जयपुर

MSME Loans: राजस्थान सरकार के सहयोग से RFC ने तय किया 200 करोड़ रुपए ऋण वितरण का लक्ष्य

RFC ने इस पूंजी प्रवाह के साथ चालू वित्त वर्ष में 200 करोड़ रुपए के ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि वर्ष 2026–27 में भी उतनी ही राशि के ऋण वितरण की योजना है।
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Nov 06, 2025
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Business Growth: जयपुर। राजस्थान फाइनेंस कॉरपोरेशन (RFC) को बड़ी पूंजी सहायता मिली है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के बोर्ड ने RFC को 50 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य सरकार ने पहले ही 10 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। इस वित्तीय सहयोग से राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

RFC ने इस पूंजी प्रवाह के साथ चालू वित्त वर्ष में 200 करोड़ रुपए के ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि वर्ष 2026–27 में भी उतनी ही राशि के ऋण वितरण की योजना है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार ध्यान गुणवत्तापूर्ण ऋण वितरण पर रहेगा, जिससे राज्यभर में रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों को बढ़ावा मिल सके।

RFC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुबोध अग्रवाल ने कहा कि RIICO बोर्ड का यह निर्णय और राज्य सरकार द्वारा जारी राशि सही समय पर मिली है, जिससे निगम अपनी उधारी क्षमता बढ़ा सकेगा और वित्तीय अनुशासन भी बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में RFC ने वित्तीय रूप से उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2019–20 में 6.22 करोड़ रुपए के शुद्ध नुकसान से उबरकर वर्ष 2024–25 में निगम ने 18.82 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

वित्त वर्ष 2024–25 में कर पूर्व लाभ 19.92 करोड़ रुपए रहा, जो बेहतर वसूली, कम ब्याज दरों और संचालन दक्षता का परिणाम है। अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2023–24 में जहां ऋण स्वीकृति 104.51 करोड़ रुपये थी, वहीं वर्ष 2024–25 में यह दोगुनी बढ़कर 212.07 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसी तरह ऋण वितरण 83.65 करोड़ रुपए से बढ़कर 142.32 करोड़ रुपए हुआ।

उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि केंद्रित ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया, बेहतर निगरानी और कम प्रशासनिक ढांचे के कारण संभव हो सकी। पिछले पांच वर्षों में RFC ने अपने ऋण पोर्टफोलियो को काफी हद तक साफ किया है। वर्ष 2020–21 में जहां कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) 293.94 करोड़ रुपये थीं, वहीं वर्ष 2024–25 में यह घटकर 192.39 करोड़ रुपये रह गईं, यानी करीब 34 प्रतिशत की कमी।

निगम की कुल बकाया ऋण राशि मार्च 2025 के अंत में 551.27 करोड़ रुपये रही। पुराने खातों के निपटान के लिए RFC ने वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजनाएं भी जारी रखीं। वर्ष 2022–23 में 67 इकाइयों ने OTS योजना के तहत पंजीकरण कराया, जिससे 26.76 करोड़ रुपये की वसूली हुई।

आधुनिकीकरण के प्रयासों के तहत RFC ने अपनी शाखाओं और कर्मचारियों की संख्या में भी कमी की है। वर्ष 2014–15 में 38 शाखाएं थीं, जो अब घटकर 11 रह गई हैं। वहीं, कर्मचारियों की संख्या 628 से घटकर 176 रह गई है। इससे प्रशासनिक खर्च घटा है और पूंजी का उपयोग अब उद्योगों को ऋण देने में किया जा सकेगा।

Updated on:
06 Nov 2025 03:45 pm
Published on:
06 Nov 2025 03:42 pm