
खेतों में पानी के लिए बनी डिग्गियां बनी मौत की वजह (Photo-Patrika)
Rajasthan Farm Pond Deaths: खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई डिग्गियां (फार्म पौंड) अब कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाले जख्म छोड़ रही हैं। कुछ हजार रुपए बचाने की कीमत मासूम बच्चों, महिलाओं और युवाओं की जान देकर चुकानी पड़ रही है। पिछले छह माह में प्रदेश में ऐसी डिग्गियों में डूबने से दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे गंभीर बात यह है कि मृतकों में 10 से अधिक बच्चे और किशोर शामिल हैं। अधिकांश हादसों में सुरक्षा इंतजाम नदारद मिले। कहीं चारदीवारी नहीं, कहीं सीढ़ी नहीं और कहीं सिर्फ एक जाली लगाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। नतीजतन, हर साल ग्रामीण परिवार अपनों को खोने का दर्द झेलने को मजबूर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण के दौरान अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तो ऐसे अधिकांश हादसों को रोका जा सकता है।
प्रदेश के बीकानेर, नागौर, जोधपुर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ समेत कई जिलों में खेतों में बनी डिग्गियां लगातार हादसों का कारण बन रही हैं। कई डिग्गियों के चारों ओर न तो चारदीवारी है, न मजबूत तारबंदी, न बाहर निकलने के लिए सीढ़ी और न ही चेतावनी बोर्ड। कहीं केवल तिरपाल बिछाकर गहरा गड्ढा पानी से भर दिया गया है, तो कहीं नाम मात्र की जाली लगाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। बरसात के मौसम में जब ये डिग्गियां लबालब भर जाती हैं, तब बच्चों और ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश हादसे टाले जा सकते हैं। यदि डिग्गियों का निर्माण तय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो और नियमित निगरानी की जाए तो हर साल कई परिवार उजड़ने से बच सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्मेदारी केवल किसानों की नहीं है। कृषि विभाग, पंचायत राज संस्थाएं और जिला प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिग्गियां सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनें। नई डिग्गियों का निरीक्षण हो, पुरानी डिग्गियों में सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य कराई जाए और गांवों व स्कूलों में बच्चों को इनके खतरे के प्रति जागरूक किया जाए।
जोधपुर जिले के तिंवरी क्षेत्र के मांडियाई खुर्द गांव में 6 जून की दोपहर तीन बच्चों की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। खेत के पास बनी डिग्गी में डूबने से 14 वर्षीय लक्ष्मी, आठ राधेश्याम और सात वर्षीय रोहित की मौत हो गई। रोहित गर्मी की छुट्टियां मनाने अपनी बुआ के घर आया था। करीब डेढ़ माह बाद भी परिवार उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है। लक्ष्मी की मां सकू देवी भराए गले से कहती हैं, 'मेरी एक ही बेटी थी… भगवान ने उसे भी छीन लिया। आज भी उसके कपड़े देखती हूं तो लगता है, अभी दौड़ती हुई घर आ जाएगी।' राधेश्याम की मां सुशीला देवी कहती हैं, 'मेरे बेटे के साथ मेरे भाई का बेटा भी इस हादसे का शिकार हो गया। एक ही पल में दो घरों की खुशियां खत्म हो गईं।'
हनुमानगढ़ के रासूवाला गांव में 3 फरवरी को गुरदीप सिंह (40) खेत में की डिग्गी में गिरने से गुरदीप सिंह (40) डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए बेटे लखविंद्र (22) और राजविंद्र (16) भी पानी में उतर गए, लेकिन तीनों बाहर नहीं निकल सके। इस हादसे में पिता और दोनों बेटों की मौत हो गई। परिवार में अब केवल गुरदीप सिंह की पत्नी और एक बेटी रह गई हैं।
एक डिग्गी के निर्माण पर औसतन तीन से साढ़े तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। इसके बावजूद कई जगह सुरक्षा इंतजामों पर अतिरिक्त खर्च से बचा जाता है। चारदीवारी, मजबूत फेंसिंग, सीढ़ी, चेतावनी बोर्ड और बचाव की व्यवस्था पर आने वाली राशि कुल लागत की तुलना में बहुत कम होती है, लेकिन यही बचत कई बार किसी परिवार के लिए सबसे बड़ी त्रासदी बन जाती है। राज्य के हर जिले में हजारों की संख्या में डिग्गियों का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन सुरक्षा पर ध्यान नहीं है।
डिग्गियों बच्चे और लोगों की डूबने की घटनाओं के बाद विभाग ने संज्ञान लिया है। डिग्गियों के पास बचाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाएंगे। वहां चेतावनी बोर्ड के साथ अन्य प्रावधानों का लागू कराया जाएगा। योजना की गाइड लाइन का पालन करने पर ही अनुदान दिया जाएगा। -नरेश कुमार, कृषि आयुक्त, राजस्थान
30 जून : जालबसर में खेत की डिग्गी में गिरने से मां-बेटी की मौत।
13 जून : धीरदेसर चोटियान की रोही में डिग्गी में डूबने से एक बुजुर्ग की मौत।
11 मई : लालासर की रोही में 13 वर्षीय बालिका की डूबने से मौत।
14 अप्रैल : कल्याणसर पुराना की रोही में खेत की डिग्गी में डूबने से एक युवक की मौत।
07 फरवरी : ठुकरियासर की रोही में खेत की डिग्गी में डूबने से दो सगे मासूम भाइयों की मौत।
9 अप्रैल: रायसिंहनगर के निकट ठंडी गांव में खेलते समय डिग्गी में डूबने से मासूम देवांशु व राघव की मौत।
12 अप्रैल: संगतपुरा वाटर वर्क्स में सफाई के दौरान रिछपाल सिंह (35) की डिग्गी में गिरने से मौत।
14 अप्रैल: रायसिंहनगर क्षेत्र के 11 टी के गांव में पैर फिसलने से एक किसान की डिग्गी में डूबकर मौत।
2 मई: श्रीविजयनगर के 33 जीबी में ईंट भट्ठा श्रमिक हरिशंकर की डिग्गी में डूबने से मौत।
21 मई: सादुलशहर के चक धौला में नहाते समय 14 वर्षीय चंद्रमोहन की डूबने से मौत।
11 जुलाई: घमूड़वाली थाना क्षेत्र के 54 एलएनपी में मीनाक्षी (41) ने डिग्गी में कूदकर आत्महत्या की।
21 जुलाई: रायसिंहनगर क्षेत्र के 45 एनपी गांव में गुरजीत सिंह और उसके छोटे भाई राजदीप सिंह की खेत में बनी पानी की डिग्गी में डूबने से मौत।
मई 2026 में टिब्बी के सालीवाला गांव में डिग्गी में गिरने से रविंद्र (22) और शाहरुख की मौत हो गई।
फरवरी 2026 में रासूवाला के एक खेत में डिग्गी में गिरने से गुरदीप और उसे बचाने के प्रयास में उसके दो बेटों लखविंदर और राजविंदर की मौत हो गई।
27 अप्रैल को मेड़ता के हरसोलाव में फार्म पौंड का तिरपाल ठीक करते समय पैर फिसलने से मनीष व उसे बचाने के प्रयास में रविन्द्र व यशपाल की मौत हो गई।
Updated on:
27 Jul 2026 11:07 am
Published on:
27 Jul 2026 11:07 am
