुक नामचीन हस्ती ने किसी खास ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए बहुत कम समय में अपनी संपत्ति को कई गुना बढ़ा लिया है। लोग इन सेलिब्रिटीज पर भरोसा करके अनजाने में उन फ्रॉड लिंक्स पर क्लिक कर देते हैं।"

जानिए कैसे काम करता है यह पूरा चक्रव्यूह

पुलिस जांच और तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, साइबर अपराधियों द्वारा मरुधरा के मध्यमवर्गीय परिवारों और युवाओं को अपने जाल में फंसाने की प्रक्रिया पूरी तरह से चरणबद्ध और संगठित होती है:

  • पहला चरण : आकर्षक विज्ञापन : ठग सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे बेहद लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेहद आकर्षक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन चलाते हैं। इन विज्ञापनों में स्लोगन लिखे होते हैं जैसे- 'केवल 10,000 रुपये लगाएं और हर दिन घर बैठे 5,000 रुपये कमाएं'।
  • दूसरा चरण 2 : फर्जी ग्रुप्स में एंट्री : जैसे ही कोई व्यक्ति जिज्ञासावश इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है, उसे सीधे व्हाट्सएप (WhatsApp) या टेलीग्राम पर बने "एलीट इंवेस्टमेंट ग्रुप" या "सुपर ट्रेडिंग क्लब" जैसे बेहद प्रोफेशनल दिखने वाले ग्रुप्स में ऑटोमैटिकली जोड़ दिया जाता है।
  • तीसरा चरण : बॉट्स और फर्जी स्क्रीनशॉट : इन ग्रुपों के भीतर पहले से मौजूद 90% से अधिक सदस्य वास्तव में कोई असली इंसान नहीं होते, बल्कि वे साइबर अपराधियों के फर्जी अकाउंट्स या ऑटोमैटिक बॉट्स होते हैं। ये बॉट्स दिनभर ग्रुप में लाखों रुपये के मुनाफे के नकली और एडिटेड स्क्रीनशॉट साझा करके नए जुड़े व्यक्ति का विश्वास पूरी तरह से जीत लेते हैं।
  • चौथाचरण : फर्जी ऐप का इंस्टॉलेशन : जब पीड़ित पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है, तो ग्रुप का एडमिन उसे एक अनजान वेब लिंक या एपीके (APK File) भेजता है और एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाता है। यह ऐप सामान्य तौर पर गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद नहीं होता।

लाखों का फर्जी मुनाफा, पैसे निकालने पर असली खेल

इस ठगी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआत में जब पीड़ित व्यक्ति इस फर्जी ऐप के भीतर 10,000 या 20,000 रुपये जमा करता है, तो अपराधियों का सॉफ्टवेयर ऐप के डिजिटल डैशबोर्ड पर उसका मुनाफा बढ़ाकर दिखाने लगता है। पीड़ित को लगता है कि उसकी रकम सचमुच बढ़ रही है, जिससे उत्साहित होकर वह अपनी जमा-पूंजी और लोन लेकर लाखों रुपये उस ऐप में ट्रांसफर कर देता है।

लेकिन असली धोखा तब सामने आता है जब निवेशक अपनी बड़ी हो चुकी राशि को अपने वास्तविक बैंक खाते में निकालने का प्रयास करता है। जैसे ही पीड़ित विड्रॉ बटन दबाता है, ऐप उसे ब्लॉक कर देता है या फिर अपराधियों की तरफ से कॉल आता है कि इस राशि को निकालने के लिए आपको पहले 20% टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी कमीशन या अन्य प्रशासनिक शुल्कों के नाम पर और अतिरिक्त रकम जमा करानी होगी। इस प्रकार पीड़ित से बार-बार पैसे ऐंठे जाते हैं और अंततः ठग सारा पैसा समेटकर गायब हो जाते हैं और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप को पूरी तरह से डिलीट कर देते हैं।

राजस्थान पुलिस की सुरक्षा गाइडलाइन: बचने के 6 उपाय

एडीजी वीके सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा और एकमात्र हथियार है। पुलिस ने ठगी से बचने के लिए 6 कड़े और व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:

  1. केवल आधिकारिक स्टोर का करें उपयोग: अपने मोबाइल में कोई भी वित्तीय या ट्रेडिंग ऐप हमेशा केवल गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। किसी भी अनजान व्हाट्सएप लिंक, टेलीग्राम मैसेज या वेबसाइट से मिली एपीके (.APK) फाइल को अपने फोन में कभी भी इंस्टॉल न करें।
  2. सेबी (SEBI) पंजीकरण की जांच: किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म, कंपनी या ब्रोकर को पैसा देने से पहले भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसका पंजीकरण नंबर और सत्यता अवश्य जांचें।
  3. अपरिचित खातों में ट्रांसफर से बचें: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर या किसी अज्ञात चालू खाते में सीधे नेट बैंकिंग, यूपीआई या आरटीजीएस के जरिए पैसा ट्रांसफर करने से पूरी तरह बचें।
  4. ग्रुप प्राइवेसी सेटिंग्स बदलें: अपने व्हाट्सएप और टेलीग्राम की प्राइवेसी सेटिंग्स को तुरंत अपग्रेड करें। ग्रुप इनविटेशन सेटिंग को "एवरीवन" (Everyone) से बदलकर "माय कॉन्टैक्ट्स" (My Contacts) पर रखें, ताकि कोई भी अज्ञात साइबर अपराधी आपको आपकी मर्जी के बिना किसी फ्रॉड इन्वेस्टमेंट ग्रुप में न जोड़ सके।
  5. स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें: यदि सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी या बड़े बिजनेसमैन का कोई वीडियो निवेश की सलाह देता हुआ दिखाई दे, तो उस पर तुरंत भरोसा करने के बजाय मुख्यधारा की समाचार वेबसाइटों पर जाकर उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य करें।
  6. जल्दी मुनाफे का लालच छोड़ें: यह हमेशा याद रखें कि वैध वित्तीय बाजारों में कोई भी निवेश योजना इतनी कम अवधि में बिना किसी जोखिम के दोगुना या तीन गुना रिटर्न सुनिश्चित रूप से प्रदान नहीं कर सकती। जल्दी अमीर बनने का लालच ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है।

अगर हो गई है साइबर ठगी, तो घबराएं नहीं

यदि कोई नागरिक अनजाने में इस प्रकार के किसी जाल में फंस जाता है और उसके बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं, तो राजस्थान पुलिस ने त्वरित शिकायत दर्ज कराने और पैसे होल्ड कराने के लिए आपातकालीन चैनलों की जानकारी साझा की है।

साइबर फ्रॉड होने के तुरंत बाद पीड़ित को बिना समय गंवाए (Golden Hours के भीतर) राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर अपनी पूरी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार की राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करना चाहिए, ताकि पुलिस आपके बैंक और ठगों के बैंक के बीच संपर्क करके ट्रांजैक्शन को बीच में ही फ्रीज करवा सके।

इसके साथ ही, राजस्थान पुलिस ने विशेष रूप से राज्य के निवासियों के लिए अपने स्थानीय साइबर हेल्पडेस्क नंबर भी जारी किए हैं। मरुधरा के नागरिक किसी भी साइबर आपातकाल के समय 9256001930 एवं 9257510100 पर भी सीधे संपर्क स्थापित कर पुलिस की तकनीकी टीम से त्वरित सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

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