
कृषि भूमि पर बसी कॉलोनी। Photo: AI-generated
Rajasthan Sahri Seva Shivir: जयपुर। शहरी सेवा शिविरों में कृषि भूमि पर विकसित कॉलोनियों का भी आसान शुल्क में नियमन होगा। सरकार ने 31 दिसंबर, 2021 से पहले बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए प्रीमियम, आंतरिक बाह्य विकास शुल्क और बीएसयूपी शुल्क 25 से 50 प्रतिशत तक छूट देने के साथ ले-आउट प्लान मंजूरी के नियम भी आसान कर दिए हैं। इनमें 100 वर्गमीटर तक के भू-खंडों पर 50 प्रतिशत, 101 से 200 वर्गमीटर तक 40 प्रतिशत और 201 से 500 वर्गमीटर तक 25 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
वहीं, कृषि भूमि पर विकसित ऐसी कॉलोनियां, जहां उस तारीख तक कम से कम 10 प्रतिशत मकान बन चुके हों और बिजली-पानी के पुराने बिल उपलब्ध हों, उनका 70:30 के अनुपात पर ले-आउट प्लान स्थानीय निकाय स्तर पर ही मंजूर किया जा सकेगा।
डीनोटिफाइड कच्ची बस्तियों में 1 जनवरी, 2013 से पहले से रह रहे लोगों को भी पट्टा मिलेगा। ऐसे आवासों का नियमन आवासीय आरक्षित दर या डीएलसी दर (जो अधिक हो) के 25 प्रतिशत शुल्क पर किया जाएगा। जिन लोगों के पास पहले से 110 वर्गगज का पट्टा है और अतिरिक्त भूमि पर कब्जा है, वे 90 वर्गगज तक अतिरिक्त भूमि का भी इसी दर पर नियमन करा सकेंगे।
-आवासीय भू-खंडों के उप-विभाजन और पुनर्गठन पर 250 वर्गमीटर तक 75% शुल्क छूट।
-250 से 500 वर्गमीटर तक के भू-खंडों पर 50% शुल्क छूट।
-500 से 1000 वर्गमीटर तक के भू-खंडों पर 25% शुल्क छूट।
-1000 वर्गमीटर से बड़े भू-खंडों पर कोई शुल्क छूट नहीं।
-भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में 500 वर्गमीटर तक 50% शुल्क छूट।
-500 से 1000 वर्गमीटर तक भू-उपयोग परिवर्तन पर 25% शुल्क छूट।
सरकारी जमीन पर 1 जनवरी, 2013 तक बसी कॉलोनियों का नियमन होगा। नियमन शुल्क आवासीय आरक्षित दर अथवा आवासीय डीएलसी दर में जो अधिक होगी, उसके 25% के आधार पर तय होगी। सड़क चौड़ाई 60 फीट से ज्यादा है तो नियमन की अनुमति नहीं होगी। वहीं इन कॉलोनियों में मौजूद खाली भू-खंडों को संबंधित नगरीय निकाय अपने कब्जे में लेकन उनकी नीलामी कर सकेंगे। सरकार ने ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार करने के आदेश दिए, लेकिन यदि किसी का आवेदन ऑफलाइन मिलता है तो संबंधित नगरीय निकाय उसे ऑनलाइन दर्ज करेंगे।
नामांतरण, लीज होल्ड को फ्री होल्ड में बदलने, एनओसी तथा उप-विभाजन और पुनर्गठन जैसे मामलों में अब मौके का निरीक्षण नहीं किया जाएगा। आवेदनों पर आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 15 दिन से घटाकर 7 दिन कर दी गई है।
पुराने शहरी हिस्से में लंबे समय से कब्जे पर बसे (धारा 69-क) लोगों को 200 वर्गमीटर तक का पट्टा 100 रुपए प्रति वर्गमीटर, 200 से 500 वर्गमीटर तक 120 रुपए प्रति वर्गमीटर और इससे ज्यादा क्षेत्रफल के भू-खंड के लिए 200 रुपए प्रति वर्गमीटर दर ली जाएगी।
-पुरानी बकाया लीज राशि एकमुश्त जमा करने पर ब्याज में 100 प्रतिशत छूट
-कुछ मामलों में बकाया लीज राशि पर 60 प्रतिशत तक की छूट
Published on:
12 Jun 2026 08:34 am
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