
जयपुर। सरकार ने नाहरगढ़ इकोसेंटेटिव जोन व बफर जोन में बसे लोगों को पट्टे देने का आदेश जारी कर दिया है। यहां बसे पुराने आशियानों को पट्टे मिल सकेंगे। हालांकि, नए स्थाई निर्माण पर रोक रहेगी। जबकि, खाली भूखंड का पट्टा लेने से पहले भूखंड मालिक को एक शपथ पत्र देना होगा कि वो यहां कोई नया निर्माण नहीं करेगा। नगरीय विकास विभाग ने पिछले दिनों इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत ज्यादा से ज्यादा पट्टों की रेवड़ी बांटने के लिए ऐसा किया गया है। इससे करीब 15 हजार से ज्यादा पट्टे जारी हो सकेंगे।
कोर्ट आदेश की यह व्याख्या....सुप्रीम कोर्ट के आदेश में नए निर्माण पर प्रतिबंध है, लेकिन पहले से निर्मित भवन के लिए पट्टे देने पर कोई प्रतिबंध स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है। इसलिए पहले से निर्मित भवन का पट्टा दिया जा सकेगा।
यूं बनी स्थिति..
देशभर के अभ्यारण्य के इको सेंसिटिव जोन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया था। इसके तहत किसी भी नेशनल पार्क या सेंचुरी का इको सेंसिटिव जोन कम से कम एक किलोमीटर के परिधि में होना चाहिए। जयपुर में जेडीए और निगम निगम हैरिटेज क्षेत्र में आने वाले नाहरगढ़ अभ्यारण्य इको सेंसिटिव जोन सेंचुरी की बाउंड्री तेरह किलोमीटर तक है। इसमें सैकड़ों निर्माण हैं।